Tuesday, 28 April 2020

लॉकडाउन के वजह से सोशल मीडिया पर बढ़ी सक्रियता

लॉकडाउन के वजह से सोशल मीडिया पर बढ़ी सक्रियता----
वर्तमान समय में सोशल मीडिया स्वतंत्र अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बन गया है। युवा व बुजुर्ग सभी सक्रिय दिखाई देते हैं ।पर लॉकडाउन के वजह से सोशल मीडिया पर सक्रियता ज्यादा बढ़ गई है।सोशल साइट्स मन की भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम ही नहीं मन को जोड़ने का साधन भी बन गया है। मन की पीड़ा की अभिव्यक्ति, राग- द्वेष ,प्रेम इजहार सब का माध्यम बन गया है।
आज लॉकडाउन के समय में जब सारे लोग अपने घरों में  लॉकडाउन है सरकार कोरोना से संबंधित नियम,गाइडलाइनस जन-जन तक पहुंचाने में सोशल मीडिया के द्वारा अच्छी तरह समर्थ हो रही है । देश- विदेश के डॉक्टर कोरोनावायरस से लड़ने में क्या सतर्कता व सावधानियां बरतनी चाहिए इससे संबंधित महत्वपूर्ण बातों की जानकारी हम तक पहुंचाने में सक्षम हो रहे हैं।
      लॉकडाउन के दौरान छुट्टियों की वजह से सभी लोग अपने समय का सदुपयोग सोशल मीडिया के मार्फत क्रिएटिविटी को उभारने में कर रहे हैं। युवा वर्ग में सोशल नेटवर्किंग साइट्स का क्रेज दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। इसके माध्यम से सभी अपने हुनर को निखारने में लगे हैं। कोई कविता लिख रहा है, कोई आर्टिकल ,कोई कोट्स के माध्यम से अपना सुविचार व्यक्त कर रहा है ,कोई वीडियो बना एक दूसरे तक न्यूज़ पहुंचा रहा है तो कोई वीडियो द्वारा गलत कार्यों का भंडाफोड़ कर रहा है। कोई वाद्य यंत्र पर संगीत सुना रहा है ,कोई चित्रकला द्वारा ,कोई पाक कला द्वारा अपने हुनर को निखारने में लगा है। गुणों को निखारने में अधिकांश जनता व्यस्त दिखाई दे रही है। पहले हम राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल पर निर्भर रहते थे पर अब सोशल मीडिया के माध्यम से हम स्वतंत्र न्यूज़ चैनल द्वारा हर तरह के समाचारों से अवगत हो रहे हैं। 
   इस तरह से हम देख रहे हैं कि लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया की सक्रियता इतनी अधिक बढ़ गई है कि समय की बोरियत महसूस नहीं होती। एक तरह से सोशल मीडिया वरदान साबित हो रहा है। सभी समय का सदुपयोग करते हुए नए-नए चीजों को सीखने में लगे हैं।
    सोशल मीडिया की बढ़ती सक्रियता का एक पक्ष वरदान तो दूसरा पक्ष अभिशाप भी बनता जा रहा है। बेवजह राजनीति में पड़ते हुए जब लोग भद्दे कमेंट करते हैं तब इसका बुरा असर पड़ता है। लोगों में दूरियां बढ़ती है, समाज में नफरत भी फैलता है जो कदापि ठीक नहीं।
    हमें सावधानी बरतनी है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हुए इसका सदुपयोग करें। अच्छे कार्य द्वारा देश हित में योगदान करें ताकि हमारे लिए सोशल मीडिया वरदान साबित हो अभिशाप नहीं ।
                       सुनीता रानी राठौर
                         ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Monday, 27 April 2020

कोरोना के जंग में गरीब मजदूरों का योगदान

 
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गरीब मजदूर राष्ट्र के रीढ़ होते हैं। राष्ट्र को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं । मेहनतकश मजदूर हीं राष्ट्र के नींव को मजबूती प्रदान करते हैं तभी उद्योगपति सफलता प्राप्त करते हैं।
करोना जैसी महामारी जिससे पूरा विश्व त्रस्त है उसका सबसे बड़ा खामियाजा गरीब मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। अमीरों द्वारा लाई गई बीमारी का शिकार गरीब मजदूरों को होना पड़ा। हम सभी को उनका शुक्रगुजार होना चाहिए क्योंकि उनकी रोजी-रोटी छिन गई , आय का कोई स्रोत नहीं , अपना व अपने परिवार के लिए दाने-दाने को मोहताज होने के बावजूद भी इस विकट परिस्थिति में देशहित को ध्यान में रखते हुए वे सभी लॉक डाउन का पालन करते हुए सरकार का साथ निभा रहे हैं । सरकार के फैसले के प्रति उनके मन में आक्रोश नहीं । ये मूक समर्थन ही सरकार और देश हित में उनका अमूल्य योगदान है।
       भविष्य सुरक्षित रहे, जीवन सुरक्षित रहे ,
 हमारा देश एकजुटता का मिशाल बन जाये----इस भावना को दिल में समेट वे कई कई दिन भूखे पेट काटे  पर गरीब भाई -बंधु विद्रोही रूप नहीं अख्तियार किए । लॉकडाउन की सबसे बड़ी मार उनके जीवनयापन पर पड़ी तदुपरान्त वे संयम व  सहनशीलता का परिचय देते हुए अपना योगदान देश हित में अप्रत्यक्ष रूप से प्रदान कर रहे हैं ।
    हम सभी को उनका हार्दिक आभार जताते हुए उनकी दयनीय स्थिति के बारे में गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है ।
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                             सुनीता रानी राठौर
                             ग्रेटर नोएडा 
                       

"उफ !ये गलतफहमियां"