Monday, 25 May 2020

अब वक्त आ गया है कि कोरोना के खिलाफ अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं ले।

हमारे देश में भी अब कोरोना वायरस तीव्र गति से पैर पसार रहा है। संक्रमितों की संख्या 1,38,825 हो चुकी है। मृतकों की संख्या 4000 से ऊपर पहुंच चुकी है । 24 घंटे में 7000 नए मामले आना  बहुत ही चिंतनीय और भयावह स्थिति को दर्शा रहा है। इसलिए जरूरी है कि समझदारी से कोरोना के खिलाफ अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं लें।
     यह सर्वविदित है कि हमारा देश अमेरिका, इटली,चीन आदि विकसित देशों से स्वास्थ्य उपकरण, अस्पताल व डॉक्टर के मामले में बहुत ही पीछे है। जितनी टेस्टिंग की जरूरत है उतनी नहीं हो पा रही है क्योंकि यह बहुत ही खर्चीला है। हमारे पास इतना सामर्थ्य नहीं है, ना ही उतनी मात्रा में जरूरी उपकरण उपलब्ध है। जब विकसित देश वायरस पर नियंत्रण पाने में असक्षम महसूस कर रहे हैं तो हम सरकार और अस्पताल के भरोसे कहां तक खुद को बचा पाएंगे? यह विचारणीय प्रश्न है। 
डब्ल्यूएचओ के अनुसार  यह बीमारी जल्द जाने वाली नहीं है। हमें इसके साथ ही जीना होगा क्योंकि इसकी कोई दवा भी नहीं है और ना ही कोई वैक्सीन उपलब्ध है।
  अतः विवेकपूर्ण तरीके से सरकार द्वारा निर्देशित सावधानियों और सुझावों पर अमल करते हुए हम जान और जहान दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं। इस घड़ी में एहतियात बरतने की अतिआवश्यकता है। 
    सोशल व फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करें। नियमित रूप से साबुन से हाथ धोते रहें। खुद को इसके रोगियों से दूर रखें।
 सब्जी और फलों को खाने से पहले अच्छी तरह धो लें। घर को साफ रखें। खांसते वक्त अपने नाक और मुंह को टिशू या कोहनी से ढक लें। 
जिन जगहों या देशों में इस बीमारी का प्रकोप है वहां यात्रा करने से परहेज करें। घर से बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग जरूर करें। बात करते समय निश्चित दूरी बनाकर रखें।
    निश्चित ही हम सबके लिए यह मुश्किल घड़ी है पर सावधानियां बरत कर घातक वायरस से स्वयं व परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं। अब वक्त आ गया है कि कोरोनावायरस के खिलाफ अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं लें।
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                     सुनीता रानी राठौर
                      ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Sunday, 24 May 2020

क्या कोरोना वायरस ने लॉकडाउन में लेखन को दिया नया आयाम ?

चुनौती भरी परिस्थितियां नये-नये राह भी दिखाती है। यही वास्तविकता लॉकडाउन में लेखन क्षेत्र में भी देखने को मिला है। इतनी लंबी अवधि में घर बैठे बहुत से लोगों ने अपने समय का सदुपयोग करते हुए अपनी लेखन-कला को उभारा है। 
   लेखकों की बहुत बड़ी तादाद नेट राजपथ पर अपना शौक पूर्ण करने में लगा है। तालाबंदी के उबाऊ समय में तमाम बड़े-बड़े प्रकाशक भी नेट की मदद से नए रचनाकारों को उभरने का अवसर  प्रदान कर रहे हैं। समालोचक नामवर जी की तरह दूसरे की रचनाओं को पढ़कर लोग समीक्षात्मक टिप्पणी भी लिखित रूप में देने लगे हैं।
   आज छोटे-बड़े हर तरह का रचनाकार नेट पर अपना ब्लॉग बनाकर या साहित्यिक पत्रिकाओं के ई-संस्करणों से जुड़ता जा रहा है। आज इंटरनेट सारी दुनिया में अभिव्यक्ति की आजादी का व्यापक मंच बनकर लेखन को नया आयाम प्रदान कर रहा है।
   लेखक कल्पना और यथार्थ दोनों में जीता है।  विचारों को शब्दों में पिरोता है। अपने विचारों को प्रस्तुत करने का इससे बेहतर समय नहीं मिल सकता। लेखन के लिए डिजिटल गैजेट्स का भी सहारा मिल रहा है। 
  लेखन कला द्वारा लेखक का सामाजिक और बौद्धिक ज्ञान का भी विस्तार हो रहा है। लॉकडाउन में प्रेरणादायक रचना पढ़ कर लिखने के लिए भी वे प्रेरित हो रहे हैं।
   इस तरह नि:संदेह कह सकते हैं कि लॉकडाउन में लेखन को नया आयाम मिला है। सकारात्मक ऊर्जा से अभिभूत हो कर लोग रचनात्मक कार्य में लगे हुए हैं। कुछ कविताएं लिख रहे हैं , कुछ कहानियां, कुछ समयानुसार अपने आलेख द्वारा अपना विचार प्रस्तुत कर रहे हैं।
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                           सुनीता रानी राठौर 
                         ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश

Friday, 22 May 2020

क्या कोरोना से बदल जाएगा फिल्म की शूटिंग का तौर -तरीका?

कोरोना वायरस का दुष्प्रभाव न केवल इंसानों पर बल्कि  फिल्म इंडस्ट्रीज पर भी देखने को मिला है। फिल्म इंडस्ट्रीज अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। फिल्म निर्माण की सारी गतिविधियां रुकी हुई है। हां, अपवाद स्वरूप सलमान खान की फिल्म 'राधे' की शूटिंग एहतियात बरतते हुए जारी है।
   अब दूसरे फिल्म निर्माता भी तौर तरीका बदलते हुए कार्य को जारी करने का विचार कर रहे हैं। फिल्म मेकिंग के हर स्तर पर कंप्रोमाइज देखने को मिलेगा। स्क्रिप्ट भी वैसी ही लिखी जाएगी कि मुश्किल ना आए। 
    फिल्ममेकर्स का मानना है कि जब तक कोरोना वैक्सीन नहीं बनता तब तक सावधानी रखी जाएगी। सेट को हमेशा सेनीटाइज किया जाएगा। फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन किया जायेगा। सेट पर कम लोग होंगे। सब के तापमान चेक किए जाएंगे। एक्टर्स तब तक मास्क लगाए रहेंगे जब तक कि डायरेक्टर एक्शन नहीं बोलता।
   स्टूडियोज में शूटिंग से पहले सेट पर पहुंचने वाले स्टाफ का भी कोरोना टेस्ट करने को लेकर पॉलिसीज बनाई जा रही है। शूटिंग को लेकर हर स्तर पर दिक्कतें आएंगी पर एडजस्ट करना पड़ेगा। सोशल डिस्टेंसिंग के बीच वैसे सीन्स शूट करने में भी मुश्किल आएगी। कुछ प्रोडक्शन हाउस का सेफ्टी के मद्देनजर किसिंग और सेक्स सीन हटाने का प्लान है।
   महामारी बहुत लंबी चलती है तो स्क्रीन पर प्यार की परिभाषा ,तौर तरीका बदली हुई दिखेगी। हॉलीवुड हो या बॉलीवुड लॉकडाउन के बाद बनने वाली फिल्मों में रोमांस का रूप बदला-बदला दिखेगा।
कोरोना की वजह से प्रोड्यूसर, एक्टर्स और स्टूडियो अपनी फिल्में ऑनलाइन प्लेटफॉर्मस, सेटेलाइट चैनल्स, डीवीडी पर रिलीज करने पर भी विचार कर रहे हैं पर सिनेमाघर इंडस्ट्रीज इसे रोकने की गुजारिश कर रही है क्योंकि इससे सिनेमाघर तो बर्बाद होंगे हीं , लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
    लोगों के रोजगार पर बुरा असर न पड़े , तौर- तरीका बदलकर फिल्म की शूटिंग होती रहे, फिल्म इंडस्ट्रीज भी फलता-फूलता रहे, यही प्रयास किया जा रहा है। 
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                               सुनीता रानी राठौर
                         ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Thursday, 21 May 2020

"नजरें"

क्या कोरोना की वजह से लोक कलाकारों का भविष्य अंधेरे में हैं?

