क्या सांसारिक सुखों का परिणाम है दुःख?
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सांसारिक सुख प्राप्त करने की लालसा में ही हम हमेशा नई-नई उम्मीद दिल में पालकर नई-नई चीजों को पाने की तमन्ना ह्रदय में संजो लेते हैं। भोग-विलास की वस्तुओं को प्राप्त करने हेतु लालायित रहते हैं और जब वह पूर्ण नहीं होता तब हम दुखी और निराश रहने लगते हैं।
धन-दौलत के नाम पर अपने सगे संबंधियों से भी आत्मीयता खत्म हो जाती है और सुख के चाहत में हम आत्मिक दुख से ग्रस्त हो जाते हैं।
ज्यादा धन कमाने की लालसा,सुख-सुविधा संपन्न व्यक्ति बनने की लालसा, आधुनिकता के होड़ में बाह्यप्रदर्शन, भोग-विलास की वस्तुएं प्राप्त करने की चाहत और अगर इच्छानुसार नहीं मिला तो मन का अशांत होना हमारी सुखी जीवन को अशांत और दुखी बना देता है।
अतः नि:संदेह हम कह सकते हैं कि सांसारिक सुखों का परिणाम ही दुःख है। जब हम माया नगरी से निकलकर अपने मन की भावनाओं पर नियंत्रण कर लेते हैं, सांसारिक सुख भोग-विलास की वस्तुओं से निर्लिप्त हो जाते हैं तब हमारा मन आत्मिक सुख को प्राप्त करता है। सांसारिक माया मोह सुख की चाहत हीं दुःख का मूल कारण है।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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