Wednesday, 7 October 2020

हाथरस के डीएम की कार्यप्रणाली पर सवाल कर्मों उठ रहे हैं?

हाथरस के डीएम की कार्यप्रणाली पर सवाल कर्मों उठ रहे हैं?
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हाथरस के डीएम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है। डीएम जिले का सर्वेसर्वा होता है, उनके देखरेख में ही पूरे जिले का प्रशासनिक कार्य होता है। डीएम को चाहिए था कि पीड़िता और पीड़ित परिवार की उचित सुरक्षा प्रदान करते हुए मदद पहुंचाने की कोशिश करना। परन्तु वह पीड़ित परिवार को धमकाने के अंदाज में सुनाता रहा--मैं यहां पर तुम्हारे साथ रहूंगा। मीडिया 2 दिन के लिए हैं। उनकी बात पर मत जाओ --इस तरह का बात व्यवहार उनके पद के अनुकूल नहीं है।
    एक तो किसी की बेटी के साथ इतना दर्दनाक वाकया --उसके बाद उसका अंतिम संस्कार भी जबरदस्ती तानाशाही रूप में करना और उसके बाद परिवार को धमकी देना कि मीडिया से अपने मन की बात, अपनी परेशानी तुम बयां नहीं करोगे-- डीएम का इस तरह का व्यवहार प्रजातंत्र शासन के अनुकूल नहीं है।
    इंसानियत को शर्मसार करने वाले वाक्य जो उन्होंने कहा कि तुम्हारी बेटी कोरोना से मर गई होती तो क्या इतना मुआवजा मिला होता।
    इतनी घटिया दर्जे की सोच -- एक डीएम के द्वारा कही जाने वाली बात कितनी हास्यास्पद है। अगर उनकी बेटी के साथ यह हादसा होता और इस तरह का व्यवहार होता, मुआवजे का ऐलान होता-- तो क्या उनकी आत्मा को तसल्ली मिल जाती।
    इन्हीं अभद्र और निम्न स्तर के आचरण  के कारण उनके कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगा।
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                         सुनीता रानी राठौर 
                         ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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