क्या मजहबी कट्टरता की आड़ में बेकसूर लोगों की हत्या उचित है?
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मजहबी कट्टरता की आड़ में बेकसूर लोगों की हत्या कभी उचित हो ही नहीं सकती। बचपन से ही हम सभी पढ़ते आये हैं --
'मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना'--
पर वर्तमान में जो दृश्य हमें देखने को मिल रहा है मजहब के नाम पर जो हिंसा, उन्माद फैलाया जा रहा है वह मानव हित में नहीं है।
कोई भी धर्म कभी भी खून खराबा करना नहीं सिखाती। सभी धर्म हमें भाईचारा, प्रेम का संदेश देती है पर कुछ स्वार्थी तत्व धर्म के नाम पर माहौल बिगाड़ कर अपरिपक्व बच्चों को बरगला कर जो अशांति फैलाते हैं वह धर्म के नाम पर धब्बा है इंसान कहलाने लायक ही नहीं।
यह मानव के वेश में छुपे हुए भेड़िए हैं जो शांति भंग कर अपनी तुच्छ प्रवृत्ति को पूर्ण करना चाहते हैं। नवयुवाओं को बरगला कर उनका ब्रेनवाश कर अपनी राक्षसी प्रवृत्ति को अंजाम देते हैं।
हमारा देश हो या फ्रांस या कोई भी देश ऐसे गुनाहगारों को सख्त से सख्त सजा देने का प्रावधान होना चाहिए ताकि दहशतगर्दो को सबक मिल सके और वह दहशतगर्दी करने से बाज आएं।
धर्म के नाम पर अधर्म कर अशांति न फैलाएं।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)