Friday, 24 January 2020

क्यों रोती हैं मेरी बेटियाँ ?

---------क्यों रोती हैं मेरी बेटियाँ  ?----–-----
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         ज्वलंत प्रश्न  उमड़ते हैं मन में ,
       जैसे हिलोरें लेती लहरें समंदर  में ।
    क्यों फिल्म " छपाक" होती है बहिष्कृत ,
क्या एसिड पीड़िता के प्रति संवेदना मर गई ह्रदय में ?

   दीप जला कर मंदिरों में देवी पूजन करते हो ,
  औरतों पर छींटाकशी करने से नहीं चूकते हो ।
क्या मीराबाई,लक्ष्मी बाई , फूलन देवी बन जायें ?
क्यों मर्दानगी अहं में नारी अस्मिता पे चोट करते हो ?

  मशाल लेकर हुजूम उमड़ते हो सड़क पर ,
फिर भी बेटियों की अस्मत लूट रही बंदूक की नोक पर।
 सियासतो ने बढ़ाया है मनोबल इन हवशियों का,
 क्योंकि कानून की धज्जियाँ उड़ाते पैसों के बल पर।

       साधु के वेष में बलात्कारी हैं छुपे बैठे ,
       मंत्री के छद्म रूप में दुराचारी हैं छुपे बैठे ।
   सफेदपोशों को सजाये मौत कब मिलेगी बोलो 
   सिसकती बेटियों को इंसाफ कब मिलेगी बोलो 
जिनके हांथ लम्बे हैं तत्परता से उन पे हांथ डालो सजा उसे दुगुनी हो ऐसा उम्दा कानून बना डालो।
एसिड पीड़िता,बलात्कार पीड़ित या परित्यक्ता बन
  पल -पल खून की आंस क्यों रोये मेरी बेटियाँ  ?
बंद करो  सियासत ,अब इनकी आंसू पोछ डालो।
 -----------*----------------*---सुनीता रानी राठौर------

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