हां, मौजूदा परिस्थिति में कोरोना वायरस की वजह से जो लॉकडाउन हुआ उससे लोक कलाकारों का भविष्य कुछ समय के लिए अंधेरे में दिखाई दे रहा है पर हमेशा अंधेरे में रहेगा यह कहना उचित नहीं होगा।
 ग्रामीण स्तर पर मेलों में या शहरों में छोटे-छोटे आयोजनों में जो लोक कलाकार अपने नाट्य अभिनय  या नृत्य संगीत के द्वारा जो आमदनी प्राप्त करते थे फिलहाल वह लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से पूरी तरह से बंद है। 
     राजस्थान के कलाकार जयपुर, जोधपुर जैसलमेर जैसे शहरों में वहां के दर्शनीय स्थलों पर वाद्य यंत्र के द्वारा गीत-संगीत व नृत्य प्रस्तुत करते थे, पर्यटकों के ना आने से उनका रोजगार ठप्प पड़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए वहां के मुख्यमंत्री ने 'कलाकार प्रोत्साहन योजना' शुरू की है जिसके माध्यम से कलाकारों द्वारा भेजी गई वीडियो को यूट्यूब पर प्रसारित किया जा रहा है और उन्हें 2500 रुपए की मदद राशि प्रदान की जा रही है। कालबेलिया डांस, कठपुतली कला, बहुरूपिए कला आदि के कलाकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। हां यह भी सच है कि सारे कलाकार इस स्तर तक पहुंचने में सक्षम नहीं हो पाते।
    मुंबई जैसे महानगरों में भी तमाशा थिएटर जैसे जगहों पर काम करने वाले कलाकार हो या ग्रामीण स्तर पर मेलों में, छोटे स्टेज पर शादी विवाह के आयोजनों में प्रोग्राम देने वाले कलाकार हों फिलहाल सभी का वर्तमान व भविष्य कोरोना की वजह से प्रभावित हुआ है।उनकी आमदनी का स्रोत बंद हो चुका है पर हमारे देश के लोक कलाकार अपने अभिनय का ऐसे समय में सदुपयोग भी कर रहे हैं।
      झारखंड सरकार 'लोक कल्याण संस्थान' के द्वारा अधिकांश लोक कलाकारों को अपने अभिनय से कोरोना से बचाव संबंधी जागरूकता फैलाने के कार्य में लगाये हुए है। वे अपनी प्रांतीय भाषा में गीत- संगीत गाकर, नुक्कड़ नाटक, कठपुतलियों आदि के कार्यक्रम कर जन संदेश दे रहे हैं जो बहुत ही चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो बनाकर  यूट्यूब , फेसबुक के जरिए लोग अपनी कला का प्रचार करने में भी लगे हुए हैं। सरकार भी बढ़ावा दे रही है।
     इन सभी कलाकारों को देखते हुए कह सकते हैं कि जिसमें हुनर है वह भूखा नहीं मर सकता है। भले ही कुछ समय के लिए विकट स्थिति आई है। आमदनी का स्रोत बंद है पर भविष्य अंधेरे में है यह कहना ठीक नहीं । उम्मीद हीं जिंदगी है।
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                            सुनीता रानी राठौर
                            ग्रेटर नोएडा(उत्तर प्रदेश)

Wednesday, 20 May 2020

क्या लॉकडाउन की राहत बढ़ने से बढ़ गई है लापरवाही?


जी हां , इसमें कोई दो राय नहीं कि रुकी हुई जिंदगी और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने हेतु लॉकडाउन 03 और 04 में औद्योगिक क्षेत्रों, वाहनों और बहुत से आवश्यक कार्यों को सुचारु करने के लिए राहत प्रदान की गई पर साथ ही लोगों ने सतर्कता को नजरअंदाज कर लापरवाही भी बरतनी शुरू कर दी है। इसी लापरवाही का खामियाजा है कि हमारे देश में संक्रमितों की संख्या तीव्र गति से बढ़कर एक लाख सात हजार के करीब हो गई है। 3300 लोगों की जानें भी जा चुकी हैं। ऐसी लापरवाही बहुत ही भयावह स्थिति उत्पन्न कर सकती है।
   शराब की दुकान खुलते हीं जो जनता की भीड़ दिखी, वह भयावह थी। प्रवासी श्रमिक ,पर्यटक, छात्र आदि को घर पहुंचाने हेतु जो स्पेशल श्रमिक ट्रेन और बस चलाए जा रहे हैं उसमें रजिस्ट्रेशन हेतु मुंबई, गुड़गांव, सूरत , नोएडा जैसे जगह पर जो जनसमूह उमड़ते हुए दिख रहा है ,शारीरिक दूरियों का बिल्कुल पालन नहीं हो रहा है , वह प्रशासन और जनता दोनों की खामियों को और लापरवाही को उजागर कर रहा है। 
    अधिकांश कोरेटांइन सेंटर की भी हालत बदतर है । एक स्कूल में 100 लोग से अधिक और एक ही रूम में 10, 15 लोग ठहराये जा रहे हैं। शौचालय एक या दो होने की वजह से, खाने की व्यवस्था सही नहीं होने की वजह से लोग आक्रामक तेवर के साथ एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दुकानों पर, सब्जी मंडी में या सड़कों पर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जिसकी वजह से हालात खराब हो रहा है और इसी लापरवाही का नतीजा है कि संक्रमितों की संख्या तीव्र गति से बढ़ती चली जा रही है। इन सभी स्थितियों के मद्देनजर कह सकते हैं कि लॉक डाउन की राहत बढ़ने से लोगों में लापरवाही भी बढ़ गई है। लोगों की मानसिकता ऐसी हो गई है कि जैसे कोरोना का प्रभाव बिल्कुल खत्म हो चुका है और यही सोच भयावह रूप लेता जा रहा है जो चिंताजनक है।
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                                  सुनीता रानी राठौर
                             ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Tuesday, 19 May 2020

क्या कोरोना पर अमेरिका-चीन का तनाव कम होगा?


कोरोना पर अमेरिका और चीन के मध्य जो तनाव का माहौल दिख रहा है उसका मुख्य कारण अमेरिका में होने वाला राष्ट्रपति चुनाव भी एक कारण हो सकता है। यह भी सही है कि अमेरिका एक ऐसा देश है जो अपने एक नागरिक के निर्दोष मौत को भी गंभीरता से लेता है ।आज कोरोना की वजह से उसके करीब 90000 नागरिकों की मौत हो चुकी है और सर्वविदित है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए बिना सत्यापित प्रमाण के भी आरोप जड़ा है कि यह वायरस चीन के प्रयोगशाला से बाहर आया है। 
    अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता राष्ट्रपति चुनाव है। ट्रंप दोबारा चुने जाते हैं तो चीन के प्रति उनका रवैया क्रूर और प्रतिशोध भरा होगा ।अमेरिकी मतदाताओं के बीच इतनी बड़ी संख्या में मौतें भी मुद्दा बन गया है।
    दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी युद्धपोत को चीन के लड़ाकू विमान और जहाजों ने खदेड़ दिया है। इससे उपजा तनाव भी बरकरार है। चीनी सरकार ने हांगकांग में अमेरिकी पत्रकारों के काम में भी हस्तक्षेप करने की धमकी दी है ।
 अमेरिका ने भी धमकी दी है कि कोविड-19 के प्रसार में बीजिंग की भूमिका के चलते चीन के साथ अपने सभी संबंध खत्म कर सकता है। 
   अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ पर भी चीन का पक्ष लेने का और समय पर जानकारी छुपाने का इल्जाम लगा कर आर्थिक सहायता पर रोक लगा दी है।
    कोविड-19 की भयावहता और दो महाशक्तियों के तनाव के मद्देनजर हीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन दो दिन सोमवार और मंगलवार को आयोजित किया है। उम्मीद है कि ये दोनों विकसित देश आपसी मतभेदों को भूलकर विषम परिस्थितियों से निपटने का प्रयास करेंगें।
अमेरिकी राष्ट्रपति अपने चुनाव के मद्देनजर भी इस बात को मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इस कारण जल्द तनाव खत्म होने का उम्मीद प्रतीत नहीं होता। 
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                             सुनीता रानी राठौर
                         ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)--------------------------------------------
कोरोना पर अमेरिका और चीन के मध्य जो तनाव का माहौल दिख रहा है उसका मुख्य कारण अमेरिका में होने वाला राष्ट्रपति चुनाव भी एक कारण हो सकता है। यह भी सही है कि अमेरिका एक ऐसा देश है जो अपने एक नागरिक के निर्दोष मौत को भी गंभीरता से लेता है ।आज कोरोना की वजह से उसके करीब 90000 नागरिकों की मौत हो चुकी है और सर्वविदित है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए बिना सत्यापित प्रमाण के भी आरोप जड़ा है कि यह वायरस चीन के प्रयोगशाला से बाहर आया है। 
    अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता राष्ट्रपति चुनाव है। ट्रंप दोबारा चुने जाते हैं तो चीन के प्रति उनका रवैया क्रूर और प्रतिशोध भरा होगा ।अमेरिकी मतदाताओं के बीच इतनी बड़ी संख्या में मौतें भी मुद्दा बन गया है।
    दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी युद्धपोत को चीन के लड़ाकू विमान और जहाजों ने खदेड़ दिया है। इससे उपजा तनाव भी बरकरार है। चीनी सरकार ने हांगकांग में अमेरिकी पत्रकारों के काम में भी हस्तक्षेप करने की धमकी दी है ।
 अमेरिका ने भी धमकी दी है कि कोविड-19 के प्रसार में बीजिंग की भूमिका के चलते चीन के साथ अपने सभी संबंध खत्म कर सकता है। 
   अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ पर भी चीन का पक्ष लेने का और समय पर जानकारी छुपाने का इल्जाम लगा कर आर्थिक सहायता पर रोक लगा दी है।
    कोविड-19 की भयावहता और दो महाशक्तियों के तनाव के मद्देनजर हीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन दो दिन सोमवार और मंगलवार को आयोजित किया है। उम्मीद है कि ये दोनों विकसित देश आपसी मतभेदों को भूलकर विषम परिस्थितियों से निपटने का प्रयास करेंगें।
अमेरिकी राष्ट्रपति अपने चुनाव के मद्देनजर भी इस बात को मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इस कारण जल्द तनाव खत्म होने का उम्मीद प्रतीत नहीं होता। 
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                             सुनीता रानी राठौर
                         ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Monday, 18 May 2020

