सामूहिक दुष्कर्मियों को तुरंत सजा देने के लिए क्या-क्या कानून में संशोधन होना चाहिए?
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कानून में संशोधन करवा पाना तो बहुत दूर की बात है पर कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करवाना इतना मुश्किल नहीं है। इसके लिए नेताओं और पुलिस महकमे को अपने आचार-व्यवहार में परिवर्तन लाने की जरूरत है ताकि आम इंसान को भी न्याय और सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार मिल सके।
सामूहिक दुष्कर्मियों को तुरंत सजा देने के लिए सर्वप्रथम पुलिस को नैतिकता और ईमानदारी के साथ काम करने की जरूरत है।
नेताओं के दबाव से मुक्त होकर पुलिस निष्पक्ष भाव से काम करे। अनैतिक रूप से गलत को सही और सही को गलत ना साबित करें।
जब पुलिस साथ देगी तभी कोर्ट का दरवाजा पीड़ित न्याय की खातिर खटखटा पाएगी।
नि:संदेह हमारे कानून में बहुत खामियां हैं तभी तो पहुंच वाले लोगों का गुनाह साबित नहीं होता, तारीख पर तारीख देते हुए अंत में उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया जाता है जबकि गरीबों को या तो तुरंत किसी तरह एनकाउंटर में मार दिया जाता है या फांसी की सजा हो जाती है।
संविधान के अनुच्छेद 21 की आड़ में दोषी न्याय प्रक्रिया से खेलते हैं। उसे सख्त बनाने की जरूरत है। कोर्ट हर नागरिक के मौलिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में पीड़ित और उनके परिजनों की शिकायतों का निवारण करें।
दुष्कर्म सिर्फ एक व्यक्ति और समाज के नहीं बल्कि पूरी मानवता के खिलाफ अपराध है।अदालत अपने कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखें। ताकि इस व्यवस्था से लोगों का भरोसा न उठे। पीड़ित परिवार की मनोस्थिति को समझते हुए व्यवस्था में परिवर्तन लाने की अति आवश्यकता है।
क्या किसी नेता की बेटी के साथ दुष्कर्म हो और उसे 25लाख का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी दे दिया जाए तो क्या उन्हें शांति मिल जाएगी-- विचारणीय प्रश्न है?
न्याय प्रक्रिया सभी के लिए एक समान हो, दबाव में पुलिस काम न करें। आम जनता बस सरकार से यही उम्मीद रखती है।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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