Wednesday, 7 October 2020

क्या वक्त अपना है तो सब कुछ अपना है?

क्या वक्त अपना है तो सब कुछ अपना है?
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समय के साथ-साथ वक्त भी बदलता रहता है। अच्छा वक्त हमें कामयाबी और खुशियां प्रदान करता है। कामयाबी मिलते ही लोगों की नज़दीकियां महसूस होने लगती है और वक्त खराब होते हीं लोग किनारा करने लगते हैं।
  आम जीवन हो या सामाजिक जीवन हर जगह इन बातों को महसूस किया जा सकता है। आज आप गौर करें तो देखें कभी कांग्रेस पार्टी बुलंदियों पर थी तब सभी बड़े-बड़े नेता उस पार्टी के सदस्य बनना अपना अहो भाग्य मानते थे। आज सभी भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित होना चाह रहे हैं क्योंकि आज वह बुलंदियों पर है।
   वक्त वक्त की बात है जो ऊंचाइयों पर रहता है उससे सभी संपर्क रखना चाहते हैं। दलबदलूओं को देखकर इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है। जब आपसे उन्हें फायदे नजर आएंगे तब आप में उन्हें खुबियां ही खुबियां नजर आयेंगी अन्यथा खामियां दिखाई देने लगेंगीं। अपने फायदे की खातिर हर कदम पर दुनिया  सलाम करती है। नि:संदेह वक्त अपना है तो सब कुछ अपना है।
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                         सुनीता रानी राठौर
                       ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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