Wednesday, 26 August 2020

क्या हम सब समय की कसौटी पर कसे जाते हैं?

   यह सर्वविदित है कि हमारा जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है। हम अपने  रिश्तेदारों या दोस्तों के साथ कई अहम परिस्थितियों या विपत्तियों से होकर गुजरते हैं और जीवन के इस युद्ध क्षेत्र में साहसी योद्धा या कायर की भांति हम सब समय की कसौटी पर कसे जाते हैं।
कसौटी का अर्थ है-- जांचना या परखना ।
रहीम जी ने कहा है- 
      'विपत्ति कसौटी जे कसे तेई सांचे मीत' 
अर्थात विकट घड़ी में हीं इंसान की सही पहचान होती है। सुनहरे समय में हजारों दोस्त रिश्तेदार हमारे हितेषी बनते हैं या बनने को तैयार रहते हैं पर मुसीबत की घड़ी में कौन कितना साथ देता है इसका निर्णय समय की कसौटी ही करता है।
   कृष्ण- सुदामा की सच्ची दोस्ती की परख विपत्ति के समय में सुदामा का कृष्ण के महल में पहुंचने पर प्रेमपूर्वक स्वागत के बाद ही हुआ था।
 हमारा भी फर्ज है कि अपने मार्ग में आने वाले हर बाधा को तोड़ते हुए अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर मेहनत और परिश्रम के साथ आगे बढ़ते रहें  और जीवन की कसौटी पर खरा उतरें।
    जो मुश्किल घड़ी में डटकर संघर्ष कर आगे बढ़ने का प्रयत्न करता है वही व्यक्ति जीवन में सफलता को प्राप्त कर पाता है। हम सब कभी ना कभी किसी ना किसी तरह समय की कसौटी पर कसे जाते हैं और यह सही भी है क्योंकि इसी कारण इंसान की कर्मठता की पहचान होती है।
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                       सुनीता रानी राठौर 
                       ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Tuesday, 25 August 2020

क्या शराब आवश्यक वस्तुओं में शामिल होनी चाहिए।

आवश्यक वस्तु अधिनियम के अनुसार आवश्यक वस्तुओं में शामिल होने पर विक्रेता अपनी मर्जी के अनुसार दाम नहीं बढ़ा सकता। मनमर्जी दाम बढ़ाने पर सजा का भी प्रावधान है। उस वस्तु के दाम पर सरकार का नियंत्रण होता है। 
   मेरे विचार से शराब कोई ऐसी अनिवार्य वस्तु नहीं है जिसे आवश्यक वस्तुओं में शामिल किया जाए। शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसका दुष्प्रभाव व्यक्ति के मन मस्तिष्क और हमारे समाज पर पड़ता है। अगर इसका दाम बढ़ भी रहा हो तो अच्छी बात है लोग कम इस्तेमाल करेंगे। 
   केंद्र सरकार को बिहार और गुजरात राज्य की तरह शराब का पूर्ण निषेध कर देना चाहिए ताकि लोग इसका इस्तेमाल ही न करें। शराब के कारण ही गृह कलह होते हैं। घरेलू हिंसा बढ़ने का मुख्य कारण शराब है। गरीब व्यक्ति शराब का आदी होकर अपने मेहनत का पैसा पानी की तरह बहा देता है। उसका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। शराब पीने के बाद व्यक्ति अपने विवेक बुद्धि से कोई काम नहीं कर पाता। न हीं वह अपने परिवार के हित का ध्यान रखता है न ही अपने समाज का।
   इस कारण सरकार अगर शराब को पूर्ण निषेध कर दे तो ज्यादा ही उत्तम होगा।
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                 सुनीता रानी राठौर
               ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

क्या सकारात्मक सोच ही सुख का रहस्य है?

सकारात्मक सोच से मन को शांति और सुकून मिलता है। शांति और सुकून ही जीवन का वास्तविक सुख है।
 हमारे जीवन में विचारों का महत्वपूर्ण स्थान है।
 सकारात्मक विचार दूसरों के प्रति प्रेम और सद्भावना को जन्म देती है जबकि नकारात्मक विचार ईर्ष्या और द्वेष। सकारात्मक विचार नकारात्मक की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली होते हैं।
विचार भी संक्रामक होते हैं। सकारात्मक और आशावादी सोच वाले की संगत में हमारे विचार भी सकारात्मक बनते हैं और हमारे विचार आत्मविश्वास से परिपूर्ण होते हैं। इसके विपरीत नकारात्मक सोच वाले के संगत में रहकर हम हमेशा उदास और जीवन से निराश खुद को महसूस करते हैं।
इसलिए कहा गया है कि सकारात्मक सोचें, उसी तरह की रचनाएं पढ़ें, वैसे लोगों की संगत में रहें तब हमारे अंदर serotonin, Endorphins,Dapamine आदि हार्मोन का स्राव होता है जो हमें तनाव से मुक्ति दिलाता है और मन प्रसन्न चित्त रहता है।
  धन दौलत का सुख क्षणिक सुख होता है क्योंकि उसे खोने के डर से मन हमेशा सशंकित रहता है पर मन का सुख चिरस्थाई है जो सकारात्मक सोच से मिलता है। मन हमेशा प्रसन्नचित और आनंदित रहे इससे बड़ा कोई सुख नहीं। वास्तव में सकारात्मक सोच ही सुख का रहस्य है।
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                    सुनीता रानी राठौर 
                   ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

पेड़ -पौधे

Sunday, 23 August 2020

क्या खामोशियां वास्तव में खामोश होती है?