कोरोना की जीवन शैली में तनाव मुक्त कैसे रहें ?

वर्तमान माहौल में कोरोनावायरस से संक्रमित होने का डर दूसरा नौकरी और कारोबार को लेकर अनिश्चितता और तीसरा लॉकडाउन के कारण कुछ लोगों का अकेलापन आज जीवन शैली को तनावग्रस्त बनाता जा रहा है।
     जीवनशैली को तनाव मुक्त बनाने के लिए हमें सकारात्मक सोच को प्रोत्साहन देने की जरूरत है।
      सर्वप्रथम खुद को मानसिक रूप से मजबूत करें कि एहतियात बरतकर हम खुद व परिवार को वायरस से सुरक्षित रखेंगे। नियमित रूप से कार्य करते रहें। 
       लॉकडाउन में घर बैठकर समय का सदुपयोग करते हुए अपनी हॉबी को पूर्ण करें। रचनात्मक कार्य करें। लिखने में रुचि है तो अपनी रचना द्वारा समाज को जागरूक करने का और हौसला अफजाई करने का कार्य करें।
   बागवानी करें। हरियाली देखकर मन प्रसन्न रहेगा। नये-नये चीजों को सीखने का प्रयास करें। आप व्यस्त रहेंगे तो दिमाग में नकारात्मक विचार कम आएंगे।
   सकारात्मक रूप से सोचें कि हमें सपरिवार रहने का अच्छा अवसर मिला है। एक दूसरे के सुख- दुख को सुनें। पुरानी दुखद बातों को भूल कर अपनी भावनाओं को साझा करें। इससे खुद को प्रसन्न चित्त और हल्का महसूस करेंगे।
    खुद के स्वास्थ्य को बेहतर बनाएं। योग और प्राणायाम करें।  पौष्टिक भोजन बनाएं । खुद खाएं परिवार को खिलाएं।    
    स्कूली बच्चे जो स्कूल बंद होने की वजह से बोरियत महसूस कर रहे हैं, बाहर खेलने के लिए नहीं मिल रहा है। उन्हें रचनात्मक कार्यों में लगाएं। पेंटिंग सिखाएं। घरेलू कार्य सिखाएं ।पुरानी चीजों से नया सामान बनाना सिखाएं ।उन्हें एक अनुपम खुशी भी मिलेगी और वे तनावमुक्त भी रहेंगे।
    तनाव मुक्त रहने के लिए टीवी और सोशल मीडिया पर सिर्फ नकारात्मक खबर देखने से बचें। हास्य-व्यंग्य नृत्य गाने आदि भी देखा सुना करें।   
      सकारात्मक पहलुओं पर विचार करते हुए अच्छे पक्षों पर जोर दें।  घर पर रहते हुए पारिवारिक समस्याओं को भी शांति से सुलझायें। छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर खुशहाल जीवन जीयें और पॉजिटिव नतीजे पर पहुंचने का प्रयास करें। निश्चित तौर पर कोरोना की जीवन शैली में भी आप तनाव मुक्त रहेंगे।
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                              सुनीता रानी राठौर 
                             ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

सपना मोदी जी का

           सपना मोदी जी का
सोच अपनी शौक अपने, रीत हौसला अफजाई के
एयरक्राफ्ट सेना के फूल बरसाए कोरोना योद्धाओं पे।

दिखाया था सपना कभी मोदी जी ने बड़े उत्साह से
करेंगे हवाई यात्रा चप्पल वाले भी हवाई जहाज से।

सेना का जहाज श्रमिकों को घर पहुंचा दिया होता प्रधानमंत्री मोदी जी का सपना साकार हुआ होता।

मिशन वन्दे भारत-2 से गरीबों को राहत दिया होता
मेहनतकश के दिल में अपना मान बढ़ा लिया होता।

सबका साथ,सबका विकास सबको मान मिला होता
प्रधानमंत्री मोदी जी का सपना साकार हुआ होता।                           --------------+-------सुनीता रानी राठौर

Sunday, 17 May 2020

कोरोना ने जीवन और जीविका को कहां पहुंचा दिया है?

जीवन और जीविका में अन्योन्याश्रित संबंध है। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। जीविका है तभी जीवन सुरक्षित है और जीवन सुरक्षित है तभी जीविकोपार्जन संभव है। कोरोना जैसी विकराल महामारी ने जीवन और जीविका दोनों को विकट संकट की स्थिति में डाल दिया है। 
   लॉकडाउन में उद्योग-धंधे बंद होने के कारण लाखों लोगों के बेरोजगार हो जाने से लोगों के जीवन और जीविका खतरे में पड़ गई है। विशेषकर निम्न वर्ग के लोगों की स्थिति ज्यादा दयनीय हो गई है। यही कारण है कि लाखों की संख्या में लोग उल्टी दिशा में गांव की ओर पलायन कर रहे हैं। 
    कोरोना संकट के मुश्किल घड़ी में लोगों का जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है, हालांकि आर्थिक मजबूती भी बेहद जरूरी है। ऐसे में जीवन और जीविका के बीच संतुलन बनाकर हमें कार्यों को अंजाम देने के लिए आगे आना होगा।
    रोजगार छूटने के वजह से जो मजदूर अपने गांव लौटे हैं उन्हें रोजगार से जोड़ने हेतु मनरेगा की योजना को लागू करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मनरेगा के बजट दर बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी हो रही है।
  लॉकडाउन की वजह से जीवन और जीविका दोनों बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसलिए सरकार अब जीवन को सुरक्षित रखते हुए जीविकोपार्जन हेतु अर्थव्यवस्था के सारे पहलुओं पर धीरे-धीरे काम शुरू करने पर विचार कर रही है। इसमें खेतीबाड़ी से जुड़े कामकाज को छूट देना, फैक्ट्रियों में उत्पादन शुरू करना ,लघु उद्योगों को बढ़ावा देना और सामान का ट्रांसपोर्टेशन शुरू करने जैसे काम शामिल हैं।
  विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के बीच आजीविका बचाने के लिए जरूरी है कि पहले मानव जीवन को बचाया जाए।
आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने के लिए पहले कोविड-19 पर काबू पाना जरूरी है।'
     अतः ऐसी विकट परिस्थिति में हम सभी को समझदारी पूर्वक जीवन और जीविका के बीच सामंजस्य बनाते हुए जीवन को जीना होगा। जीवन सुरक्षित है तो जीविका का भी इंतजाम हम कर सकते हैं।
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                             सुनीता रानी राठौर
                         ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Tuesday, 12 May 2020

क्या श्रमिकों की कमी के चलते उत्पादन शुरू करना बड़ी चुनौती नहीं है?


