व्यंग्यात्मक रचना
वाह रे ! मेरा स्मार्ट इंडिया
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अक्षरों से जब हुई पहचान,
किताब पढ़ी मिला ज्ञान
जाति-पॉति से बड़ा धर्म है,
धर्म-धान्य से बड़ा कर्म है।
झेली हकीकत तो हुई वाकिफ
जात-पात ही मुख्य परिचय पत्र है।
थी " सरनेम" के खिलाफ बचपन से
था जुनुन पहचान बनाना कर्म से ।
पर हुई बड़ी जैसे-जैसे
घूमी देश का कोना-कोना ।
परिदृश्य वही चहूँ ओर दिखा ,
मानसिकता सबका एक समान ।
जाति-पॉति से बड़ा धर्म है,
धर्म-धान्य से बड़ा कर्म है।
झेली हकीकत तो हुई वाकिफ
जात-पात ही मुख्य परिचय पत्र है।
थी " सरनेम" के खिलाफ बचपन से
था जुनुन पहचान बनाना कर्म से ।
पर हुई बड़ी जैसे-जैसे
घूमी देश का कोना-कोना ।
परिदृश्य वही चहूँ ओर दिखा ,
मानसिकता सबका एक समान ।
है अपवाद एन आर्ट वर्ल्ड
जहाँ नहीं पूछते जातिगत आधार ।
वरना ईक्कीसवी सदी का क्या बताऊँ हाल?
कॉलेज हो या ऑफिस या कोई सभा स्थल,
अशिक्षित को छोड़ें जनाब शिक्षित भी
पूछते परिचय में--बेतुका सवाल ।
मैडम क्या है " सरनेम" आपका ?
दिया मैंने भी हंसकर जबाब----
करेंगें दोस्ती "सरनेम" जानकर
या करेंगेै रिश्ता मेरे घर पर ।
मिला Ph. D.होल्डर जनाब का जबाब
पूछती है दुनिया यूं ही,पूछ लिया मैंने भी यूं ही ।
Educated लोगों का अनूठा ज्ञानपीपासा
देखिए पकड़ते हैं कैसे नब्ज आपका
किस category से belong करते हैं आप
Gen. ,OBC.,या,या ,या---
उनके नजरिये को समझी धीरे धीरे
हकीकत से वाकिफ हो गई धीरे-धीरे ।
ऑसमाँ से उतर कर आ गई धरती पर ।
इक्कीसवीं सदी में भी" सरनेम"ही है परिचय पत्र । उद्घघोषणा न हो जब तक सरनेम का ।
कुलबुलाते रहते हैं कीड़े उनके अंतर्मन का ।
सद्व्यवहार, इंसानियत या मानवता,
हैं कोरी कागजी बातें नहीं दिखती नैतिकता ।
जनाब को निकलवानी हो आपसे काम ।
करेंगे आपके आचरण का बखान
अन्यथा"सरनेम" अनुसार मान सम्मान ।
समझ लें खिले,मुरझाए चेहरे का भाव देखकर,
वैसे ही जैसे मेजबान करतेे मेहमान का सत्कार ।
अध्ययनरत हो या दे रहे हो कहीं साक्षात्कार
तवज्जो, अहम रोल जातिवाद रुपी सरनेम का ।
अहमियत जान लुफ्त उठाते हैं राजनेेता
देखना परिदृश्य चुनाव के दरमियाँ ।
महिमामंडित करते चरण पखाड़ ,
सरनेम देख देते गरिमामयी पद प्रदान ।
वाह रे मेरा स्मार्ट इंडिया
अतुलनीय है आचार विचार ।
जहाँ नहीं पूछते जातिगत आधार ।
वरना ईक्कीसवी सदी का क्या बताऊँ हाल?
कॉलेज हो या ऑफिस या कोई सभा स्थल,
अशिक्षित को छोड़ें जनाब शिक्षित भी
पूछते परिचय में--बेतुका सवाल ।
मैडम क्या है " सरनेम" आपका ?
दिया मैंने भी हंसकर जबाब----
करेंगें दोस्ती "सरनेम" जानकर
या करेंगेै रिश्ता मेरे घर पर ।
मिला Ph. D.होल्डर जनाब का जबाब
पूछती है दुनिया यूं ही,पूछ लिया मैंने भी यूं ही ।
Educated लोगों का अनूठा ज्ञानपीपासा
देखिए पकड़ते हैं कैसे नब्ज आपका
किस category से belong करते हैं आप
Gen. ,OBC.,या,या ,या---
उनके नजरिये को समझी धीरे धीरे
हकीकत से वाकिफ हो गई धीरे-धीरे ।
ऑसमाँ से उतर कर आ गई धरती पर ।
इक्कीसवीं सदी में भी" सरनेम"ही है परिचय पत्र । उद्घघोषणा न हो जब तक सरनेम का ।
कुलबुलाते रहते हैं कीड़े उनके अंतर्मन का ।
सद्व्यवहार, इंसानियत या मानवता,
हैं कोरी कागजी बातें नहीं दिखती नैतिकता ।
जनाब को निकलवानी हो आपसे काम ।
करेंगे आपके आचरण का बखान
अन्यथा"सरनेम" अनुसार मान सम्मान ।
समझ लें खिले,मुरझाए चेहरे का भाव देखकर,
वैसे ही जैसे मेजबान करतेे मेहमान का सत्कार ।
अध्ययनरत हो या दे रहे हो कहीं साक्षात्कार
तवज्जो, अहम रोल जातिवाद रुपी सरनेम का ।
अहमियत जान लुफ्त उठाते हैं राजनेेता
देखना परिदृश्य चुनाव के दरमियाँ ।
महिमामंडित करते चरण पखाड़ ,
सरनेम देख देते गरिमामयी पद प्रदान ।
वाह रे मेरा स्मार्ट इंडिया
अतुलनीय है आचार विचार ।
होता है देख मन अचंभित
देशवासियों की बाह्य धारणा ।
ढले हैं Western culture में भले सभी।
फर्राटेदार बोल अंग्रेजी, पहन कर जीन्स टॉप ।
विचार हमारे वही पुरातन
हृदय में जातिगत संस्कार ।
हम जन्में ब्रह्मा के मुख से
वो जन्में हैं जांघ से ।
सोच हमारी वहीं अटकीं
कुपमण्डुक कहूं या पुरातन काल ।्
Smart बन जाए भले ही इण्डिया ,
पर "सुनीता"जियेंगे सदैव भारतीय विचार ।
वाह रे ! मेरा स्मार्ट इंडिया।
अतुलनीय है आचार विचार ।
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- सुनीता रानी राठौर
देशवासियों की बाह्य धारणा ।
ढले हैं Western culture में भले सभी।
फर्राटेदार बोल अंग्रेजी, पहन कर जीन्स टॉप ।
विचार हमारे वही पुरातन
हृदय में जातिगत संस्कार ।
हम जन्में ब्रह्मा के मुख से
वो जन्में हैं जांघ से ।
सोच हमारी वहीं अटकीं
कुपमण्डुक कहूं या पुरातन काल ।्
Smart बन जाए भले ही इण्डिया ,
पर "सुनीता"जियेंगे सदैव भारतीय विचार ।
वाह रे ! मेरा स्मार्ट इंडिया।
अतुलनीय है आचार विचार ।
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- सुनीता रानी राठौर

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