 खामोशियां वास्तव में खामोश नहीं बल्कि अंदरूनी तूफान लिए होती हैं। अंतर्मन में द्वंद होने के कारण खामोशी का आवरण ओढ़ना पड़ता है। कभी कभी कहीं मजबूरन अभियुक्त को डरा धमका कर खामोश कर दिया जाता है पर वह भी मौका मिलते हीं सच्चाई उगल देता है।
  पारिवारिक स्तर पर सामंजस्य बनाने हेतु खामोशी अख्तियार करनी पड़ती है। सामाजिक स्तर पर खामोशियों के विभिन्न पहलू होते हैं।
   कभी-कभी दबे-कुचले हुए लोगों की आवाजें नहीं सुनी जाती इसलिए वे कुंठित भाव से खामोश हो जाते हैं पर उनके हृदय में विद्रोह की ज्वाला धधकती रहती है। ऊपर से खामोश दिखते हैंपर     अंदर से खामोश नहीं रहते।
    सरकारी स्तर पर उच्च पद पर बैठे अधिकारी या उच्च पद पर बैठे मंत्री गण जब ज्वलंत मुद्दों पर सही जवाब नहीं दे पाते तब खामोशी धारण कर लेते हैं। बिल्कुल चुप्पी साध लेना शंका उत्पन्न कर देता है कि दाल में काला है। खामोश हैं पर अंदरूनी माथापच्ची चल रही है। 
    इसी तरह जनता की भी जब सरकार नहीं सुनती। उनके समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता तब जनता भी आवाज उठाते उठाते धीरे-धीरे खामोशी अख्तियार करने लगती है पर वह अंदर ही अंदर सरकार के खिलाफ होते चली जाती है और वो खामोशी धीरे-धीरे आंधी का रूप ले लेती है और विद्रोह के स्वर में तख्तापलट हो जाता है।
    इस तरह विभिन्न बिंदुओं पर गौर करें तो आप देखेंगे कि साधारण रूप से खामोशी कोई मायने नहीं रखती पर कभी ज्यादा बोलने वाला व्यक्ति बिल्कुल खामोश हो जाए या उच्च पदस्थ अधिकारी ज्वलंत मुद्दों पर ज्यादा देर तक खामोशी धारण कर लें तो समझ जाना चाहिए कि सब कुछ ठीक नहीं है, कोई बड़ा तूफान आने वाला है। खामोशियां वास्तव में खामोश नहीं होती।
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                               सुनीता रानी राठौर
                            ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

क्या संकल्प से बड़ी कोई शक्ति होती है?

संकल्प से बड़ी शक्ति ईश्वरीय शक्ति है पर मनुष्य के पास सबसे बड़ी शक्ति है तो वह है संकल्प शक्ति।
 जब हम मन में दृढ़ संकल्प होकर किसी कार्य को करने के लिए आगे बढ़ते हैं तभी उस कार्य को पूर्ण कर पाते हैं। ईश्वर भी हमारी तभी मदद करते हैं जब हम खुद संकल्पबद्ध हो कर आगे बढ़ते हैं।
  काम पूर्ण होना ना होना वह अपने हाथ में नहीं है पर मन में दृढ़ शक्ति का होना जरूरी है। 
     कभी-कभी ईश्वरीय प्रकोप के आगे इंसान हार जाता है पर पुनः आत्मशक्ति के साथ वह जीवन पथ पर आगे बढ़ता है क्योंकि उसके हृदय में संकल्प शक्ति होती है। बाढ़ का प्रकोप हो या भूकंप की तबाही सब कुछ नष्ट होने पर भी इंसान में जीने की जिजीविषा रहती है और वह खुद के मनोबल को ऊंचा उठा आगे बढ़ता है क्योंकि उसके हृदय में संकल्प शक्ति होती है। ईश्वर ने हमें हाथ- पैर और बुद्धि बल से नवाजा है। विवेकशील प्राणी होने के नाते हीं वह संकल्प शक्ति द्वारा उठ खड़ा होता है।
     इस तरह कह सकते हैं कि मनुष्य के पास सबसे बड़ी शक्ति संकल्प शक्ति है।
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                                    सुनीता रानी राठौर
                                ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Thursday, 20 August 2020

क्या हमेशा समय के साथ चलने वाले तरक्की करते हैं?

सामाजिक प्राणी होने के नाते समाज में होने वाले उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज करना मुमकिन नहीं होता। समय के साथ जो बदलाव हो रहा है उसके अनुसार सामंजस्य स्थापित करते आगे बढ़ते रहना ही बुद्धिमानी का परिचायक है। आज का युग डिजिटल युग है। प्राचीन काल से हम तुलना करते हुए अपने रहन-सहन, खान-पान, शिक्षा और अन्य कार्यों या विचारों में अगर परिवर्तन नहीं किये तो हम कुपमंडूक की भांति हीं जीवन जीते रह जाएंगे।
   अपने व्यक्तित्व को निखारने की खातिर भारतीय संस्कृति के समावेश के साथ-साथ पाश्चात्य संस्कृति का अनुकरण करना हितकर है। महात्मा गांधी ने भी कहा था-- खिड़की सदा खुली रखें। शुद्ध हवा आने दें। प्रदूषित हवा आए तब बंद कर दें। 
   यानी सदा अच्छे विचारों का अनुकरण करें। अंधानुकरण न करें। सद्गुणों से व्यक्तित्व को पूर्ण कर समय के साथ कदम ताल मिलाते हुए आगे बढ़ते रहें तभी मंजिल पाना संभव है। हमेशा समय के साथ चलने वाले ही तरक्की करते हैं। अगर दकियानूसी विचारों से जकड़े रहे तो व्यक्तित्व का विकास पूर्णत: संभव नहीं होगा।
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                              सुनीता रानी राठौर
                           ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

क्या चिंता का इलाज सिर्फ प्रार्थना है?

