क्या अज्ञानता का परिचायक घमंड है?
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ज्ञान का अभिमान होना निश्चित तौर पर घमंड कहलाता है। ज्ञान का अभिमान सबसे बड़ी अज्ञानता है। लोगों में महाज्ञानी होने का घमंड छा जाता है। उस अभिमान में वह दूसरे को नीचा दिखाने लगता है।
मजाक उड़ाना, दूसरे को छोटा समझना उकी आदत बन जाती है। अपने को बड़ा समझने में उन्हें मानसिक शांति महसूस होती है, उनका मन प्रफुल्लित होता है-- यही ज्ञान का अभिमान है।
हर समय किसी का हीन भावना से मजाक उड़ाना, उसके व्यक्तिगत आचरण पर चोट पहुंचाना --यह भी इंसान के घमंड को ही दर्शाता है और यह घमंड अज्ञानता का ही परिचायक है।
कोई भी मनुष्य पूर्ण ज्ञानी नहीं होता। बचपन से बुढ़ापे तक कुछ न कुछ सीखते ही रहता है। अपने अहम भाव में किसी की बेइज्जती करना,बात बात पर अपमानित करना यह उसके अहंकार को प्रदर्शित करता है। अगर आप ज्ञानी हैं तो दूसरों का भी सम्मान करना सीखें। अहंकार का विनाश निश्चित रूप से कभी न कभी होता है। ज्ञान का अभिमान सबसे बड़ी अज्ञानता है और अज्ञानता का परिचायक घमंड है।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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