Saturday, 6 June 2020

क्या गांव की ओर चल पड़े हैं भारतीय उद्योग?--

वर्तमान हालात में महानगरों से जिस तरह से कामगारों का उल्टी दिशा में पलायन हुआ, वह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है। अगर इस स्थिति से बाहर निकालने हेतु सरकार गांव की ओर भारतीय उद्योगों को मोड़ने का प्रयास करती है तो ग्रामीण युवाओं के लिए एक आशा की किरण साबित होगी। इसी के मद्देनजर सरकार ने भी आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत आने वाली योजनाओं को जारी रखने का फैसला लिया है। वैसे कल की घोषणा के अनुसार 1 साल तक कोई नई परियोजनाएं नहीं शुरू की जाएगी गरीबों की मदद योजना और आत्मनिर्भर भारत अभियान को छोड़कर।
     हां, निजी तौर पर उद्योगपति भी अपना कदम गांव की ओर बढ़ा सकते हैं पर वे भी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। अगर भारतीय उद्योग गांव की ओर कदम बढ़ाती है तो यह सुनहरा क्रांतिकारी प्रयास होगा। ग्रामीण ऊर्जावान पढ़े-लिखे युवाओं को अपने कृषि उद्योग के साथ-साथ रोजगार प्राप्त होगा। गंभीर पलायन की समस्या का समाधान होगा। 
    सरकार उद्योगों के लिए जरूरी सरकारी और सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करती है तो गांव वालों के लिए लाभदायक व मददगार साबित होगा। ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी मिलेगा और वे परिवार के साथ भी रह पाएंगे। 
भारत के गांव और वहां रहने वाले किसानों की स्थिति ज्यादातर अच्छी नहीं है। उन्हें भूमिहीन बनाने के भी कई तरह के प्रयास चल रहे हैं। ग्रामीण बाजार पर कब्जे के कई रोचक दृश्य उपलब्ध हैं। ग्रामीणों का इसमें कितना भला होगा कितना बुरा यह निर्णय कर पाना कठिन है।
     भारत की 70% आबादी गांव में बसती है। अगर गांव में उद्योगों का विस्तार हो तो सोने पर सुहागा होगा। हमारा देश समृद्ध और विकसित बनेगा। लोकल लेवल पर लोगों को रोजगार मिलेगा और पलायन पर अंकुश लगेगा।
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                               सुनीता रानी राठौर
                            ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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