चिंता कोई रोग या बीमारी नहीं है। यह एक शारीरिक मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक स्थिति है जिसके परिणाम स्वरूप हम शंकित व्यवहार करते हैं। चिंता विकार के माध्यम से अधिकांश लोग अवसाद में चले जाते हैं। इसके वजह से बेचैनी, नींद में परेशानी, वजन में बढ़ोतरी, भूख में गड़बड़ी आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं। 
चिता तो मुर्दे को जलाती है पर चिंता तो जीवित को ही मार देती है।
चिंता का इलाज प्रार्थना के साथ-साथ उसके निदान का प्रयास करना भी है। बिना प्रयास के किसी समस्या का समाधान संभव नहीं‌। चिंता विकार का इलाज मनोचिकित्सा या संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (Cognitive behavioral therapy) के साथ किया जा सकता है। चिंता मुक्त होने का  सबसे सरल और सही तरीका योग साधना है।
इसके साथ हीं सकारात्मक सोच बनाएं। नकारात्मक सोच से दूर रहें। अकेले में न बैठें, किसी न किसी काम में व्यस्त रहें। धार्मिक और संदेशप्रद पुस्तकें पढ़ें। आत्मविश्वास को बनाए रखें।
 इन विधियों को अपनाकर हम चिंता से मुक्त होने में सक्षम हो सकते हैं।
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                            सुनीता रानी राठौर 
                       ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Tuesday, 18 August 2020

इम्यूनिटी के मजबूत पोषक तत्व कौन कौन से हैं?

 इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता।हमारा शरीर  रोग से लड़ने में कितना सक्षम है यह हमारे इम्यूनिटी पर निर्भर करता है।
    इम्यूनिटी के मजबूत पोषक तत्व विटामिन डी और सी को खास माना गया है। संतरा, नींबू में विटामिन सी पोषक तत्व होता है जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है इसमें भरपूर विटामिन सी पाया जाते हैं। 
इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आम, अमरूद, पपीता भी फायदेमंद है। एक अमरूद में 200 ग्राम पोषक तत्व होते हैं। एक कप पपीते में 88 मिलीग्राम पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसी तरह स्ट्रॉबेरी में काफी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। अनानास इम्युनिटी बढ़ाने के साथ हड्डी को भी मजबूत बनाता है।
     स्ट्रौंग इम्यूनिटी के लिए आवश्यक है दूध में हल्दी और जायफल मिलाकर पीना।
   सब्जियों में लाल शिमला मिर्च, ब्रोकली, हरी पत्तेदार सब्जियां और टमाटर विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं।
     सूर्य से प्राप्त होने वाले विटामिन डी इम्यूनिटी सिस्टम के सबसे जरूरी तत्वों में से है। इसके साथ ही विटामिन डी के लिए दूध, डेयरी प्रोडक्ट, फैटी फिश और हेल्थी डाइट, अंडे जैसे चीजों का सेवन करें। प्रोटीन से भरपूर डाइट खाने से भी आपके प्रतिरोधक क्षमता शक्ति बढ़ेगे। 
      'विटामिन डी' और 'विटामिन सी' से भरपूर अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व युक्त सप्लीमेंट्स आपके प्रतिरक्षा प्रणाली को कोविड-19 और अन्य श्वसन संबंधी रोगों से लड़ने में मददगार साबित हो सकते हैं।
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                   सुनीता रानी राठौर 
                   नोएडा-ग्रेटर (उत्तर प्रदेश)

Monday, 17 August 2020

क्या बिना मतलब का झूठ याद रहते हैैं?

    हां,जब कोई बिना मतलब, बेवजह हम पर झूठा आरोप लगा दे तब वह आरोप मन को भेद देता है और हम उस झूठ को जीवनपर्यंत भूल नहीं पाते। 
     दूसरा, अगर हम कभी हंसी मजाक कोई झूठ बोल दें और उस झूठ का परिणाम सामने वाले व्यक्ति पर बुरा पड़ता है। कुछ गंभीर नुकसान के रूप में झेलना पड़ता है तब वह झूठ हमारी आत्मा पर बोझ बन जाता है और हम उसे कभी नहीं भूल पाते।
     बिना मतलब का झूठ बोलकर अगर कोई किसी व्यक्ति का सामाजिक क्षति पहुंचाता है मानसिक चोट पहुंचाता है तो वह व्यक्ति को आघात तो पहुंचाता ही है पर जो झूठ बोला उसकी भी कभी ना कभी आत्मा धिक्कारती है। वह चाह कर भी भूल नहीं पाता भले ही वह ऊपर से भूलने का दिखावा करता हो ।
     अतः परिस्थितिश कभी झूठ बोलना भी पड़े तो उतना ही बोले जिससे किसी व्यक्ति को मानसिक और सामाजिक आघात न पहुंचे। बिना मतलब का झूठ ज्यादा खतरनाक होता है।
---------*-------------सुनीता रानी राठौर
                     ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

🔥*चांदनी रात*🔥आशाओं से परिपूर्ण आह्लादित 🔥 जीवन का प्रतीक 🔥

Sunday, 16 August 2020

लघु कथा------*आजादी*

क्या देश के ईमानदार कर दाताओं को राहत मिलेगी?

