Sunday, 1 November 2020

इंसान क्यों बन जाता है जानवर?

इंसान क्यों बन जाता है जानवर?
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इंसान विवेकशील प्राणी है-- जब उसका विवेक काम करना बंद कर दे तो वह जानवरों की तरह पेश आने लगता है। ईर्ष्या,लोभ,द्वेष, अहंकार जैसे दुर्गुणों के कारण वह स्वार्थवश दूसरों का अहित और अपने हित की कामना करने लगता है।
    जब उसके हृदय में परदुखकातरता की भावना खत्म हो जाती है, सामने वाले के प्रति उसके हृदय में सहानुभूति, ममता, दया, करुणा जैसे मानवीय गुणों का हनन हो जाता है तब वह इंसान जानवरों की तरह बिना सोचे-समझे व्यवहार करता है। उसे सिर्फ अपनी भलाई की चिंता होती है। दूसरे के दुख से उसके हृदय में कोई सहानुभूति नहीं उपजती।
    ऐसा इंसान स्वार्थवश सिर्फ अपना भला चाहता है और अपने सुख की परवाह करता है।
   मनुष्य संवेदनशील प्राणी है। भावुकता में आकर कभी-कभी अंधभक्त बन कर भी भीड़ का हिस्सा बन क्षणिक आवेश में बिना विवेक से निर्णय लिए वह जानवरों की तरह अमानवीय हरकत करता है। कुछ पल के लिए तो उसे आत्मसंतुष्टि मिलती है पर अंततः उसकी आत्मा धिक्कारती ही है।
   तुच्छ आत्मसंतुष्टि हेतु इंसान जानवर यानी हैवान बन जाता है जिसका परिणाम हमेशा दुखदाई ही होता है।
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         सुनीता रानी राठौर
      ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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