    लॉकडाउन के वजह से कामकाज के पटरी पर लौटने की अनिश्चितता के कारण ज्यादातर श्रमिक अपने घरों को लौट चुके हैं और लौट रहे हैं। उद्योगपतियों के लिए उत्पादन शुरू करने में श्रमिकों की कमी बड़ी चुनौती साबित होगी। 
 पुराने कामगार जितने अनुभवी थे, काम में जो रफ्तार थी, नये कामगारों के आने पर कुछ दिन के लिए रफ्तार धीमी रहेगी क्योंकि नये-नये व्यक्तियों को काम सीखने में समय लगेगा।
 औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी से उत्पादन कार्य प्रभावित होगा। कहीं-कहीं उत्पादन कार्य को पूर्ण करने हेतु श्रम कानून में बदलाव लाकर कम श्रमिक द्वारा ही 8 घंटे की जगह 12 घंटे काम करवाने का विचार किया जा रहा है और सरकार से अनुमति लिया जा रहा है जो मजदूर के हित में नहीं होगा। पूंजीपतियों द्वारा उनका शोषण शुरू हो जाएगा।
   कुछ उद्योगपतियों का मानना है कि 40-50 फ़ीसदी श्रमिक ही प्रवासी हैं जो श्रमिक यहीं बस चुके हैं या इसी क्षेत्र के रहने वाले हैं उनकी मदद से उत्पादन कार्य सुचारू ढंग से संपन्न हो सकता है।  फिलहाल ग्रीन जोन में ही कार्य करने की अनुमति है। पर हकीकत में जहां प्रशासन की तरफ से मंजूरी मिली भी है वहां भी श्रमिकों की कमी के कारण उत्पादन नहीं हो पा रहा है।
 सरकार ने राइस ब्रॉन ऑयल को उत्पादन के लिए लिखा पर श्रमिकों के काम पर नहीं लौटने से काम शुरू नहीं हो सका। ब्रेड उत्पादन और वितरण में 40 फ़ीसदी की कमी आ गई ।
फ्लोर मिल्स में पैकेजिंग की किल्लत के चलते ब्रांडेड कंपनियों की आपूर्ति 80 फिसदी घट गई है। हैंडलूम मैन्यूफैक्चर या दवा कंपनियां सभी ने चिंता जाहिर की है कि श्रमिकों की कमी से उत्पाद घटकर 20 फ़ीसदी रह गया है। दवा की पैकेजिंग में मुश्किल आ रही है। दूसरे अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी ऐसी ज्वलंत समस्या बरकरार है।
   अतः मौजूदा परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए  मेरा मानना है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी श्रमिकों की कमी से कई महीने तक उत्पाद सामान्य रूप से नहीं हो पाएगा। अनुभवी कामगार समय से लौट गए तब तो ठीक है अन्यथा उत्पादन में कमी आना निश्चित है।
                          सुनीता रानी राठौर
                             ग्रेटर नोएडा

"बहुरुपिए नेता"

Monday, 11 May 2020

मां सर्वस्व है प्यार का अथाह सागर है। मात्रृ दिवस पर समर्पित चंद पंक्तियां

क्या सरकार से चाहिए छोटे उद्योगों को बड़ी राहत?


छोटे उद्योग को नोटबंदी और जीएसटी से पहले ही  जबरदस्त झटका लगा था। जीएसटी की मार से  उबर भी नहीं पाए थे कि लॉकडाउन ने इनका कमर तोड़ दिया। इसलिए बेशक सरकार को चाहिए कि छोटे उद्योगों को आर्थिक पैकेज प्रदान करे ।   वर्तमान परिस्थिति में छोटे उद्योगों की सप्लाई चेन चरमरा गई है। छोटे उद्योग अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहलाते हैं क्योंकि इनके द्वारा सरकार को अच्छा खासा राजस्व प्राप्त होता है और सबसे अधिक रोजगार भी पैदा करने की क्षमता रखता है। छोटे उद्योग पूंजी की कमी और खपत ना होने की स्थिति में कमजोर पड़ते जा रहे हैं। कुटीर, लघु और मझोले उद्योगों की जैसे रीढ़ हीं टूटती जा रही है। 
     छोटे उद्योग सरकार से बड़े राहत पैकेज की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कई कारखाने बंद हो चुके हैं। खपत घटने से उत्पादन सिकुड़ रहा है और रोजगार छीन रहे हैं।
   देशभर में फैले हस्तकला और पारंपरिक छोटे उद्योग बदहाली के कगार पर हैं।  सरकारी बैंक भी इन्हें लोन देने से कतराते हैं। पैसे डूबने के डर से इन्हें प्राथमिकता नहीं देते। 
    देश में मैन्युफैक्चरिंग, कपड़ा, चमड़ा, हीरे आभूषण और वाहन  --ये से भी 5 श्रम वाले क्षेत्र हैं जहां सबसे ज्यादा रोजगार पैदा होता है। ये सभी छोटे उद्योग उचित बाजार की तलाश में हैं जिसमें सरकार से राहत की उम्मीद रखते हैं।
 ऐसे समय में सरकार जब स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए नई स्कीम लॉन्च कर रही हैं, छोटे उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए कर्ज से जुड़ी विभिन्न स्कीमें चला रही हैं फिर भी समस्या जस की तस है।
   नि:संदेह हमारा कहना है कि छोटे उद्योग रोजगार ही नहीं अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर  MSME अर्थात सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग को वित्तीय समेत दूसरे तरह के मदद जल्द से जल्द करने की आवश्यकता है।
 देशहित में आर्थिक प्रोत्साहन देकर सरकार उनका मनोबल बढ़ाएं ताकि लोगों को भी अधिक से अधिक रोजगार मिले और हमारा देश आर्थिक रूप से सुदृढ़ और मजबूत बने।
                             सुनीता रानी राठौर
                             ग्रेटर नोएडा

Saturday, 9 May 2020

क्या भविष्य में कोरोना वायरस के साथ जीना होगा ?

क्या भविष्य में कोरोना वायरस के साथ जीना होगा ?
 कोरोना वायरस का तीव्र गति से फैलना और उसकी कोई उचित दवा और वैक्सीन का मौजूद ना होना हमें संकेत दे रहा है कि खुद को कोरोना वायरस के साथ जीने के लिए मानसिक रूप से तैयार करना होगा। यह बीमारी जल्द खत्म होने वाली नहीं है ।सावधानियां और एहतियात बरतते हुए फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते रहें।हाथों को साबुन से धोते रहें। किसी संदिग्ध व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें। कोरोना वायरस के उचित लक्षण दिखे तो तुरंत हेल्थ स्क्रीनिंग कराएं और एहतियात बरतते हुए बीमारी से बाहर निकलने का अथक प्रयास करें। जिस तरह चिकन पॉक्स जैसी  फैलने वाली बीमारी से सावधानियां बरतते हैं उसी तरह बिना घबराए इससे भी हम खुद को बचा सकते हैं।
  हमारे देश में पिछले कुछ दिनों से प्रतिदिन करीब 3000 मामले सामने आ रहे हैं। जिसके कारण स्वास्थ्य मंत्रालय का भी मानना है कि भविष्य में कोरोना के साथ जीना होगा। 
    दुख के साथ खुशी की बात यह भी है कि 216 जिलों में कोई पॉजिटिव मामला सामने नहीं आया है।भारत में फिलहाल संक्रमितों की संख्या लगभग 59,662 हो चुकी है,करीब 19000 लोग जान भी गंवा चुके हैं पर सुखद बात यह है कि 1,273 लोग ठीक भी हो चुके हैं।
    स्वास्थ्य मंत्रालय के निदेशक लव अग्रवाल और दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया के अनुसार जून-जुलाई में कोरोना वायरस के मामले अपने चरम पर पहुंच सकते हैं।यह लड़ाई मुश्किल है। इससे निपटने के लिए आपसी सहयोग की जरूरत है।
    अतः हम आम जनता का फर्ज बनता है कि सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए खुद को सुरक्षित रखें । अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दें।
                             सुनीता रानी राठौर
                                ग्रेटर नोएडा

