Friday, 14 February 2020

-------- "श्रद्धांजलि वीर जवानों को"---------

शब्दों में  सामर्थ्य नहीं, शहादत को पंक्तिबद्ध करूँ
जुंबा मे इतनी ताकत नहीं, कुर्बानी को ब्यां करूँ ।
वीरों का बह रहा लहू ,आक्रोश कैसे व्यक्त करूँ ?
उस करुण क्रंदन को,किन शब्दों में चित्रण करूँ ।

 रात्रि की निस्तब्धता को,रौंदती चीखें अपनों की ।
    सारे सपने ढह गए , दीवार जैसे रेत की । 
तिरंगे म़े देख शहीदों को , तिरंगा भी रोता दिखा ।
ये कैसी हैवानियत, दहशतगर्दी ही वाजिब दिखा ।

मृतप्राय वे दहशतगर्द, जो खूनी होली खेल रहे ।
वे आतंक पथ पे बढ़े हम मौत का मंजर झेल रहे 
 चढ़ा जुनून जेहाद का पथ विचलित युवाओं में ।
  लिख रहे सकून दिल का, मौत की स्याही में ।

रक्तरंजित हुई धरती, मानवता को धिक्कार रही।
 शहीदों की शहादत पर, इंसानियत भी रो रही ।
 मर कर जो हुए अमर, सर झुके हैं  शहादत में ।
            करूँ शत-शत उन्हें नमन
       जो शहीद हुए हमारी हिफाजत में ।
------------*--------------सुनीता रानी राठौर

Wednesday, 5 February 2020

"एक चुनाव ऐसा भी हो"

               एक चुनाव ऐसा भी हो
     जिसमें प्रधानमंत्री की तटस्थ भूमिका हो ,
     जिसमें मुद्दा रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा हो ।
    नेता का शिक्षा स्नातक डिग्री अनिवार्य हो ।
   सेवानिवृत्ति की आयु साठ वर्ष निर्धारित हो।

                 एक चुनाव ऐसा भी हो
     जिसमें न प्रचार हो न पैसे की बरबादी हो,
    पांच वर्षों के कार्यों व वादों पर आंकलन हो ।
    कार्य नहीं करे पूर्ण तो दंड का प्रावधान हो ।
    दागियों को टिकट देने पर पूर्ण प्रतिबंध हो ।

                 एक चुनाव ऐसा भी हो
   जिसमें गड़े मुर्दे न उखाड़  मुद्दे पर बात हो ,
   क्षेत्रिय विधायक पर्सनली समस्या सुनता हो ।
   बद्जुबानी, स्तरहीन भाषा पे आयोग सख्त हो।
    दल बदलुओं हेतु सख्त नियम अनिवार्य हो ।
------------------*----------------सुनीता रानी राठौर