13 अगस्त को प्रधानमंत्री जी द्वारा दिए गए भाषण से ऐसा महसूस हुआ कि टैक्स के मामले में पारदर्शिता बढ़ेगी और ईमानदार करदाताओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। वह एक प्लेटफार्म की शुरुआत कर रहे हैं जिसका नाम दिया गया है- 'ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन; ऑनरिंग द ऑनेस्ट' यानी 'पारदर्शी कराधान- ईमानदार का सम्मान'। 
    यह मंच हमारी कर प्रणाली में सुधार और उसे सरल बनाने के प्रयासों को मजबूती देगा। कई ईमानदार करदाताओं के लिए फायदेमंद होगा जिनकी कड़ी मेहनत देश को आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करती है। 
   सुधार करते हुए कंपनी कर की दर को 30% से घटाकर 22% करना एवं विनिमय इकाइयों के लिए 15% करने का विचार है ऐसे ही अन्य जगहों पर भी बदलाव कर रियायत देने का प्रयास है।
     ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका जैसे विकसित देशों में करदाताओं को कुछ खास रियायत मिलती हैं साथ ही सामाजिक सुरक्षा भी। लेकिन भारत में तो करदाता को ही सामाजिक सुरक्षा से वंचित कर दिया जाता है। इसका उदाहरण आयुष्मान भारत योजना है। कितनी विडंबना है कि करदाताओं के पैसे से ही योजनाएं चलाई जाती है लेकिन करदाता को इसका लाभ नहीं मिलता। जैसे--रेलवे के एसी क्लास के रिजर्वेशन में यदि टैक्स पेयर्स को थोड़ी राहत मिले या इसी तरह की कुछ अन्य रियायतें दी जाए तो टैक्स देने वाले लोग प्रोत्साहित होंगे।
   हमारे देश में घोषणाएं तो बहुत होती हैं पर उसे पूर्णता प्रदान नहीं की जाती। इस नई घोषणा का भी जमीनी स्तर पर कितना अमल हो पाएगा यह तो आगे समय ही बताएगा। अगर करदाताओं को रियायत मिलती है तो बहुत हीं खुशी की बात होगी।
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                     सुनीता रानी राठौर
                  ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Saturday, 15 August 2020

झुके हैं शीश शहादत में

मेरी ये 🔥देशभक्ति कविता 🔥🔥उन स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित है🔥 जो अपने देश की स्वतंत्रता के खातिर🔥 🔥देश की बलिवेदी पर प्राण न्योछावर🔥 कर गए पर 🔥इतिहास के पन्नों में उनका नाम अंकित नहीं हुआ🔥
💐🙏शत शत नमन 🙏💐

Friday, 14 August 2020

क्या कोरोना के चलते बंद पड़े स्कूलों को एक सितंबर से खोल देना चाहिए?

जितने तीव्र गति से कोरोना संक्रमण हमारे देश में फैल रहा है उसको देखते हुए बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करना उचित नहीं लगता। अभी कुछ दिन हमें और सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। जान है तो जहान है। एक -दो महीना और इसी तरह बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं पर अगर दूसरे नजर से देखें तो जब मंदिर मस्जिद और अन्य चीजों को जब जनता के लिए खोल दिया गया तब विद्यालय क्यों नहीं खुलना चाहिए? क्योंकि उचित शिक्षा का पूर्ण प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। 
   आज दूरदराज गांव के गरीब बच्चे ऑनलाइन शिक्षा का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। दूरदराज गांव में इंटरनेट की सुविधा अभी भी नहीं है अगर है भी तो नेटवर्क उपलब्ध नहीं रहता । दूसरी बात गरीब मां बाप अपने बच्चों को स्मार्ट फोन भी नहीं खरीद कर दे सकते। उन बच्चों की पढ़ाई बिल्कुल ठप हो चुकी है। उन बच्चों के भविष्य के बारे में अगर हम ध्यान से सोचे ,उनकी परेशानियों को समझें तब एहतियात बरतते हुए विद्यालय संस्थापकों को विद्यालय 1 सितंबर से खोलने पर विचार करना चाहिए ताकि बच्चे आकर शिक्षा ग्रहण कर सकें। हां, बहुत ही सावधानियां बरतने की भी जरूरत महसूस होगी क्योंकि ज्यादातर  छोटे बच्चे नासमझ होते हैैं। प्राइमरी क्लास के बच्चों के लिए ज्यादा रिस्क होगा। पर अब मजबूरी है कि हमें सावधानियां बरतते हुए अपने कार्य को सुचारू करना है।
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सुनीता रानी राठौर
 ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Thursday, 13 August 2020

अपराध को बढ़ावा देने में किन-किन की भूमिका होती है?