Friday, 8 May 2020

सरकार से लेकर व्यापारियों तक की प्रथम पसंद है 'शराब'?----

सरकार से लेकर व्यापारियों तक की प्रथम पसंद है 'शराब'?
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 लॉकडाउन 3.0 के गंभीर हालात में रिस्क के साथ सरकार द्वारा शराब की दुकान खोलने की इजाजत देना और व्यापारियों द्वारा बाहुल्य मात्रा में शराब की बिक्री करना --साबित कर दिया कि सरकार से लेकर व्यापारियों तक की प्रथम पसंद 'शराब' ही हैं।     जिस तरह से शराब खरीदने वालों की भीड़ दुकानों पर उमड़ी, लॉकडाउन और फिजिकल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ गई। कोरोना वायरस का तीव्र गति से फैलने का खतरा मंडराने लगा।
 फिर भी सरकार और व्यापारियों द्वारा शराब की बिक्री जारी रखना सिद्ध कर दिया कि राजस्व प्राप्ति हेतु शराब बेचना जरूरी है। 
     यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर रोक न लगाकर भीड़ को नियंत्रण करने हेतु ऑनलाइन बिक्री और होम डिलीवरी की इजाजत दे दी। दिल्ली सरकार ने भी बेतहाशा भीड़ को नियंत्रण करने हेतु ई -टोकन की शुरुआत की है।
     सरकार को हर दिन 700 करोड़ रुपए अल्कोहल की बिक्री से टैक्स की प्राप्ति होती है। 40 दिनों में अनुमानत: राज्य सरकारों को ₹28000करोड़ का नुकसान हो चुका है। अपने फायदे के लिए सरकार ने शराब बिक्री का निर्णय लिया। अब रेस्टोरेंट, पब व बार में भी शराब बेचने की अनुमति पर विचार कर रही है। इन लोगों को शराब पिलाने की लाइसेंस मिलती थी बोतलबंद शराब बेचने की नहीं पर अब बेचने की भी अनुमति मिलने जा रही है ।
देशभर में अल्कोहल का कारोबार 4 लाख करोड़ से अधिक का है। टैक्स के रूप में सालाना लगभग 2.5 लाख करोड़ राज्य सरकारों को मिलते हैं। इस फायदे को मद्देनजर रखकर ही व्यापारियों की सांठगांठ से सरकार की पहली पसंद 'शराब' बनती जा रही है।
‌   एक आम नागरिक होने के नाते मेरा मानना है कि इस फैसले से सरकार और व्यापारियों का तो भला होगा पर आम जनता का बिल्कुल नहीं।  कोरोना वायरस के गंभीर खतरे को भांपते हुए लॉकडाउन कर सरकार ने सारे उद्योग धन्धो को बंद करवा दिया जिससे करोड़ों लोगों को रोजी-रोटी के संकट से जूझना पड़ रहा है। इस स्थिति में सरकार अपने राजस्व प्राप्ति हेतु जो शराब बिक्री का फैसला लिया है और अपना और व्यापारियों की पहली पसंद साबित किया वह काबिले तारीफ नहीं है। बेरोजगारों में जनाक्रोश पैदा होगा जो सरकार और देश हित में ठीक नही होगा । राजस्व प्राप्ति हेतु सरकार को उन कार्यों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है जिसमें सरकार, व्यापारी और जनता का भी हित हो। 
‌                      सुनीता रानी राठौर
                              ग्रेटर नोएडा

Thursday, 7 May 2020

बिना कामगारों के कैसे चलेंगे उद्योग धंधे?

बिना कामगारों के कैसे चलेंगे उद्योग धंधे?
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कामगार देश की रीढ़ हैं। इनकी मेहनत के बदौलत ही उद्योग धंधे पूर्णता प्राप्त करते हैं। उद्योगपति अपने उद्देश्य में सफल हो पाते हैं और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। बड़े-बड़े उद्योग हों, कारखाने हों, या कृषक --कामगार के बिना अपना काम करवाने में सक्षम नहीं हो पाएंगे।
    इसी कड़वी सच्चाई को समझते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदुरप्पा जी ने उद्योगपतियों से सलाह मशविरा कर श्रमिक ट्रेन को कैंसिल करा दिया।कामगारों को घर वापस लौटने से रोक लिया। उनका मानना है कि श्रमिक के चले जाने से उद्योग धंधों पर बुरा असर पड़ेगा। राज्य का निर्माण कार्य भी प्रभावित होगा। हां , यह भी सही नहीं है कि हम किसी को जबरदस्ती रोक कर बंधुआ मजदूर की तरह काम करवाएं।
     सरकार की ओर से उच्चतम न्यायालय में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक देशबंदी की घोषणा के बाद 5 से 6करोड़ मजदूर पैदल ही 500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय कर अपने पैतृक गांव पहुंच गए । इसे 'रिवर्स माइग्रेशन' यानी 'उलटी दिशा में विस्थापन' कहा जा रहा है। 
   मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए उद्योग जगत चिंतित है कि लॉकडाउन के बाद कामगार के न होने पर फैक्ट्रियों में काम किस तरह पूर्ण होगा। अगर कामगार वापस नहीं लौटे तो उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। 
   भारतीय टेक्सटाइल उद्योग परिसंघ के आंकड़ों के अनुसार करीब 10 करोड़ लोगों को टेक्सटाइल उद्योग में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है। हमारा देश परिधानों के निर्यात में अव्वल है। श्रमिकों की कमी से उत्पादन में बाधा उत्पन्न हो सकती है। छोटे मझोले उद्योगों में श्रमिकों की कमी से उत्पादन 20 से 25 तक घट गया है।
  कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो रहा है। पंजाब, हरियाणा के कृषक चिंतित हैं।फसल कटाई का समय है और दुर्भाग्यवश मजदूरों का पलायन हो रहा है जो भविष्य के लिए घातक साबित होगा।    इसलिए सरकार और उद्योगपतियों को मिलकर देश हित में अपना और कामगारों की भलाई हेतु ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। कंपनियां औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने से ना घबराए,श्रमिक कानून का पालन करें,नीतियों पर अमल करें। कर्मचारियों को बेहतर वेतन और सामाजिक सुरक्षा देने में सक्षम बनें।
     कामगार उद्योग जगत के रीढ़ होते हैं। अतः उनको स्वस्थ व खुशहाल रखें। उनके दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करें ताकि उद्योग जगत का कार्य सुचारू ढंग से संपन्न हो और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो ।
                             सुनीता रानी राठौर
                               ग्रेटर नोएडा

Tuesday, 5 May 2020

शराब के ठेके पर उमड़ी भीड़ से क्या लॉकडाउन खतरे में पड़ गया ?

शराब के ठेके पर उमड़ी भीड़ से क्या लॉकडाउन खतरे में पड़ गया ?
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नि:संदेह शराब के ठेके पर उमड़ी भीड़ से लॉक डाउन खतरे में पड़ गया है।इसके लिए जनता के साथ-साथ सरकार भी पूर्ण रूप से जिम्मेदार है।        जिस देश में संक्रमित लोगों की संख्या 46000 से ऊपर हो चुकी है। लगभग 3000 से ज्यादा लोग जान गवां चुके हैं। मजबूरीवश लॉकडाउन को तीसरे चरण में 2 सप्ताह के लिए बढ़ाना पड़ा , परन्तु जनता की जरूरतों को ध्यान में रखकर कुछ रियायतें देनी पड़ी, जिसमें शराब की दुकानों को
खोलने की भी इजाजत दे दी गई जो आम जनता के लिए बहुत महंगा और डरावना साबित हुआ।       लॉकडाउन और उसमें भी रेड जोन की धज्जियां उड़ाते हुए जिस तरह दुकानों पर भीड़ उमड़ी। जान से प्यारी जाम दिखाई देने लगी। ये स्थिति बहुत ही हास्यास्पद लगने लगी।
 मोदी जी का मंत्र "दो गज दूरी का" और फिजिकल डिस्टेंसिंग को धत्ता बताते हुए जिस तरह लोग एक-दूसरे से चिपक कर खड़े हुए वह बहुत ही चिंतनीय दृश्य बन गया और लॉकडाउन पूर्ण रूप से खतरे में पड़ गया।
      सरकार ने अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए शराब की दुकानों को खुलवा कर खुद ही लॉक डाउन की धज्जियां उड़वा दी। शराब की दुकान खोलने की इजाजत देना ही गलत निर्णय था।
    जब फैक्ट्रियां, स्कूल,ट्रेन, बस सब को बंद रखा जा सकता है तो क्या शराब संजीवनी बूटी थी जिसके बिना लोग जिंदा नहीं रह पाते।सरकार को इसे खोलने की इजाजत ही नहीं देनी चाहिए थी। अगर कोविड-19 पर नियंत्रण करना है, अपने देश को सुरक्षित रखना है तो लॉकडाउन का पूर्ण रुप से पालन होना भी जरूरी है नहीं तो लॉकडाउन लगाने का कोई फायदा नहीं बेवजह हमारी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। 
    इस ज्वलंत प्रश्र व मुद्दे से संबंधित मैं अपनी स्वरचित कविता भी प्रस्तुत कर रही हूॅं-----
        *शराब बनाम कोरोना वैक्सीन*
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दिल्ली में दुकानों पे टूटी भीड़ शराब के लिए
जैसे दौड़ी जनता कोरोना वैक्सीन के लिए।
हर धर्म, जाति,मज़हब सब एकजुट हो गये।
राजस्व बढ़ाने में शराबी सफलीभूत हो गये।

