Tuesday, 13 July 2021

ऑनलाइन शिक्षा का बच्चों पर प्रभाव

#दिनांक-12-07-2021
#विषय--ऑनलाइन शिक्षा का बच्चों पर प्रभाव
#विधा- आलेख
     ऑनलाइन शिक्षा कोरोना महामारी की देन है।
बड़े बच्चों के लिए तो कुछ हद तक ठीक है पर छोटे बच्चों के मन-मस्तिष्क और विशेष रूप से आंखों पर बहुत ही दुष्प्रभाव डाल रहा है।
 लैपटॉप के स्क्रीन के सामने बैठ कर ज्यादा समय तक पढ़ाई करने से हानिकारक किरणों का दुष्प्रभाव उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई मजबूरी में खानापूर्ति है। जहां  बच्चे विद्यालय जाकर शारीरिक और मानसिक गतिविधियों में अग्रसर रहते थे वहां अब चुपचाप लैपटॉप के सामने बैठ कर पढ़ाई करना, न सहपाठी का साथ होना, न ही शिक्षक का सामने होना उनके व्यक्तित्व विकास में बाधक है। 
 पूर्ण व्यक्तित्व विकास हेतु मानसिक और शारीरिक गतिविधियां दोनों का होना अति आवश्यक होता है  जो उन्हें विद्यालय में मिलता था।
   अधिकांश गरीब बच्चे तो इस ऑनलाइन पढ़ाई से भी वंचित हैं। उनकी पढ़ाई ठप हो चुकी है- कहीं बिजली नहीं तो कहीं नेटवर्क प्रॉब्लम, किसी के घर में स्मार्टफोन या लैपटॉप का उपलब्ध न होना-- बहुत सारी समस्याओं से उन्हें रू-ब-रू होना पड़ रहा है।
    नगरीय जीवन व्यतीत करने वाले और अमीर घराने के बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई उचित दिखता है पर मध्यमवर्गीय और निम्न वर्ग के बच्चों की पढ़ाई बहुत ही बाधित हुई है।
    बच्चे देश के भावी कर्णधार है और इतने लंबे समय के लिए उनके पढ़ाई का बाधित होना अहितकर है। पर बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अभी ऑनलाइन पढ़ाई ही एक माध्यम बचा है जिसे सरकार उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। अगर इस महामारी पर नियंत्रण हो जाए तो शायद बच्चों को पूर्ण शिक्षा सुचारू रूप से प्राप्त करने का अवसर मिले।
    नियमित रूप से उनकी पढ़ाई हो, परीक्षा का आयोजन सुचारू ढंग से हो, उनके मेहनत का उचित परिणाम मिले-- इसी में उनका और देश का सुखद भविष्य निहित है।
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        स्वरचित मौलिक रचना
        सुनीता रानी राठौर
        ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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