अपराध को बढ़ावा देने में पुलिस, प्रशासन, राजनेता,वकील और थोड़ी बहुत भूमिका आम जनता और समाज की भी होती है।
 अपराध भी कई किस्म के होते हैं-- व्यक्तिगत और संगठित। व्यक्तिगत अपराध बदले की भावना, कुंठाग्रस्त स्थिति या पथभ्रष्ट होने के कारण अकेला व्यक्ति करता है। इस पर पुलिस चाहे तो तुरंत नियंत्रण कर सकती है जबकि संगठित अपराध बहुत ही भयावह और सामाजिक क्षति पहुंचाने वाला होता है। इसमें जो गिरोह बनता है उसमें पुलिस और नेताओं की सहभागिता होती है। प्रशासन की तरफ से भी शह मिला होता है।
 वर्तमान में सबसे ज्यादा अपराध शिक्षित वर्ग के  उच्च पद पर बैठे नामचीन लोग करोड़ों का घोटाला   कर के कर रहे हैं। बिना मिलीभगत के इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं हो सकता। ये सफेदपोश अपराधी सबसे ज्यादा खतरनाक है जो हमारे समाज और देश को खोखला कर रहे हैं।
   आम जनता की गलती यह रहती है कि वे अपने व्यक्तिगत नुकसान के डर से उसके खिलाफ आवाज नहीं उठा पाते क्योंकि इन अपराधियों की पहुंच ऊपर तक होती है। इस कारण दिनदहाड़े गुंडागर्दी, कोई भी अपराध या गोरखधंधा करने से ये नहीं हिचकते। 
  जनता डर से आंख मूंदे रहती है। पुलिस रिश्वत लेकर चुप हो जाती है। राजनेता अपने स्वार्थ हेतु अपराधियों को शरण देते हैं। प्रशासन खुद को अच्छा साबित करने के चक्कर में अपराधों पर पर्दा डालते रहती है। इन सभी वजह से अपराध जगत फलता-फूलता रहता है। प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से अपराध को बढ़ावा देने में किसी का कम तो किसी का ज्यादा भूमिका होती ही होती है।
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                   सुनीता रानी राठौर
               ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Tuesday, 11 August 2020

क्या निंदा की परवाह किए बिना आगे बढ़ते चलना चाहिए?

'निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय'--यह पंक्ति बचपन से ही हृदय से अनुसरण करते हुए जीवन में आगे बढ़ रहे हैं। निंदक भी दो तरह के होते हैं --कुछ निंदक सिर्फ राह में रोड़े डालने वाले, कुछ निंदक हमें सचेत करने वाले।
 हमें अपने विवेकानुसार निंदक के विचारों और सुझावों पर ध्यान देते हुए निरंतर अपनी त्रुटियों को दूर कर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। अगर हम निंदा की परवाह किए बिना हमेशा आगे बढ़ते रहे तो हमारे अंदर अभिमान का भाव भी जागृत हो सकता है। खुद को सर्वश्रेष्ठ मानकर आलोचना को नजरअंदाज करते रहेंगे और इस वजह से हम गलत राह पर भी जा सकते हैं जो धीरे-धीरे पतन का कारण बन सकता है।
 निंदा कभी हमें हतोत्साहित कर आगे बढ़ने से रोकती भी है पर हमें खुद पर पूर्ण विश्वास हो तब निंदा को हम सकारात्मक रूप से ग्रहण कर अपने व्यक्तित्व को निखारते हुए अपने जीवन पथ पर सुदृढ़ता से बढ़ते हुए मंजिल प्राप्त कर सकते हैं।
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             सुनीता रानी राठौर 
           ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

💐राम भी मैं कृष्ण भी मैं 💐 💐प्रभु एक नाम अनेक 💐

Saturday, 8 August 2020

अद्वितीय प्रभु राम (समाचार पत्र प्रतिक्षा के अंतर्गत)

💐दक्षिण समाचार पत्र --प्रतीक्षा में दिनांक - 8-8-2020 के अंक में मेरी रचना 💐अद्वितीय प्रभु राम 💐को प्रकाशित करने हेतु 💐संपादक महोदय नीरज कुमार सिन्हा जी 💐को  बहुत बहुत धन्यवाद और हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं।🙏🙏💐
https://www.facebook.com/dakshinsamachar/photos/pcb.4368934576479849/4368932819813358/?type=3&theater

 💐💐 अद्वितीय प्रभु राम💐💐
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अद्वितीय, अप्रतिम, सर्वश्रेष्ठ गुणों के खान।
मां-पिता भाई-बंधु प्रजा संतों के अभिमान।।

अविनाशी श्रीराम हृदय में रहते विराजमान।
वानर गिलहरी शबरी सबका करते सम्मान।।

अयोध्या नगरी है जग में सबसे बड़ा धाम।
तीनो लोक में सबसे बड़ा श्रीराम का नाम।।

अयोध्या का मंदिर भारत का स्वाभिमान। 
मर्यादा और त्याग की प्रतिमूर्ति हैं श्री राम।।

कर्तव्यपरायणता, परदुखकातरता, उदारता वात्सल्यता,अहंकार शून्य,श्रेष्ठतम हैं गुण।।

मानवोचित वीरता, क्षमाशीलता जीवनादर्श।
शालीनता नीति कुशलता व्यक्तित्व संपूर्ण।।

न सत्तालोलुप न अहंकार समभावी है रूप।
सांवली सूरत मोहनी मूरत के वे प्रतिरूप।।

विषम परिस्थिति, अडिग निर्णय, नीतिपूर्ण। धर्मरक्षक,न्यायप्रिय महिमामंडित श्री राम।। 

आराध्य हमारे हुए अवतरित अयोध्या धाम।
मंगल भवन में विराजें मेरे आदर्श प्रभु राम।।
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                             सुनीता रानी राठौर
                             पूर्व अध्यापिका
                      ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Friday, 7 August 2020

क्या ऑनलाइन ठगी को रोका जा सकता है?