शराबियों का हुजूम देख मैं अचंभित रह गई 
यूं लगा बेरोजगारों में काम की होड़ लग गई।
 इतनी बेचैनी,बेसब्री किसी ने देखी है कहीं ।
 यकीकन दूध,सब्जी,राशन के लिए भी नहीं।

लॉकडाउन,रेड जोन सरेआम धज्जियां उड़ गई
2 गज दूरी तो दूर एक-दूजे से भीड़ चिपक गई।
संजीवनी बूटी शराबियों के लिए शराब बन गई।
नशा कारोबार सरकार की आय- स्रोत बन गई।
--------------+--------------सुनीता रानी राठौर
‌                     ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Monday, 4 May 2020

शराब बनाम कोरोना वैक्सीन

सोमरस की तलब

लॉक डाउन से धीरे-धीरे बाहर आ रहा है भारत

लॉक डाउन से धीरे-धीरे बाहर आ रहा है भारत
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हां ,वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए करोना वायरस के प्रति सतर्कता बरतते हुए अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने हेतु भारत सरकार लॉकडाउन से धीरे-धीरे बाहर निकलने का प्रयास कर रही है। 
     नोएडा और दूसरे बड़े शहरों में दफ्तर और उद्योगों को राहत दी जा रही है। कर्मचारियों की संख्या कम रखने और सावधानी बरतने के शर्त पर सरकारी , निजी ऑफिस खुलने लगे हैं।
     निर्माण कार्य और उद्योगों को चलाने की सशर्त मंजूरी दी जा रही है। शहरी क्षेत्र में उन साइट पर निर्माण होगा जहां निर्माण साइट पर ही मजदूर रहते हैं।
     एक्सपोर्ट यूनिट को भी चलाया जाएगा।     
 33 फीसदी स्टाफ के साथ निजी दफ्तर भी खुल सकेंगे। आवश्यक वस्तुओं के संबंध में ई कॉमर्स गतिविधियों को भी अनुमति दी जा रही है।
   ऑरेंज और ग्रीन जोन में किराना, सब्जी, फल दवाई, स्टेशनरी आदि सभी जरूरत की छोटी-बड़ी दुकानें खोली जा रही हैं।
 आर्थिक मजबूती हेतु सरकार ने शराब की दुकानें भी खोलने की इजाजत दे दी है।
 ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि संबंधी और दूसरे कामों हेतु छूट दी जा रही है।
 जिस तरह लॉकडाउन की वजह से श्रमिक वापस गांव जा चुके हैं और जा रहे हैं उससे उद्योगपतियों की चिंता बढ़ने लगी है। इतने दिनों से फैक्ट्रियां बंद होने के वजह से कामगारों का चले जाना चिंतनीय है । 
अर्थव्यवस्था पर बुरा असर ना पड़े लोगों का रोजगार न छूटे ,बेरोजगारी के कारण कहीं लोग गलत कदम न उठाने लगे । इन सभी मुख्य बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार धीरे-धीरे एहतियात बरतते हुए लॉक डाउन से बाहर निकलने का प्रयास कर रही है ताकि लोगों के रोजगार पर बुरा असर ना पड़े ।
देश हित में लॉक डाउन करना भी जरूरी था अब देशहित और जनता की नागरिकों की भलाई हेतु लॉक डाउन से बाहर आना भी अनिवार्य है पर सावधानियों का ध्यान रखना भी अति आवश्यक है। नहीं तो हमें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं । जिस तरह से आज दिल्ली में शराब की दुकानों पर जबरदस्त भीड़ उमड़ी उससे भयावह स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मजबूरन सरकार को दुकानें बंद करनी पड़ी। आगे ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।
 अतः सतर्कता बरतते हुए सरकार के फैसलों में जनता को भी अहम योगदान देने की जरूरत है।            
                         सुनीता रानी राठौर
                   ग्रेटर नोएडा ( उत्तर प्रदेश)

Sunday, 3 May 2020

लॉकडाउन में स्थानीय रोजगार खत्म होने के कगार पर है

लॉकडाउन में स्थानीय रोजगार खत्म होने के कगार पर है इतनी नाउम्मीदी भी नहीं होनी चाहिए।पर हां, यह निर्विवाद सत्य है कि लॉकडाउन के वजह से रोजगार पर संकट की स्थिति उत्पन्न हो गए हैं। आवागमन और आयात निर्यात बंद होने के कारण सामानों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसी परिस्थिति में स्थानीय रोजगार पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
   * किसान के फसल की खरीद बिक्री बंद है सब्जी , फल जैसे खराब होने वाले फसल को उचित बाजार उपलब्ध नहीं हो पा रहा जिसके कारण किसान को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ऑरेंज और ग्रीन जोन में फसलों की बिक्री को छूट देने का प्रावधान किया है ताकि उत्पादनकर्ता पर मंदी का दोहरी मार ना पड़े। 
   *दूध का रोजगार करने वाले जिनका दूध दूर-दूर शहरों और होटलों में जाता था आज लॉकडाउन के वजह से दूध बर्बाद हो रहा है।
   *स्थानीय रोजगार में परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन में मास्क बनाने का कार्य भी तीव्र गति से चल रहा था पर अब कपड़े की कमी और अनुपलब्धता के कारण मास्क बनाने की गति भी धीमी होने लगी है।
   * लॉकडाउन के कारण तालाबों की सफाई ना होने के कारण मछली पालन व्यवसाय पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
     * पश्चिम बंगाल का जूट कारखाना बंद होने से कई लाख श्रमिक बेरोजगार हो चुके हैं।
   *स्थानीय रोजगार में चीनी मिल और चावल मिल भी प्रभावित हुआ है। अधिकांश जगह गन्ना उत्पादन की कमी के कारण चीनी मिल बंद हो चुकी है और उस में कार्यरत श्रमिक बेरोजगार हो चुके हैं।
   *चौरसिया वर्ग जो पान की खेती कर हर चौराहे पर पान की छोटी दुकान खोल अपना व्यवसाय करते थे।पान के पत्तों की अनुपलब्धता के कारण उनका व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है।
    * ग्रामीण स्तर के लोग जो चटाई, झाड़ू , मिट्टी के गमले , मिट्टी के घड़े आदि बनाकर स्थानीय स्तर पर बेचकर जो जीवन यापन कर रहे थे उनकी आमदनी का स्रोत बंद हो गया है।
   * फूलों की खेती कर जो दूर- दूर शहरों में देश-विदेश फूलों का व्यापार करते थे ।आज उनकी बिक्री नहीं हो पा रही और फूलों को ज्यादा दिन संभाल कर भी नहीं रख सकते। इस कारण लागत दाम भी उनका डूबने लगा है।
    * इस तरह वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि लॉकडाउन से स्थानीय रोजगार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं पर खत्म होने के कगार पर है ऐसी नाउम्मीदी मन में नहीं रखनी चाहिए।पर हां निसंदेह बुरी तरह प्रभावित हुआ है । इसी कारण सरकार सभी का ध्यान रखते हुए रेड जोन को छोड़कर ऑरेंज और ग्रीन जोन में सावधानियां बरतते हुए फिजिकल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए स्थानीय रोजगारों को करने की छूट प्रदान की गई है । जैसे --सैलून को छोड़कर कूलर मरम्मत ,बिजली रिपेयरिंग, स्टेशनरी की दुकान सब्जी, फल किराना आदि दुकानों को खोलने की छूट दी गई है जो अनिवार्य भी है और जनता और देश हित में भी है।
                                 सुनीता रानी राठौर
                              ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

