हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपने भारत को आत्मनिर्भर बनाने का जो फैसला लिया है उसके लिए आत्मबल व दृढ़ संकल्पता की अति आवश्यकता है और यह क्षमता पूर्ण रूप से युवा पीढ़ी में देखने को मिलती है। छात्र अपने देश के भावी कर्णधार होते हैं। वे जोश और बुद्धि बल से परिपूर्ण होते हैं। अगर उन्हें सरकार के तरफ से आर्थिक प्रोत्साहन मिले तो वह निश्चित ही अपने देश को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।
यह भी हकीकत है कि हमारे स्कूली पाठ्यक्रम में व्यावहारिक ज्ञान की कमियां पाई जाती हैं। फिर भी यह सत्य है कि छात्र चाहे तो भारत को आत्मनिर्भर बना सकते हैं।
एक उदाहरण प्रस्तुत कर रही हूॅं जिसका जिक्र मोदी जी ने 'मन की बात' में भी किया था। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के भैरोगंज हेल्थ सेंटर की कहानी। जहां "संकल्प Ninety Five" के नाम से स्वास्थ्य केंद्र खोला गया। जहां मुफ्त में हेल्थ चेकअप शुरू किया गया और हजारों की भीड़ जुटी। यह महान कार्य वहां के हाई स्कूल के 1995 Batch के छात्रों द्वारा चलाया गया अभियान था। छात्रों ने एक Alumni Meet रखी और कुछ अलग करने को सोचा। जिम्मा उठाया Public Health Awareness का । उनके इस मुहिम में बेतिया के सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल जुड़ गए और निशुल्क जांच, निशुल्क दवा जन स्वास्थ्य को लेकर एक अभियान चल पड़ा और यह संकल्प एक मिसाल बनकर सामने आया।
इसी तरह दूसरा उदाहरण बिहार के वैशाली जिले के युवक का है जो सेना में जाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश के सैनिक स्कूल में पढ़ाई किया। जब गांव लौटा तब अपना विचार बदल कर लगभग 100 एकड़ में खेती -बाड़ी का काम 150 लोगों को साथ लेकर शुरू किया और आज 40 लाख सालाना टर्नओवर की मुकाम पर पहुंचा है और अब अपने साथ बेरोजगार हो गए लोगों को साथ जोड़ कर रोजगार देने का कार्य कर रहा है।
ऐसे कई उदाहरण हैं जो हमारे स्कूली छात्रों ने बुद्धि बल से कार्य को शीर्ष तक पहुंचाया है। गांधी जी ने भी अपनी उम्र में भारतीय उत्पादों को प्रोत्साहित कर आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता दिखाया था।
विवेकानंद जी ने भी कहा है --युवा वह है जो
Energy और dynamism से भरा है। वह हर असंभव को संभव करने की क्षमता रखता है।
इसलिए हम नि:संदेह कह सकते हैं कि हमारे प्रधानमंत्री जी ने जो सपना देखा है भारत को आत्मनिर्भर बनाने का, उसका रास्ता स्कूल से ही निकलेगा। सरकार को दो कदम आगे चलते हुए युवाओं को प्रोत्साहित कर उनके मनोबल को ऊंचा करने की जरूरत है।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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