 ऑनलाइन ठगी यानी साइबर क्राइम आज तीव्र गति से फैलता जा रहा है। खुद की सतर्कता ही साइबर क्राइम से बचने का उपाय है।
    अनजान कॉल से सतर्क रहें। बैंकिंग की डिटेल किसी से साझा न करें।
 फर्जी ईमेल को पहचानें। इसमें शाब्दिक गलतियां होती हैं। अपने इंटरनेट बैंकिंग और बैंकिंग ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल कभी भी सार्वजनिक स्थान पर न करें। अपने पर्सनल लैपटॉप, कंप्यूटर या मोबाइल से ही करें। 
   सोशल मीडिया पर हैकिंग और डाटा चोरी का ज्यादातर घटनाएं वायरस के जरिए अंजाम दी जाती है। ऐसे में अपने मोबाइल कंप्यूटर में एंटीवायरस लगाएं या एप्पल जैसे ब्रांड का कंप्यूटर रखें ।
   वायरस और हैकिंग से बचना चाहते हैं तो फेसबुक, व्हाट्सएप, ईमेल पर आने वाले अनचाहे लिंक पर क्लिक न करें।
   डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड या सोशल मीडिया अकाउंट का पासवर्ड समय-समय पर बदलते रहें। इंटरनेट बैंकिंग या किसी जरूरी अकाउंट में लॉगिन करें तो काम खत्म कर अपने अकाउंट को लॉगआउट करना न भूले। 
  ऑनलाइन अपराध का अगर शिकार हो गए हों तो आप संबंधित अथॉरिटी या संस्था से शिकायत करें। जैसे खाते से पैसे निकले हो तो इसकी जानकारी तुरंत बैंक के कस्टमर केयर को दें या  कार्ड ब्लॉक कर दें। मामला ज्यादा बड़ा हो तो उसकी शिकायत जिला के मौजूद पुलिस की साइबर सेल में करें। संबंधित पेज का स्क्रीनशॉट, डेट और टाइम आदि सबूतों को सहेज कर रखें और संबंधित अथॉरिटी को देकर अपराधी को पकड़वाने में मददगार साबित हों। ऑनलाइन ठगी को अपनी और पुलिस की साइबर सेल की सतर्कता और सक्रियता के द्वारा ही रोका जा सकता है।
---------------*-----------सुनीता रानी राठौर
                       ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Thursday, 6 August 2020

श्रीराम मुक्तक पर सम्मान पत्र

प्रभु श्रीराम के चरणों में मुक्तक रूपी पुष्पांजलि अर्पित करने पर💐💐 श्री राम जन्मभूमि शिलान्यास साक्षी साहित्य सृजन सम्मान💐 💐 प्रदान कर 💐संपादक महोदय डॉ० अनिल शर्मा 'अनिल' जी 💐 ने हमें गौरवान्वित महसूस कराया। आपको बहुत-बहुत धन्यवाद और हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं💐🙏🙏💐

रामराज्य के लिए क्या सभी की हिस्सेदारी अनिवार्य होनी चाहिए?


रामराज्य यानी आदर्श शासन जिसमें न सिर्फ अपने देश की जनता बल्कि समग्र विश्व के कल्याण की भावना निहित हो। रामराज्य में किसी भी मनुष्य को दैहिक, दैविक और भौतिक समस्याओं से परेशान नहीं होना पड़ता। सभी प्रेम और सौहार्द से रहते हैं।
  जब तक मुख्य-मुख्य कार्यों में जन-जन की भागीदारी नहीं होगी, सभी के विचारों को, भावों को अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता नहीं होगी तब तक रामराज्य असंभव है।
 आधुनिकता के नाम पर हमने सिर्फ लिबास
 बदला है पर विचार नहीं। आज भी लोग संकीर्ण विचारों में जकड़े हुए देखे जाते हैं। मीडिया में भी वंचित तबकों की अभिव्यक्ति को बहुत कम स्थान मिलता है। आज भी प्रमुख पदों पर वंचित तबकों की उपस्थिति नाम मात्र है।
   जाति व्यवस्था रामराज्य के लिए घातक है। गांधी जी ने भी कहा था कि जाति के छोटे-छोटे बाड़ों  का नाश होना चाहिए। जातियां हमारे देश के विकास को, रामराज्य को रोकने का कार्य करती है।
   एक राष्ट्र में एक संविधान, एक भाषा, एक राष्ट्रीय ध्वज फिर एक राष्ट्रधर्म क्यों नहीं?  जब तक हम इंसान को इंसान नहीं समझेंगे, ऊंच-नीच की भावना से देखेंगे तब तक हम एक साथ मिलकर  प्रेमपूर्वक कार्य नहीं कर सकते।
   जिस तरह एक अकेली उंगली कमजोर पड़ जाती है पर पांचों उंगलियां मिलकर मुट्ठी बन कर शक्ति का प्रदर्शन करती है ठीक उसी तरह जब सभी जाति -धर्म, पक्ष-विपक्ष और हर वर्ग के लोग एकजुट होकर एक दूसरे के विचारों का सम्मान करते हुए कार्य करें हर दल को विश्वास में लेकर आगे बढ़े तभी कार्य में पूर्णता संभव है।
 दिखावे पर पैसा न बहा कर अनिवार्य समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर जो लोगों के हित में हो जनजीवन को लाभ पहुंचे--ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी तभी रामराज्य की कल्पना  साकार हो सकती है।
                               सुनीता रानी राठौर
                        ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Wednesday, 5 August 2020

