------ नमन वीर सपूतों को -----
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शत-शत नमन उन वीर सपूतों को ,
जिनके कारण हमें मिली आजादी ।
शत-शत नमन विशेष कर उन वीर सपूतों को,
जो स्वतंत्रता संग्राम में नींव की ईंट बन गए ।
नींव की ईंट जिन्हें प्रसिद्धी की चाह नहीं ,
सर्वस्व समर्पित कर जो खो गए गुमनामी में।
चमक रहे कुछ स्वतंत्रता सेनानी रूपी कंगूरे ,
इतिहास के पन्नों में, स्वर्ण अक्षरों में ।
कंगूरे जो उस नींव की ईंट पर हैं खड़े ।
कंगूरे जिस पर प्रतिवर्ष हम माल्यार्पण करते ।
राजनेता उन पर हैं राजनीति करते ।
काश ! कोई देख पाता इस कंगूरे के नींव को ,
कीचड़ में दब कर भी जो कंगूरे की ,
मजबूती बनाये है खड़ा ।
त्याग, समर्पण की जिसकी हो निःस्वार्थ भावना,
माल्यार्पण करवाने की न हो कोई कामना ।
उनकी भावनाओं का दमन कर ,
आज क्षुद्र राजनीति हो रही ।
बाह्य आडम्बर को देख-देख ,
उनकी आत्मा रो रही ।
उनके बलिदानों पर नेता ,
आज स्वार्थ की रोटी सेंक रहे ।
गगन स्पर्शी आकांक्षाओ में ,
कंगूरा बनने का सपना देख रहे ।
अगर न होती मजबूत नींव ईंट की ,
क्या कंगूरा चमकता वहाँ ?
शत-शत नमन उन वीर सपूतों को ,
खो गए जो इतिहास के गुमनाम पन्नों में ।
वो लाल माँ का,वो सिंदूर नारी का ,
वो राखी बहन का , वो सपूत देश का ।
जो नींव की ईंट बन,कर गए सर्वस्व समर्पित ।
शत-शत नमन उन वीर सपूतों को ।
शत-शत नमन ।
----------+-----------------*सुनीता रानी राठौर------------
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