लॉकडाउन में लोगों के जीवन स्तर में गिरावट

लॉकडाउन में लोगों के जीवन स्तर में गिरावट
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  लॉकडाउन की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से चरमरा चुकी है। नि:संदेह आर्थिक तबाही का मंजर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे रहा है। फैक्ट्रियां कल- कारखाने बंद होने की वजह से लाखों -लाख लोग बेरोजगार हो गए ,भुखमरी के कगार पर खड़े हो गए , दाने-दाने को मोहताज हो गए ,दूसरों के समक्ष हाथ फैलाने को मजबूर हो गए।
    लॉकडाउन की अवधि काल 7 सप्ताह से बढ़कर 9 सप्ताह हो गई और आगे भी खत्म होने की उम्मीद नहीं दिखाई देती। ऐसी कठिन विषम परिस्थिति में गरीबों का तो बुरा हाल है हीं, बड़े-बड़े उद्योगपति भी प्रभावित हो रहे हैं। लंबी अवधि तक कल कारखाने बंद होने की वजह से मशीनों पर बुरा असर पड़ रहा है साथ ही कच्चे माल खराब हो रहे हैं। दूसरे देशों से माल आयात करने में भी परेशानी हो रही है। बचे माल से सामान तैयार भी करा लें तो तैयार माल निर्यात करने में परेशानी आ रही है।
दूर दराज गांव में भी आवश्यक सामग्री की आपूर्ति नहीं हो पा रही । लोग खुद को बेबस और लाचार महसूस कर रहे हैं।
      25 मार्च से देशभर में लॉकडाउन होने के बाद से फैक्ट्रियां बंद है। केंद्र सरकार की जीएसटी में 15 फ़ीसदी हिस्सा वाहन उद्योग का है। विक्री शून्य रहने के कारण वाहन कंपनियों को करीब एक लाख करोड़ का नुकसान हुआ। सरकार को भी बड़ा राजस्व नुकसान हुआ है। 
   अगर सरकार घाटे में रहेगी तो वो कर्मचारियों के वेतन व महंगाई भत्ते में भी कटौती करेगी।
 * केंद्रीय कर्मचारियों का जून 2021 तक DA में कटौती कर दी गई है। 
   लॉकडाउन की वजह से सरकारी नौकरी पेशा हो या प्राइवेट सभी के आमदनी पर बुरा असर पड़ रहा है और आगे भी पड़ेगा ।
   बेरोजगारी दर एक माह में तेजी से बढ़ी है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2020 में बेरोजगारी दर 14. 8% से बढ़कर 23.5 % पर पहुंच गई है।
    लॉक डाउन की वजह से बेरोजगारी बढ़ी और बेरोजगारी की वजह से लोगों के जीवन स्तर में गिरावट आने लगी है। भविष्य की चिंता से मानसिक रूप से विक्षिप्त हो कितनों ने आत्महत्या कर ली। अगर हालात नहीं संभले और लोगों को रोजगार नहीं मिला तब और अधिक खतरे की घंटी बज सकती है । युवा वर्ग आक्रोश और कुंठा में गलत राह भी पकड़ सकते हैं। जॉब ना मिलने की चिंता में युवा मानसिक तनाव में जा सकते हैं। गरीब व्यक्ति हर तरह के छोटे बड़े कार्य कर जीवन यापन कर लेता है पर मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे अपने आपको निम्न स्तर के कार्य में एडजस्ट नहीं कर पाते हैं। इस कारण जॉब छूट जाने पर वह ज्यादा तनाव ग्रसित हो जाते हैं ।
    सामाजिक स्तर पर हर व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार हो, आर्थिक मजबूती हो, इसके लिए सरकार को जल्द से जल्द इस बीमारी पर नियंत्रण करते हुए लॉक डाउन को खत्म करने का प्रयास करनी चाहिए। देश हित में अर्थव्यवस्था का मजबूत होना बहुत जरूरी है ताकि लोगों का जीवन स्तर के ग्राफ में उछाल देखने को मिले। 
                               सुनीता रानी राठौड़
                                ग्रेटर नोएडा( उत्तर प्रदेश)

लॉकडाउन में एक -दूसरे राज्यों के लोगों को भेजने में बरतें सावधानियां

लॉकडाउन में एक -दूसरे राज्यों के लोगों को भेजने में बरतें सावधानियां
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वर्तमान परिस्थिति और कोरोनावायरस के प्रकोप को देखते हुए जिस तरह से लॉकडाउन किया गया, लोग बेरोजगार हुए ,भुखमरी के डर से लोग घर जाने को बाध्य हुए, इस ज्वलंत मुद्दे और लोगों की मजबूरी व परेशानी को देखते हुए सरकार और प्रशासन को मजबूरन प्रवासी श्रमिक, छात्र व जरूरतमंद लोगों को अपने घर भेजने के लिए हामी भरनी पड़ी।
     प्रवासियों को अपने गांव भेजने के लिए महाराष्ट्र जैसे राज्य ने 10000 बसों का इंतजाम किया है ।भेजने से पहले बहुत सावधानियां व सतर्कता बरती जा रही है और इसकी आवश्यकता भी है ।जैसे ----
      *जिस राज्य में निवासी जाएं वहां की आपदा प्रबंधन समिति को सूचित किया जाए। 
   *भेजने से पहले सभी श्रमिक, छात्र, नागरिक का हेल्थ टेस्टिंग की जाए। हेल्थ चेकअप होने के बाद ही यात्रा का पात्र माना जाए ।अगर कोई कोरोना पॉजिटिव हो या संदेहास्पद स्थिति में हो उन्हें यात्रा की अनुमति नहीं दी जाए । 
   *प्रशासन सभी को विशेष पास उपलब्ध कराएं ताकि उन्हें बीच में कोई पुलिस वाला परेशान ना करें।
 *संभव हो सके तो पॉकेट खर्च के लिए कुछ आर्थिक मदद भी की जाए क्योंकि बहुत दिनों से मजदूर बेरोजगार बैठे हैं।
   *सभी राज्यों ने अपना -अपना हेल्प नंबर जारी किए हैं। परेशानी होने पर हेल्प नंबर से मदद लें।
     *जिस तरह से आज तेलंगाना से ट्रेन झारखंड के लिए रवाना हुई और उसमें बीमारी के प्रति सावधानी बरतते हुए 72 के जगह करीब 54 लोगों को शारीरिक दूरी का ध्यान रखते हुए एक-एक डब्बे में बैठाया गया ठीक उसी तरह बसों या निजी वाहन से जाते समय  फिजिकल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना अनिवार्य है।
   *इस बीमारी को ध्यान में रखते हुए वाहन में चलते समय ,बैठते समय ,उतरते समय शारीरिक दूरी का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है।
    *अपने राज्य में पहुंचने पर वहां के प्रशासन का साथ देते हुए 14 दिन क्वॉरेंटाइन में भी रहें। फिर हेल्थ चेकअप के बाद अपने-अपने घरों के लिए प्रस्थान करें ।
    *परेशानी में भी धैर्य का परिचय दें। भीड़ ना बढ़ाएं ।एक साथ ज्यादा लोगों के खड़े होने पर आप खुद अपना दुश्मन बन सकते हैं। अतः इससे बचें ।एक जगह एक साथ ना खड़े हों।
    *खाने पीने की चीजें लेते समय सावधानियां बरतें ।कुछ भी छूने से पहले और बाद में साबुन से अच्छी तरह हाथ धो लें।
     *व्यवहारों में सहनशीलता वह मधुरता लाएं। किसी के तंज कसने पर कि तुम बाहर से आए हो सब्र से काम लें, आक्रामक ना बनें।
     *अगर इस बीमारी से संबंधित कोई लक्षण महसूस हो बिना घबराए डॉक्टर से संपर्क करें। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और अपने परिवार का भी।
    * समझदारी अपनाते हुए हम इस बीमारी से खुद और परिवार की रक्षा कर सकते हैं ।इस बात को हमेशा ध्यान में रखें।
                            सुनीता रानी राठौर 
                           ग्रेटर नोएडा( उत्तर प्रदेश)