रक्षाबंधन अप्रतिम,अद्भुत ,स्नेह बंधन

प्रभु श्री राम की महिमा

आपकी नजर में रामराज्य का अर्थ क्या है?

रामराज्य का अर्थ ---हृदय में समभाव को स्थापित कर मानवता के आधार पर इंसान को इंसान समझें। जातिगत आधार पर भेदभाव दिल में न रखकर कर्म के आधार पर सब को सम्मान दें। जाति के आधार पर किसी को पूज्य और किसी को तुच्छ न समझें।
  शोषक और शोषित का फासला मिटा कर हम सभी श्री राम के सच्चे अनुयाई बनें। उन्हें आदर्श मानकर उनके विचारों का अनुसरण करें। प्राचीन काल के राजा आज बदले हुए रूप में पूंजीपति बन गरीबों का शोषण व दोहन कर रहे हैं। सत्ताधारी स्वार्थलोलुप बन आर्थिक रूप से मजबूर लोगों के परेशानियों और जज्बातों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
    रामराज्य की स्थापना तभी होगी जब सर्वांगीण विकास हो। जमीनी स्तर पर कार्य कर आर्थिक असमानता की खाई को पाटा जाए। सत्य और अहिंसा का मार्ग पर चलकर गरीबों की संपूर्ण रक्षा हो। कर्म रूपी धर्म का पालन करते हुए लोकमत का हमेशा आदर हो। 
  रामराज्य के लिए किसी पांडित्य की आवश्यकता नहीं। हर वर्ग,धर्म, जाति के स्त्री-पुरुष, वृद्ध, बच्चों को सम्मान और अधिकार की रक्षा करते हुए उनके खुशहाल जीवन को प्रोत्साहित और सींचित करते रहना ही रामराज्य है । प्रभु  हर रूप में कण- कण में वास करते हैं। न्यायप्रिय प्रभु राम को आदर्श मान उनके विचारों का अनुसरण कर समदृष्टि भाव से आदर, प्रेम, सम्मान के साथ रामराज्य की स्थापना हो। यही उनकी सच्ची आराधना है।
                       सुनीता रानी राठौर 
                    ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

💐💐प्रभु श्री राम की महिमा 💐💐

💐मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जन्म भूमि पूजन के पावन अवसर💐 पर जैमिनी अकादमी द्वारा आयोजित💐 कवि सम्मेलन में प्रस्तुत मेरे भक्तिमय रचना 💐 *प्रभु श्री राम की महिमा* 💐पर मिले 💐💐जय श्रीराम स्मृति सम्मान पत्र 💐💐 गौरवान्वित महसूस कर संपादक महोदय विजेंद्र जैमिनी जी को बहुत-बहुत धन्यवाद और हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं 🙏🙏जय श्री राम🙏🙏💐 
💐💐श्री राम जी की महिमा 💐💐
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अविनाशी श्रीराम हृदय में रहते विराजमान।
वानर गिलहरी शबरी सबका करते सम्मान।।

न सत्तालोलुप न अहंकार समभावी है रूप।
सांवली सूरत मोहनी मूरत के वे प्रतिरूप।।

अयोध्या नगरी है जग में सबसे बड़ा धाम।
तीनो लोक में सबसे बड़ा श्रीराम का नाम।।

अयोध्या का मंदिर भारत का स्वाभिमान। 
मर्यादा और त्याग की प्रतिमूर्ति हैं श्री राम।।

कर्तव्यपरायणता, परदुखकातरता, उदारता वात्सल्यता,अहंकार शून्य,श्रेष्ठतम हैं गुण।।

मानवोचित वीरता, क्षमाशीलता जीवनादर्श।
शालीनता नीति कुशलता व्यक्तित्व संपूर्ण।।

विषम परिस्थिति, अडिग निर्णय, नीतिपूर्ण। धर्मरक्षक,न्यायप्रिय महिमामंडित श्री राम।। 

आराध्य हमारे हुए अवतरित अयोध्या धाम।
मंगल भवन में विराजें मेरे आदर्श प्रभु राम।।
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                             सुनीता रानी राठौर
                             पूर्व अध्यापिका
                      ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Tuesday, 4 August 2020

कर्म पर हमारा कितना नियंत्रण होता है?

