क्या आप सिर्फ जानकारी को शिक्षा समझते हैं?
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शिक्षा का हमारे जीवन वही महत्व है जो मछली के लिए पानी का, मोती के लिए सीप का। शिक्षा के बिना हर व्यक्ति अधूरा है।
शिक्षा का अर्थ होता है-- सीखना और सिखाना। पर सिर्फ जानकारी को शिक्षा कहना बिल्कुल उचित नहीं है। सच्ची शिक्षा किसी डिग्री से परे होती है या कहें किताबी ज्ञान से भी अधिक होती है।
सकारात्मक सोंच, मदद करने का दृष्टिकोण , समाज के प्रति अच्छा विचार और नैतिक मूल्यों का ज्ञान यही सच्ची शिक्षा है।
शिक्षा का मतलब होता है- खुद को दो कदम आगे ले जाना। शिक्षा जो हमें सही निर्णय लेने की सीख देती है। शिक्षा का मतलब अपने ज्ञान को बढ़ाना और उसे व्यवस्थित रखना।
शिक्षा हमें जीवन जीने का सलीका सिखाती है और कामयाबी भी देती है और साथ ही शिक्षा हमें परिपक्व भी बनाती है।
इसलिए जन-जन को शिक्षित होना जरूरी है।महात्मा गांधी जी के अनुसार भी सच्ची शिक्षा वह है जो बच्चों के आध्यात्मिक, बौद्धिक और शारीरिक पहलुओं को उभारती है। उनके मुताबिक शिक्षा का अर्थ सर्वांगीण विकास होता है।
वर्तमान में हमारे देश की शिक्षा प्रणाली किताबी शिक्षा पर जोर दे रही है जो सही नहीं है। विद्यार्थियों को व्यवहारिक शिक्षा भी उपलब्ध करानी चाहिए। विद्यार्थी तभी कुशल बनेगा जब हर चीज को व्यावहारिक रूप से सीखेगा।
आधुनिक शिक्षा प्रणाली में मानवीय मूल्यों के बजाय सिर्फ ज्यादा मार्क्स लाने पर जोर दिया जा रहा है। हमें चाहिए कि घर में भी अच्छे संस्कार और समाजिकता का गुण बच्चों को सिखाएं ताकि समाज के व्यवस्थाओं, नियमों, प्रतिमान और मूल्यों को सीखते हुए एक आदर्श नागरिक बन सके।
जानकारी कैसी है-- उसकी परख की क्षमता, नैतिक -अनैतिक की पहचान और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता ही सच्ची शिक्षा कहलाती है।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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