Sunday, 1 November 2020

सच्चे मित्र की पहचान कब और कैसे होती है?

सच्चे मित्र की पहचान कब और कैसे होती है?
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मित्रता का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका और योगदान होता है। मित्र की संगति का मनुष्य पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। इसलिए मित्रता भी सोच-समझकर और अच्छे संस्कार वाले व्यक्ति से करने का प्रयास होना चाहिए। सच्चा मित्र सुख -दुख का साथी होता है और सदैव हमें गलत काम करने से रोकता है।
सच्चे मित्र की पहचान मुसीबत और विपत्ति के समय होती है। बुरे समय में अगर वह साथ दे आपका साथ छोड़कर दूर न जाए, हितैषी बनकर हर पल सहयोग करे,आप को प्रोत्साहित करे, आप की कमियों की ओर इंगित करके उसे सुधारने का भी प्रयास करें-- वही सच्चा मित्र कहलाने के योग्य होता है।
सच्चा मित्र कभी नीचा दिखाने की कोशिश नहीं करता।आपके व्यक्तिगत या गोपनीय बातें दूसरे लोगों से शेयर नहीं करता। उसमें कोई बनावटीपन भी नहीं होता। अगर वह आपको दिल से दोस्त मानता है तो वह कभी प्रतिद्वंदी की तरह व्यवहार नहीं करेगा। आपके दुख में वह दुखी और सुख में आनंदित महसूस करेगा। ऐसे मौके पर ही हम अपने दोस्तों की पहचान कर पाते हैं।
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                      सुनीता रानी राठौर
                   ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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