हम अपने संस्कारों के अनुसार कर्म करते हैं। हमारे संस्कार कैसे होंगे यह हमारे परवरिश, सामाजिक परिवेश और जिन पर अडिग विश्वास है उन सभी के व्यवहार, विचार और गुणों से निर्मित होता है। कर्म हम अपने स्वभावानुसार करते हैं पर परिस्थितिनुसार कभी-कभी अपना नियंत्रण नहीं होता। बचपनावस्था में अभिभावकों के इच्छानुसार, बुजुर्गावस्था में बच्चों के इच्छानुसार, गृहस्थाश्रम में भी कभी-कभी जिम्मेदारियों के बोझ तले दबते हुए पारिवारिक व सामाजिक इच्छानुसार कर्म करना पड़ता है।
 कर्म तो हम खुद करते हैं पर कभी इच्छापूर्वक कभी अनिच्छापूर्वक। सामंजस्य बनाने हेतु कभी-कभी विचारों से समझौता करते हुए भी कर्म करना पड़ता है। फिर भी कर्म पर हमारा अपना नियंत्रण होता है। किसी भी कर्म को करते हुए हम अपने विवेक से सोच समझकर क्या उचित है? क्या अनुचित है? क्या नैतिक है? क्या अनैतिक है? तोलमोल करते हुए हम कर्म करते हैं। 
  कर्म का आधार विचार है। मनुष्य जैसा संकल्प करता है वैसा ही आचरण करता है और वैसा ही कर्म करता है।
                    सुनीता रानी राठौर 
                 ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

Sunday, 2 August 2020

क्या अपराधियों को सुख सुविधा देने वाले जेल अधिकारियों को सजा होनी चाहिए?

  आये दिन जेलों से अपराधियों द्वारा दारू पीकर तमंचे पर डांस और मौज मस्ती करते हुए वीडियो वायरल हो रहे हैं। ये सारे करतूत पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से होते हैं।आखिर उन तक कैसे दारू बोतल, मोबाइल और पिस्टल तक पहुंच जाते हैं। इन खूंखार अपराधियों के डर से या कभी रिश्वत के लालच में पुलिस अधिकारी मदद करते हैं। कभी-कभी राजनीतिक आकाओं के आदेश पर भी पुलिस अधिकारी मजबूरी में मदद करते हैं। यह तो निष्पक्ष जांच के द्वारा ही पता चल सकता है कि आखिर अपराधियों की मदद किसके द्वारा और किस तरह से की जा रही है।
   अपराधियों को जेल में सुख-सुविधा देने वाले जेल अधिकारियों को सस्पेंड करने के साथ-साथ जुर्माना भी ठोकना चाहिए। जो अधिकारी रिश्वत लेकर कानूनी नियम को अपना जागीर समझने लगे, अपराधी को पनाह दे, जेलों में सुख सुविधा प्रदान कर उसे प्रोत्साहित करने जैसा घृणित कार्य करें उन्हें भी अपराधी घोषित कर जेल में डाल देनी चाहिए ताकि दूसरे अधिकारी के मन में भय पैदा हो। रिश्वत के लालच में अपराधी का साथ न दें। कर्मचारियों और अधिकारियों का समयानुसार स्थानांतरण भी होते रहना चाहिए। एक जगह ज्यादा दिन टिके रहने पर अपराधियों से सांठगांठ होने की संभावना रहती है। पुलिस अधिकारी मनमानी न करें इसके लिए सरकार को भी सख्त रुख अपनाने की जरूरत है।
‌-------*-----  सुनीता रानी राठौर 
                   ग्रेटर नोएड (उत्तर प्रदेश)

सच्चे दोस्त की महत्ता

Saturday, 1 August 2020

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के केस में सीबीआई जांच क्यों आवश्यक हो गई है?

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के केस में सीबीआई जांच का मुद्दा जोर पकड़ रहा है क्योंकि बिहार में चुनाव है। बिहार में जेडीयू और बीजेपी की सरकार कोरोना का कहर से निपटने में नाकाम साबित हो रही है। लोग उचित इलाज के बिना मर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री को हटाने की मांग हो रही है। बाढ़ से कई जिला बुरी तरह प्रभावित है। ऐसी स्थिति में वहां की जनता का ध्यान ज्वलंत मुद्दों से हटा कर सीबीआई का मुद्दा उठाकर वहां के लोगों को खुश करने का तरीका और चुनावी प्रपंच है।
     हो सकता है सुशांत की हत्या आत्महत्या हो।पर अभी मुंबई पुलिस जांच कर रही है। इतनी जल्दी सीबीआई के लिए राजनेताओं के द्वारा मांग उठाना शक पैदा करता है। वैसे भी भारतीय मीडिया और राजनेता किसी एक व्यक्ति के मौत को सुर्खियां बनाने में माहिर हैं। बीमारी से हो रही हजारों मौतों पर चुप्पी साध लेते हैं। मेरा मानना है हर व्यक्ति का जीवन अनमोल होता है। सब अपने मां-बाप के आंखों के तारे होते हैं।
   केंद्र सरकार अभी बिहार में कोरोना के फैलते संक्रमण को रोकने हेतु और अस्पतालों की लचर व्यवस्था को ठीक करवाने में अपना योगदान दी होती तो हम मानते कि राजनेताओं द्वारा इतनी जल्दी सीबीआई द्वारा जांच की मांग उठाना चुनावी प्रोपेगेंडा नहीं है।
                          सुनीता रानी राठौर
                 ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)