Monday, 1 June 2020

लॉकडाउन की पाबंदियां हटाना समय की मांग या जरूरत?

 मेरे विचार से लॉकडाउन की पाबंदियां हटाना समय की मांग तो नहीं कह सकते पर जरूरत कह सकते हैं। जिस तीव्रता से हमारे देश में वायरस संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। विश्व में भारत सातवें पायदान पर आ गया है। ऐसे वक्त में लॉकडाउन को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है ताकि बीमारी ज्यादा न फैले परन्तु आर्थिक गतिविधियों और यातायात के साधनों  को सुचारू करने हेतु लॉकडाउन की पाबंदियां हटाने की जरूरत महसूस होने लगी। पर हालात तो अभी बदतर ही हैं। 
    यही कारण है कि आज अपने ऊपर कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाह रहा है। केंद्र ने राज्य सरकार के ऊपर छोड़ दिया। राज्य सरकारों ने डीएम के ऊपर और डीएम यानी जिला प्रशासन ने वायरस फैलने के डर से बॉर्डर सील कर दिया है। पहले दिल्ली हरियाणा बॉर्डर और यूपी बॉर्डर को सील किया गया अब दिल्ली सरकार के डीएम अपनी सीमा सील कर रहे हैं। क्या पेचीदा बेतुकी अनलॉकडाउन है? जनता इन राज्यों के डीएम के चक्कर में बेवकूफ बन रोड पर तपती गर्मी में परेशान हो रही है।   
    आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की सख्त जरूरत है।अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने हेतु कंपनियों और कारखानों को खोलना अनिवार्य है। लघु उद्योगों को भी चालू करना जरूरी है ताकि आम लोगों को रोजगार प्राप्त हो सके। आमदनी का स्रोत बना रहे। भूखमरी के कगार पर जनता ना आए।
 इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखकर ही लॉकडाउन की पाबंदियां हटाई गई परंतु सरकार और जनता दोनों को बहुत ही सजग और सतर्क रहने की आवश्यकता है कि हमारा देश अमेरिका जैसी हालात में ना पहुंचे। इसमें कोई संदेह नहीं कि यहां सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही है। जनता लापरवाह है। अधिकांश जगह पर नियम का पालन नहीं दिखता। कहीं हमें भारी नुकसान का सामना ना करना पड़ जाए क्योंकि यहां धार्मिक स्थल भी  7 जून से खोले जा रहे हैं जो कि इतने अनिवार्य नहीं थे पुलिस कहां-कहां सख्ती बरतेगी?
 अतः हमारे विचार से जरूरत को ध्यान में रखते हुए जरूरी चीजों पर से ही पाबंदी हटाई जाए तो जनता और सरकार के हित में फैसले होंगे। लॉकडाउन की पाबंदियां हटाना समय की मांग तो नहीं पर जरूरत अवश्य है।
                            सुनीता रानी राठौर
                          ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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