अभिव्यक्ति की आजादी----
अभिव्यक्ति की आजादी अर्थात विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता। ऐसी स्वतंत्रता जो अपने आप में कुछ सार्वभौमिक नियमों से बंधी हुई हो-- राष्ट्र की एकता,अखंडता और भाईचारे खराब न करे ऐसी सटीक अभिव्यक्ति हो।
अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ है आप अपने विचार अथवा अपने पक्ष को बिना किसी भय के सामने रख सकें। आप स्वतंत्रता पूर्वक अपनी बात कह सकें परंतु इसका मतलब यह भी नहीं होता कि अपना विचार अपनी सोच दूसरों पर थोपने की कोशिश करें।
भारत में प्रेस मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। भारत के उच्चतम न्यायालय और संसद में सदा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी गई है। अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह भी नहीं कि आप जहां भी हो वहां या सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट डालते रहें जो धार्मिक उन्माद और सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे इंसान को इंसान से बांट दे।
अभिव्यक्ति की आजादी एक मौलिक अधिकार है जो अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में देखने को मिलती है। संविधान निर्माताओं ने भी माना था कि हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1) में व्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार बनाया गया लेकिन 19 (2) में इसे सीमित करने के आधार भी बताये गए। किन आधारों पर इन अधिकारों में कटौती की जा सकती है, इस वो यह था---- झूठी निंदा, मानहानि अदालत की अवमानना, ऐसी कोई गलत कार्य जिससे राष्ट्र की सुरक्षा खतरे में पड़ती हो-- ऐसे में अभिव्यक्ति की आज आजादी सही नहीं कही जा सकती।
अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार व्यापक है जिसमें सरकार की कटु आलोचना का भी अधिकार है पर देशद्रोही कार्य करने का अधिकार नहीं है।
हर आलोचना को देशद्रोह बताकर मुकदमा चलाना भी उचित नहीं माना जा सकता। लोकतंत्र की आवाज दबाने वाले लोगों को भी सख्त सजा दिलाने के लिए सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान की किताब में सिर्फ पढ़ने भर नहीं बल्कि लोगों को एहसास दिलाने का माध्यम भी है कि लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का समान हक है। अभिव्यक्ति की आजादी होनी चाहिए किंतु सिर्फ उतनी ही जितनी किसी और को या अपने देश को खतरा या नुकसान न हो।
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स्वरचित मौलिक रचना
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)