वर्तमान समय में सोशल मीडिया स्वतंत्र अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बन गया है। युवा व बुजुर्ग सभी सक्रिय दिखाई देते हैं ।पर लॉकडाउन के वजह से सोशल मीडिया पर सक्रियता ज्यादा बढ़ गई है।सोशल साइट्स मन की भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम ही नहीं मन को जोड़ने का साधन भी बन गया है। मन की पीड़ा की अभिव्यक्ति, राग- द्वेष ,प्रेम इजहार सब का माध्यम बन गया है।
आज लॉकडाउन के समय में जब सारे लोग अपने घरों में लॉकडाउन है सरकार कोरोना से संबंधित नियम,गाइडलाइनस जन-जन तक पहुंचाने में सोशल मीडिया के द्वारा अच्छी तरह समर्थ हो रही है । देश- विदेश के डॉक्टर कोरोनावायरस से लड़ने में क्या सतर्कता व सावधानियां बरतनी चाहिए इससे संबंधित महत्वपूर्ण बातों की जानकारी हम तक पहुंचाने में सक्षम हो रहे हैं।
लॉकडाउन के दौरान छुट्टियों की वजह से सभी लोग अपने समय का सदुपयोग सोशल मीडिया के मार्फत क्रिएटिविटी को उभारने में कर रहे हैं। युवा वर्ग में सोशल नेटवर्किंग साइट्स का क्रेज दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। इसके माध्यम से सभी अपने हुनर को निखारने में लगे हैं। कोई कविता लिख रहा है, कोई आर्टिकल ,कोई कोट्स के माध्यम से अपना सुविचार व्यक्त कर रहा है ,कोई वीडियो बना एक दूसरे तक न्यूज़ पहुंचा रहा है तो कोई वीडियो द्वारा गलत कार्यों का भंडाफोड़ कर रहा है। कोई वाद्य यंत्र पर संगीत सुना रहा है ,कोई चित्रकला द्वारा ,कोई पाक कला द्वारा अपने हुनर को निखारने में लगा है। गुणों को निखारने में अधिकांश जनता व्यस्त दिखाई दे रही है। पहले हम राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल पर निर्भर रहते थे पर अब सोशल मीडिया के माध्यम से हम स्वतंत्र न्यूज़ चैनल द्वारा हर तरह के समाचारों से अवगत हो रहे हैं।
इस तरह से हम देख रहे हैं कि लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया की सक्रियता इतनी अधिक बढ़ गई है कि समय की बोरियत महसूस नहीं होती। एक तरह से सोशल मीडिया वरदान साबित हो रहा है। सभी समय का सदुपयोग करते हुए नए-नए चीजों को सीखने में लगे हैं।
सोशल मीडिया की बढ़ती सक्रियता का एक पक्ष वरदान तो दूसरा पक्ष अभिशाप भी बनता जा रहा है। बेवजह राजनीति में पड़ते हुए जब लोग भद्दे कमेंट करते हैं तब इसका बुरा असर पड़ता है। लोगों में दूरियां बढ़ती है, समाज में नफरत भी फैलता है जो कदापि ठीक नहीं।
हमें सावधानी बरतनी है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हुए इसका सदुपयोग करें। अच्छे कार्य द्वारा देश हित में योगदान करें ताकि हमारे लिए सोशल मीडिया वरदान साबित हो अभिशाप नहीं ।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)