हमारे देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 2 महीने में लगभग 7हजार तक पहुंच चुकी है। गंभीर बीमारियों से मरने वालों का डाटा उपलब्ध नहीं है।
नि:संदेह अधिकतर मौत गंभीर बीमारियों से हुई होगी क्योंकि लॉकडाउन के दौरान अस्पतालों में ओपीडी भी बंद कर दिया गया था। प्राइवेट क्लीनिक भी बंद हो चुकी थी। डॉक्टर कोरोना मरीजों के उपचार में व्यस्त होने के कारण में अन्य बीमारी वाले मरीजों को नहीं देख रहे थे। कैंसर और किडनी जैसे भयानक बीमारी वाले मरीज का नियमित इलाज ना मिलने के कारण उन्हें बेसमय मौत के मुंह में जाना पड़ा। यह सब परिस्थितियां गंभीर मरीजों के लिए दुखदाई साबित हुआ।
सरकार का फर्ज था कि गंभीर मरीजों के लिए उचित सुविधा उपलब्ध कराती पर आनन-फानन में लॉकडाउन कर उनके तकलीफों को नजरअंदाज कर दिया गया। दूरदराज गांव से जो मरीज दिल्ली एम्स जैसे बड़े बड़े हॉस्पिटल में इलाज कराने आए थे उन पर अचानक कहर बरपा। ना रहने की उचित सुविधा, ना इलाज की सुविधा, ना घर लौटने की सुविधा ऐसी हालात में ऐसे शारीरिक और आर्थिक रूप से परेशान गंभीर मरीजों की हालत कैसी रही होगी, कल्पना कर सकते हैं।
इसलिए इसमें कोई शक नहीं कि अधिकतर मौत गंभीर बीमारियों से हुई होगी। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि न्यूज़ चैनल इन गंभीर मुद्दे पर फोकस नहीं करते। जिससे हमारा जिंदगी प्रभावित नहीं होता उसमें टाइम पास करते हैं। अगर गंभीर मसलों पर चर्चा करें तो निःसंदेह सरकार सजग रहेगी और लोगों को भी उचित सुविधाएं मिलती रहेगी।
---------------------------&------------------
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
No comments:
Post a Comment