भारत तकनीकी दृष्टि से चीन से आगे निकल सकता है बशर्ते सरकार एक अच्छी सोच और दूरगामी नीतियों के साथ इस ओर बढ़े और यहां की जनता भी जागरूकता के साथ विकास को मूल मुद्दा बनाएं।
हमारे यहां वादें ज्यादा की जाती हैं पर काम कम। हल्की एवं थोड़ी देर आंधी तूफान आने पर 5-6 घंटे बिजली बाधित हो जाना साबित करता है कि यहां जनता के मूल मुद्दों से सरकारी तंत्र को कोई सरोकार नहीं है। जमीनी स्तर पर तकनीकी विकास बहुत कम है।
सन् 1990 तक भारत और चीन तकनीकी रूप से एक धरातल पर खड़े थे पर 30 वर्षों में चीन ने विकास की गति में उड़ान भरी और भारत कछुए की चाल में आगे बढ़ता रहा। दोनों की अर्थव्यवस्था में विशाल फासला हो चुका है फिर भी हम नाउम्मीदी के साथ नहीं जी सकते।
हमारी सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश को प्राथमिकता देने की जरूरत है। विकास अपने आप होगा। भारतीय बुद्धिजीवी और वैज्ञानिकों को उचित संसाधन मुहैया कराकर नवीनतम तकनीक एवं उपकरणों के माध्यम से प्रगति के रास्ते पर अग्रसर हो सकते हैं। आधुनिकतम तकनीक, स्वचालित मशीनों और साथ ही विकसित देशों से प्राप्त अनुभव और अध्ययन भारत को विकास की दिशा में ले जाने में सहायक हो सकता है।
चीन का क्षेत्रफल भारत से 3 गुना अधिक है। इसके बावजूद चीन अपने देश के प्रत्येक गांव और नगर को रोड से जोड़ने में सफल हुआ। उनके रेलवे स्टेशन किसी आधुनिक एयरपोर्ट से कम नहीं। वहां तेज गति से चलने वाली रेलें यात्रा में रोमांस तो भरती ही हैं साथ ही कम समय में ज्यादा दूरी भी तय करती हैं। हम तकनीक में तो पीछे हैं हीं, अपनी कोशिशों में भी पीछे दिखाई देते हैं।
हमें अपनी इन्हीं खामियों और कमजोरियों पर ध्यान देने की जरूरत है। हमारे देश में चुनाव प्रचार, बेवजह के प्रदर्शन और फालतू कार्यों पर पैसों की बर्बादी बहुत ज्यादा होती है। अगर जनता के टैक्स का सही इस्तेमाल हो , प्रतिभाओं का सदुपयोग हो, राजनेता और अधिकारीगण अपनी जिम्मेदारी इमानदारी पूर्वक निभाएं, सही दिशा में गंभीरता पूर्वक विकास कार्य हो तो निश्चित रूप से हमारा भारत तकनीकी दृष्टि से चीन से आगे निकल जाएगा।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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