कोरोना के चलते लॉकडाउन की सफलता और संभावनाएं

कोरोना के चलते लॉकडाउन की सफलता और संभावनाएं 
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कोरोना की वजह से जिस तरह आपातस्थिति की भांति लॉकडाउन किया गया उससे देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई। सरकार का खजाना तो खाली हुआ हीं  लाखों लोग बेरोजगार हो गए। गरीबों की रोजी-रोटी छिन गई। आवागमन का साधन न होने से लोगों को अकस्मात मुसीबतों का सामना भी करना पड़ा।
     इसके बावजूद मजबूरी में उठाए गए कदम लॉक डाउन से सफलता भी हासिल हुई। वायरस फैलने की शुरुआती दौर में लॉकडाउन कर देने से इस महामारी पर नियंत्रण करने में काफी कामयाबी मिली। 
भारत के इस कदम की तारीफ करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के डॉक्टर डेविड नाबारो ने भी कहा है कि  'भारत में जल्द लॉक डाउन कर अपने देश को यूरोप और अमेरिका होने से बचा लिया । भारत कोरोनावायरस लड़ाई में अहम योद्धा है ।अगर इस फैसले में देरी करता तो बुरे परिणाम भुगतने पड़ते । उन्होंने इस पहल को सराहनीय कदम बताया ।
लॉकडाउन में सबसे ज्यादा सफलता मध्यप्रदेश को मिली जिन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए किराना, दूध दवा को अनिवार्य कर अन्य सभी पर रोक लगाकर रिपोर्ट नज़र में रखते हुए बीमारी पर नियंत्रण की। दूसरे राज्य में भी काफी हद तक सफलता मिली।       लॉक डाउन की विशेष सफलता---- वायु प्रदूषण खत्म होने से प्रकृति सुंदर और स्वच्छ दिखाई देने लगी। प्रदूषण करीब 40% कम हो गया ।सोशल मीडिया और हिंदुस्तान न्यूज़पेपर के अनुसार सहारनपुर व जालंधर के लोगों ने खुशियां जताते हुए फोटो खींचकर दिखाया कि हिमालय की बर्फीली चोटियों का सुंदर नजारा दूर-दूर से स्पष्ट दिखने लगा  जो अद्भुत खुशी की बात है ।ये सब प्रदूषण कम होने की वजह से हासिल हुआ। रात में आसमान में स्पष्ट तारों की झलक देखने को मिली। विलुप्त पक्षी भी नजर आने लगे। उन्हें नया जीवनदान मिला।
    लॉक डाउन के कारण वातावरण पर जो सकारात्मक असर पड़ा, उसमें उन मरीजों को विशेष लाभ मिला है जो हृदय रोगी हैं । वातावरण में प्रदूषक तत्व में कमी आने से हृदय रोगियों के श्वसन तंत्र से जुड़ी एलर्जी और इन्फेक्शन का खतरा घटा है । प्रदूषण के कारण जो मौतें हो रही थी उसने अब कमी आएगी ।हवा की गुणवत्ता में करीब 40 % सुधार हुआ ।
लॉक डाउन के चलते वाहन फैक्ट्री सब बंद होने से हवा में हानिकारक गैसें आदि का प्रभाव खत्म हो गया । गंगा - यमुना जैसे नदियों का प्रदूषित जल भी स्वच्छ हो गया । जिसे स्वच्छ करने के लिए कितने वर्षों से सरकार यत्न कर रही थी ,आज लॉकडाउन के चलते फैक्ट्रियों के गंदे पानी ना गिरने से नदियों का जल साफ दिखाई देने लगा जो भविष्य के लिए सुखद और कल्याणकारी साबित होगा।
 कंपनियां वर्क फ्रॉम होम के द्वारा अपना कार्य सुचारू रूप से करवा सकती हैं ,यह भी देखने को मिला। स्कूल ,कॉलेज व कोचिंग क्लासेस ऑनलाइन द्वारा पढ़ाई जारी रख सकते हैं ।ज्यादा ठंडी व गर्मी के वजह से स्कूल बंद होने पर भी उनकी पढ़ाई पर जो बुरा असर पड़ता था अब उसे रोका जा सकता है।
लॉकडाउन के चलते संभावनाएं -----लॉकडाउन से परिस्थितिवश हम अपने आप को इतना आंक पाए कि हम कठिन से कठिन परिस्थितियों में सफलता पा सकते हैं  ।
एकजुटता व समझदारी का परिचय देते हुए दिल्ली मुंबई कोलकाता जैसे महानगरों में वाहनों पर 'अॉड- इन -वन ' नियम का पालन करते हुए वायु प्रदूषण पर रोक लगा सकते हैं।
 फैक्ट्रियों के प्रदूषित जल व शहरों के गंदे पानी को नदियों में ना डालकर जल को प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है । 
आपात स्थिति में आवागमन बंद होने पर भी ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखा जा सकता है ।कंपनियां वर्क फ्रॉम होम द्वारा कार्य को सुचारू रखते हुए देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में सहयोग कर सकती है। 
 फैक्ट्रियों के कर्मचारियों की संख्या कम कर काम को जारी रखा जा सकता है ।
हम आपात स्थिति में भी अपने काम को सुचारू ढंग से जारी रख सकते हैं ।
कोरोना के चलते लॉकडाउन में परेशानियां तो आई   पर हमें सफलताएं भी मिली और भविष्य के लिए असीम संभावनाएं भी नजर आए। रचनात्मक कदम उठाते हुए हम विषम परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं ।
                    सुनीता रानी राठौर 
                    ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Friday, 1 May 2020

कोरोना का खतरा गया नहीं मजबूती से करें मुकाबला

कोरोना का खतरा गया नहीं, मजबूती से करें मुकाबला 
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कोरोना का खतरा खत्म होना तो दूर तीव्र रफ्तार से देश और दुनिया में बढ़ रहा है ।चीन, अमेरिका,रूस  जैसे विकसित देश में संक्रमित मरीजों की संख्या लाखों -लाख में पहुंच चुकी है।
    हमारे देश में भी संक्रमित मरीजों की संख्या तीव्रता से बढ़ते हुए 32000 के करीब पहुंच चुकी है। हमारा देश ग्राम प्रधान देश है ।दूरदराज के गांव में अगर यह वायरस फैल गई तो नियंत्रण कर पाना बहुत ही मुश्किल है।
   प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी चिंता जताते हुए गांव-गांव के सरपंचों से ऑनलाइन चर्चा कर "दो गज दूरी " का मंत्र पेश किया ताकि संक्रमण को रोका जा सके। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चरणबद्ध योजना पर काम शुरू किया जा सके ।
  मोदी जी ने राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत चौथी बार सभी मुख्यमंत्रियों से बात कर महामारी के कारण उभरती कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए आगे की नीति और योजना पर अमल करने की भी पेशकश की।
  जनता को भी मजबूती से करोना का मुकाबला करते हुए एकजुटता का परिचय देने की आवश्यकता है। अगर जन-जन में सतर्कता और सावधानियों पर अमल करने की भावना जाग उठे तो हम इस खतरे पर काबू पा सकते हैं ।
लॉक डाउन के वजह से बहुत हद तक हमारा देश इस महामारी पर नियंत्रण कसे हुए हैं । दूसरे देशों की तरह बुरी हालत में अभी हम नहीं हैं पर थोड़ी सी चूक भी हमारे लिए भयावह स्थिति उत्पन्न कर सकती है। हमारे देश में चिकित्सीय सुविधा भी उन विकसित देशों की अपेक्षा बहुत कम है ।डॉक्टरों के पास भी पीपीई कीट,ग्लबस ,मास्क आदि जरूरी साधन उत्तम गुणवत्ता वाले नहीं हैं ।अस्पतालों की संख्या भी बहुत कम है।
 विशेषज्ञों के अनुसार करोना का खतरा अभी समाप्त होने वाला भी नहीं। हमें शारीरिक दूरी बनाए रखना है ,मास्क का प्रयोग करना है, लगातार हाथों को धोते रहना है। मौसम को ध्यान में रखते हुए अन्य बीमारियों पर भी नियंत्रण रखना है ।जो संदेहास्पद स्थिति में हैं उन्हें धैर्य का परिचय देते हुए 14 दिन क्वॉरेंटाइन में रखते हुए खुद को स्वस्थ बनाना है और दूसरों को भी इस रोग से बचाना है।  ग्राम प्रधान देश होने के कारण यहां दूर-दराज के  गांव में उचित सुविधाओं का पूर्ण अभाव है। इस कारण इस खतरे को भांपते हुए पूर्ण जागरूकता के साथ हमें सावधानियां बरतते हुए डटकर मुकाबला करने की अति आवश्यकता है, ताकि यह महामारी तीसरे स्टेज में न पहुंचे। अगर हम डटकर मुकाबला नहीं किए तो हमारे देश की स्थिति बहुत ही दयनीय व भयावह हो जाएगी। नियंत्रण कर पाना मुश्किल हो जाएगा।           
इसलिए मोदी जी के मंत्र'  "दो गज  दूरी " का पालन करें ।  सावधान रहें ।सतर्क रहें। गाइडलाइंस का अनुसरण करें और सुरक्षित रहें ।
-------------------------सुनीता रानी राठौर 
                            ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

*ईश्वरीय न्याय*