Friday, 14 February 2020

-------- "श्रद्धांजलि वीर जवानों को"---------

शब्दों में  सामर्थ्य नहीं, शहादत को पंक्तिबद्ध करूँ
जुंबा मे इतनी ताकत नहीं, कुर्बानी को ब्यां करूँ ।
वीरों का बह रहा लहू ,आक्रोश कैसे व्यक्त करूँ ?
उस करुण क्रंदन को,किन शब्दों में चित्रण करूँ ।

 रात्रि की निस्तब्धता को,रौंदती चीखें अपनों की ।
    सारे सपने ढह गए , दीवार जैसे रेत की । 
तिरंगे म़े देख शहीदों को , तिरंगा भी रोता दिखा ।
ये कैसी हैवानियत, दहशतगर्दी ही वाजिब दिखा ।

मृतप्राय वे दहशतगर्द, जो खूनी होली खेल रहे ।
वे आतंक पथ पे बढ़े हम मौत का मंजर झेल रहे 
 चढ़ा जुनून जेहाद का पथ विचलित युवाओं में ।
  लिख रहे सकून दिल का, मौत की स्याही में ।

रक्तरंजित हुई धरती, मानवता को धिक्कार रही।
 शहीदों की शहादत पर, इंसानियत भी रो रही ।
 मर कर जो हुए अमर, सर झुके हैं  शहादत में ।
            करूँ शत-शत उन्हें नमन
       जो शहीद हुए हमारी हिफाजत में ।
------------*--------------सुनीता रानी राठौर

No comments:

Post a Comment