Sunday, 1 November 2020

क्या भरोसे के बल पर कर्म सरोकार होता है?

क्या भरोसे के बल पर कर्म सरोकार होता है?
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भरोसा और विश्वास मनुष्य के हृदय में एक अद्भुत शक्ति और ऊर्जा का संचार करता है, एक नई उम्मीद जगती है, आत्मविश्वास पैदा होता है--अपने उम्मीदों पर खरा उतरने हेतु इंसान सतत् प्रयत्नशील रहता है। अपने कर्म को पूर्ण करने का ध्येय रखता है और परिणामस्वरूप उसे शुभ फल की प्राप्ति होती है।
    अगर वह किसी पर भरोसा न करें, उसके मन में कोई उम्मीद न हो, हमेशा नकारात्मक सोच लेकर वह कर्म करें तो सफलता मिलना नामुमकिन है।
     हमें अपने कर्मों पर भरोसा रखना है, हम अच्छा कर्म करते हुए लगातार मेहनत कर रहे हैं तब थोड़ी देर से ही सही पर एक दिन सफलता जरूर हासिल होगी और इसी भरोसा के आधार पर हम निरंतर प्रयत्नशील रहते हुए कामयाबी को प्राप्त करते हैं। ऊंचाइयों तक पहुंचने का प्रयत्न करते हैं।
    इसलिए जब भी हम हतोत्साहित होते हैं बड़े बुजुर्ग भी हमें सलाह देते हैं-- भरोसा रखो सब कुछ ठीक होगा। ईश्वर पर भरोसा --अपने कर्म पर भरोसा-- अपने आसपास रहने वाले लोगों पर भरोसा --सभी का सम्मिश्रित रूप हमें सफलता के पायदान तक पहुंचाने में मददगार साबित होता है। इसलिए निःसंदेह कहा जा सकता है कि भरोसे के बल पर कर्म सरोकार होता है।
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                    सुनीता रानी राठौर 
                ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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