Sunday, 1 November 2020

सरकारी विभाग में जीवित को मृत दिखाना क्या अपराधी घोषित नहीं होना चाहिए?

सरकारी विभाग में जीवित को मृत दिखाना क्या अपराधी घोषित नहीं होना चाहिए?
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सरकारी विभाग में कहीं-कहीं जो गोरखधंधा  हो रहा है --जीवित व्यक्ति को मृत साबित कर उसका प्रमाण पत्र बना देना ताकि उन्हें जो सुविधाएं सरकार द्वारा दी जा रही थी वह न देना पड़े --यह अक्षम्य अपराध है।
 अधिकारी फर्जी हस्ताक्षर करके प्रमाण पत्र बना रहे हैं। जीवित व्यक्ति को मृत बताकर झूठा प्रमाण पत्र बनाकर उसके जमीन को बेचने का मामला खुलकर सामने आ रहा है।
राजधानी दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल का लाइसेंस शुक्रवार को दिल्ली सरकार ने इसलिए रद्द किया क्योंकि कुछ दिन पहले डिलीवरी के दौरान पैदा हुए जीवित बच्चे को मृत बता दिया गया था।अस्पताल को सामान्य तौर पर दोषी मानते हुए यह कार्रवाई सटीक जान पड़ती है।
   व्यक्ति की प्रतिष्ठा समाज में उसके लिए बहुमूल्य संपत्ति है जो अक्सर उसे भौतिक संपदा प्राप्त करने में सक्षम बनाती है। अगर उसके प्रतिष्ठा के खिलाफ कोई भी काम होता है तो वह कानूनी मानहानि का दावा कर सकता है।
    जीवित व्यक्ति को मृत साबित करना एक अपराध है ऐसे व्यक्ति या संस्था पर सख्त से सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें सजा देने का प्रावधान होना चाहिए। विशेषकर सरकारी अधिकारी जो सच्चाई को जानबूझकर दबाने की कोशिश करते हैं उनके खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिेए, उन्हें अपराधी घोषित करना चाहिए।
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                          सुनीता रानी राठौर 
                      ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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