उजाले की रोशनी में बीते जो काले दिन
टूट गई डोर विश्वास की होकर टिमटिम ।
नर नहीं नर- पिचास बन गये भाई बंधु
मन से नहीं बिसरता वो भयावह दिन ।
कत्लेआम कर जो आते घर उन्हें आती कैसे नींद
छीना दूजे का सुख चैन या खुद का गया चैन छीन
जलाकर खाक कर डाला जिन घरों व दुकानों को
वो आह जिने नहीं देंगें मरोगे तिल तिल एक दिन
खूंखार हैं आतंकवादी या देश में पले दंगाई
धर्मांधता के आड़ में जो कत्लेआम मचाई ।
हैवानियत की बंदूक से किया अपनों का खून
इंसानियत पे लगा धब्बा कैसी कटृरता दिखाई ।
मुआवजा दे कर कुछ खामियां प्रशासन ने छुपाई
गांव की क्या होगी दुर्दशा जब दिल्ली को दहलाई
जान की कीमत इंसा की न होती खूनी आंखों में
होता कत्ल मंत्री का वे करते मुआवजे से भरपाई।
पथभ्रमित हो रहे युवा इन नेताओं के बहकावे में
दंगाई हत्यारा बन के युवा भरते जा रहे जेलों में रोजगार मिले नहीं गुमराह हो वे कातिल बन रहे
'सुनीता' भावी कर्णधारों का भविष्य है अंधेरों में।
------------+-----------+--------+सुनीता रानी राठौर
वे काले दिन
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उजाले की रोशनी में बीते जो काले दिन
टूट गई डोर विश्वास की होकर टिमटिम ।
नर नहीं नर- पिचास बन गये भाई बंधु
मन से नहीं बिसरता वो भयावह दिन ।
कत्लेआम कर जो आते घर उन्हें आती कैसे नींद
छीना दूजे का सुख चैन या खुद का गया चैन छीन
जलाकर खाक कर डाला जिन घरों व दुकानों को
वो आह जिने नहीं देंगें मरोगे तिल तिल एक दिन।
खूंखार हैं आतंकवादी या देश में पले दंगाई
धर्मांधता के आड़ में कैसी कत्लेआम मचाई ।
हैवानियत की बंदूक से किया अपनों का खून
इंसानियत पे लगा धब्बा कैसी कटृरता दिखाई ।
मुआवजा दे कर कुछ खामियां प्रशासन ने छुपाई
गांव की क्या होगी दुर्दशा जब दिल्ली को दहलाई
जान की कीमत न होती है उनके निर्दयी आंखों में
होता कत्ल मंत्री का करते मुआवजा से भरपाई।
पथभ्रमित हो रहे युवा इन नेताओं के बहकावे में
दंगाई कातिल बन के युवा भरते जा रहे जेलों में रोजगार मिले नहीं गुमराह हो वे कातिल बन रहे
'सुनीता' भावी कर्णधारों का भविष्य है अंधेरों में।
------------+-----------+------+सुनीता रानी राठौर
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