Friday, 31 July 2020
क्या शिक्षा नीति बुनियादी समस्याओं को दूर करने में सक्षम है?
Thursday, 30 July 2020
चाटुकारिता
Wednesday, 29 July 2020
Tuesday, 28 July 2020
क्या रामलला जन्मभूमि के पूजन पर राजनीति होनी चाहिए?
Monday, 27 July 2020
क्या रिश्तों में विश्वास सबसे बड़ी पूंजी होती है?
Saturday, 25 July 2020
(किलो के भाव से बिकते किताब)क्या यह साहित्य का अपमान नहीं है?
Friday, 24 July 2020
आम जनता की तरह राजनीतिक दलों में सांसद व विधायकों को अधिकार होने चाहिए-----
Thursday, 23 July 2020
क्या समाधान पर ही जीवन चलता है?
Wednesday, 22 July 2020
क्या अपराधियों की जाति पर राजनीति होनी चाहिए?
Tuesday, 21 July 2020
क्या प्रतिभा सिर चढ़कर बोलती है?
क्या वामदल भारतीय संस्कृति के विरोधी हैं?
Monday, 20 July 2020
*हिन्दी है तो भारत है* ---शिर्षक कविता पर ऑनलाइन संचालित प्रतियोगिता में मिला सम्मान पत्र
Sunday, 19 July 2020
ऑनलाइन दर्शनों में मंदिरों की क्या भूमिका है?
संस्मरण------टूटता विश्वास
संस्मरण
टूटता विश्वास
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मुसीबत में मदद करना मानव धर्म है। इसी विचार का अनुसरण करते हुए मैं एक सब्जीवाले के द्वारा छली गई। कोरोना काल में लगभग 3 महीने से एक सब्जीवाले से प्रतिदिन मैं फल और सब्जी लिया करती थी। हमारी सोसाइटी में उसकी अच्छी बिक्री होने लगी थी। आमदनी होते ही वह नशा का भी आदी होने लगा। लोग शिकायत करते फिर भी मैं सब्जी फल ले लिया करती क्योंकि उसका व्यवहार सही था। थोड़ी सहानुभूति भी मैं रखती थी क्योंकि उसकी पत्नी गुजर गई थी और दो छोटे बच्चे थे।
एक दिन वह काफी दुखी और रूआसा होकर बोला ---मेरा छोटा भाई 50,000 कैश लेकर पड़ोसी लड़की के साथ भाग गया। लड़की वाले द्वारा शिकायत दर्ज होने पर पुलिस वाले मुझे पकड़ ले गए और बहुत पीटे। एक मेम साहब ने मुझे भला आदमी बोल कर उनसे छुड़वाया। अब तो मेरे पास माल लाने के लिए भी पैसे नहीं बचे----कह कर वह फूट-फूट कर रोने लगा।
मैं उसे सांत्वना देकर चुप कराई। फिर उसने कुछ मदद की उम्मीद जताई। आप अंकल से पूछ कर 500- 1000 दे दो। मैं शाम में आऊंगा। आप चाहे तो पेपर पर लिखवा लो।
मैं प्यार से बोली--- भैया शाम को क्यों ? अभी ले लो। लिखवाने की कोई जरूरत नहीं है और मैं हजार रुपए उसे दे दी।
दूसरे दिन थोड़ा फल लेकर आया ।वह पी रखा था--- फिर पैसे मांगे । कम से कम हजार और दे दो। इस बार मैं थोड़े गुस्से में बोली-- पीने वालों की मैं मदद नहीं करती। उसने कसम खाई ---कभी नहीं ड्रिंक करूंगा। मैं कल पैसे देने का वादा कर घर आ गई।
दूसरे दिन से वह आना बंद कर दिया। मुझे उस पर दया भी और तरस भी आ रही थी। कहीं बीमार तो नहीं पड़ गया या कहीं पुलिस वाले फिर पकड़ ले गए या सब्जी लाने के लिए बेचारे के पास पैसे नहीं होंगे आदि तरह-तरह के विचार आ रहे थे।
मैं उससे फोन पर ऑर्डर देकर फल-सब्जी मंगाया करती थी। उसने रोते-रोते उस दिन बताया था --पुलिस वाले ने मेरे मोबाइल के सिम कार्ड भी निकाल लिए। शायद इसलिए फोन भी नहीं लग रहा था परंतु 20 -25 दिन बाद एक दिन फोन लग गया।
उसके बड़े भाई ने उठाया। वह कहीं दूर रहता था। मैं सब्जीवाले का हाल-चाल पूछी, उसकी आपबीती का जिक्र की, तब उसके बड़े भाई ने बताया ऐसा कुछ नहीं है जी। वो दारु पीने के लिए कितनों से झूठी कहानी सुनाकर उधार ले रखा है। इसी डर से सब्जी बेचने भी नहीं जाता।
मैंने उसके बड़े भाई को विश्वास दिलाया कि मैं पैसों की खातिर फोन नहीं की। उसका हाल -चाल जानना चाह रही थी । वो आये, सब्जी बेचे और उसकी आमदनी होती रहे तो मुझे खुशी होगी पर वह नहीं आया।
हां, मेरे विश्वास को झटका लगा। मैं तो उसकी मदद की थी मुसीबत के समय जैसे कोरोना काल में मजबूर लोगों की मदद की थी सिर्फ इस भावना से परंतु उसका झूठ बोल कर मदद मांगना अच्छा नहीं लगा।
इनके जैसे ही एक दो बन्दों के कारण दूसरे गरीब मजबूर लोग बदनाम हो जाते हैं और समय पर मदद मिलने से वंचित रह जाते हैं। कोई सच्ची आपबीती भी सुनाये तो हम शक की नजर से देखते हैं। विश्वास बनाए रखना बहुत जरूरी है।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
Saturday, 18 July 2020
संस्मरण ------ मन की टीस
Friday, 17 July 2020
विधा--हाइकु विषय--रास्ता (5-7-5)
विधा--हाइकु विषय- रास्ता (5-7-5)
1.
निकालें रास्ता
अपनी समझ से
मुसीबतों में।
2.
छोड़ें डरना
चलें कठिन रास्ते
पाएं मंजिल ।
3.
मार्ग प्रशस्त
सफलता का सूत्र
करें संघर्ष।
4.
राह के रोड़े
डालते व्यवधान
अडिग रहें।
5.
चलें पथ पे
कर दृढ़ निश्चय
लक्ष्य के साथ।
6.
संभावनाएं
हैं पग-पग पर
करें संकल्प।
7.
कंटीले रास्ते
चले महापुरुष
मिला मुकाम।
--------*---------सुनीता रानी राठौर