Tuesday, 13 July 2021

अभिव्यक्ति की आजादी

अभिव्यक्ति की आजादी----
       अभिव्यक्ति की आजादी अर्थात विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता। ऐसी स्वतंत्रता जो अपने आप में कुछ सार्वभौमिक नियमों से बंधी हुई हो-- राष्ट्र की एकता,अखंडता और भाईचारे खराब न करे ऐसी सटीक अभिव्यक्ति हो।
       अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ है आप अपने विचार अथवा अपने पक्ष को बिना किसी भय के सामने रख सकें। आप स्वतंत्रता पूर्वक अपनी बात कह सकें परंतु इसका मतलब यह भी नहीं होता कि अपना विचार अपनी सोच दूसरों पर थोपने की कोशिश करें।
        भारत में प्रेस मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। भारत के उच्चतम न्यायालय और संसद में सदा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी गई है। अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह भी नहीं कि आप जहां भी हो वहां या सोशल मीडिया पर ऐसी पोस्ट डालते रहें जो धार्मिक उन्माद और सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे इंसान को इंसान से बांट दे।
     अभिव्यक्ति की आजादी एक मौलिक अधिकार है जो अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में देखने को मिलती है। संविधान निर्माताओं ने भी माना था कि हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1) में व्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार बनाया गया लेकिन 19 (2) में इसे सीमित करने के आधार भी बताये गए। किन आधारों पर इन अधिकारों में कटौती की जा सकती है, इस वो यह था---- झूठी निंदा, मानहानि अदालत की अवमानना, ऐसी कोई गलत कार्य जिससे राष्ट्र की सुरक्षा खतरे में पड़ती हो-- ऐसे में अभिव्यक्ति की आज आजादी सही नहीं कही जा सकती।
      अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार व्यापक है जिसमें सरकार की कटु आलोचना का भी अधिकार है पर देशद्रोही कार्य करने का अधिकार नहीं है।
       हर आलोचना को देशद्रोह बताकर मुकदमा चलाना भी उचित नहीं माना जा सकता। लोकतंत्र की आवाज दबाने वाले लोगों को भी सख्त सजा दिलाने के लिए सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
        अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान की किताब में सिर्फ पढ़ने भर नहीं बल्कि लोगों को एहसास दिलाने का माध्यम भी है कि लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का समान हक है। अभिव्यक्ति की आजादी होनी चाहिए किंतु सिर्फ उतनी ही जितनी किसी और को या अपने देश को खतरा या नुकसान न हो।
---------------*---------------
स्वरचित मौलिक रचना
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

ऑनलाइन शिक्षा का बच्चों पर प्रभाव

#दिनांक-12-07-2021
#विषय--ऑनलाइन शिक्षा का बच्चों पर प्रभाव
#विधा- आलेख
     ऑनलाइन शिक्षा कोरोना महामारी की देन है।
बड़े बच्चों के लिए तो कुछ हद तक ठीक है पर छोटे बच्चों के मन-मस्तिष्क और विशेष रूप से आंखों पर बहुत ही दुष्प्रभाव डाल रहा है।
 लैपटॉप के स्क्रीन के सामने बैठ कर ज्यादा समय तक पढ़ाई करने से हानिकारक किरणों का दुष्प्रभाव उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई मजबूरी में खानापूर्ति है। जहां  बच्चे विद्यालय जाकर शारीरिक और मानसिक गतिविधियों में अग्रसर रहते थे वहां अब चुपचाप लैपटॉप के सामने बैठ कर पढ़ाई करना, न सहपाठी का साथ होना, न ही शिक्षक का सामने होना उनके व्यक्तित्व विकास में बाधक है। 
 पूर्ण व्यक्तित्व विकास हेतु मानसिक और शारीरिक गतिविधियां दोनों का होना अति आवश्यक होता है  जो उन्हें विद्यालय में मिलता था।
   अधिकांश गरीब बच्चे तो इस ऑनलाइन पढ़ाई से भी वंचित हैं। उनकी पढ़ाई ठप हो चुकी है- कहीं बिजली नहीं तो कहीं नेटवर्क प्रॉब्लम, किसी के घर में स्मार्टफोन या लैपटॉप का उपलब्ध न होना-- बहुत सारी समस्याओं से उन्हें रू-ब-रू होना पड़ रहा है।
    नगरीय जीवन व्यतीत करने वाले और अमीर घराने के बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई उचित दिखता है पर मध्यमवर्गीय और निम्न वर्ग के बच्चों की पढ़ाई बहुत ही बाधित हुई है।
    बच्चे देश के भावी कर्णधार है और इतने लंबे समय के लिए उनके पढ़ाई का बाधित होना अहितकर है। पर बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अभी ऑनलाइन पढ़ाई ही एक माध्यम बचा है जिसे सरकार उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। अगर इस महामारी पर नियंत्रण हो जाए तो शायद बच्चों को पूर्ण शिक्षा सुचारू रूप से प्राप्त करने का अवसर मिले।
    नियमित रूप से उनकी पढ़ाई हो, परीक्षा का आयोजन सुचारू ढंग से हो, उनके मेहनत का उचित परिणाम मिले-- इसी में उनका और देश का सुखद भविष्य निहित है।
    -------*-------
        स्वरचित मौलिक रचना
        सुनीता रानी राठौर
        ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)