Wednesday, 3 June 2020

स्वदेशी उत्पादन में आत्मनिर्भरता का मूल मंत्र क्या है?

आत्मनिर्भरता हमें सुख और संतोष देने के साथ-साथ सशक्त भी करती है। स्वदेशी उत्पादन में आत्मनिर्भरता का मूल मंत्र 5 स्तंभों पर आधारित है-- अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा, प्रणाली, जीवंत लोकतंत्र और मांग।
 स्वदेशी उत्पादन यानी स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर आत्मनिर्भर बना जा सकता है।खादी ग्रामोद्योग के उत्पाद की अच्छी बिक्री को देख कर हम अपना आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं। स्वदेशी उत्पाद से हर हाथ को काम मिलेगा।
    लॉकडाउन के कारण करीब 10 करोड़ प्रवासी कामगार गांव लौट गए हैं। उनका रिवर्स माइग्रेशन हुआ। उनके लिए काम जुटाना चुनौती है। ऐसे दौर में अर्थकेंद्रित स्वदेशी उत्पादों से ज्यादा से ज्यादा रोजगार मुहैया करा सकते हैं।
   जहां स्वदेशी का विकल्प ना हो वहां विदेशी चुने। स्वतंत्रता संग्राम के समय सर्वप्रथम गांधी जी ने विदेशी सामानों का बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा कर देशवासियों का मनोबल ऊंचा उठाया था। नमक बनाना हो या खादी वस्त्र स्वदेशी उत्पाद को प्राथमिकता दिया था। आज गेहूं, चावल तथा अन्य खाद्य पदार्थ से हमारे गोदाम भरे हैं। यह बात संकट की घड़ी में आत्मविश्वास बढ़ाती है। आर्थिक व सैन्य रूप से भी जिस दिन देश आत्मनिर्भर हो जाएगा उस दिन दुनिया भारत का लोहा मानना शुरू कर देगी।
 आज विकट घड़ी में हमारे देश में प्रतिदिन दो लाख पीपी किट और दो लाख N -95 मास्क का निर्माण हो रहा है। हमारे देशवासियों ने इस आपदा को अवसर में बदल कर इस चुनौती को स्वीकार कर आत्मनिर्भर बनने का सफल प्रयास किया है। बाबा रामदेव का पतंजलि ब्रांड हर तरह का स्वदेशी उत्पाद बनाने में अहम योगदान दे रहा है। आत्मनिर्भरता, स्वावलंबन और स्वदेशी उत्पाद के मूल मंत्र को सरकार द्वारा दिए गए पैकेज से बढ़ावा मिल सकता है। 
    आंकड़े बताते हैं कि 2.5 लाख करोड़ के एक एफएमसीजी बाजार में स्वदेशी की भागीदारी एक चौथाई है। सॉफ्ट ड्रिंक हो या कंप्यूटर हार्डवेयर बाजार 100 फीसदी कब्जा विदेशी कंपनियों का है। आज जो ग्लोबल बने हैं वह भी कभी लोकल ही थे लेकिन उन ब्रांडो को वहां के लोगों का पूरा समर्थन मिला और वे लोकल आत्मविश्वास से लबालब हो ग्लोबल ब्रांड बन गए।
    हमें भी इन तथ्यों को समझते हुए स्वदेशी उत्पाद को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर बनना है। सरकार भी इसके लिए पूरी ताकत से मुहिम चला रही है। अंतरराष्ट्रीय स्थिति को देखकर समय की मांग भी है कि हम आत्मनिर्भर बने। संकल्प शक्ति के बल पर ही भारत को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
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                               सुनीता रानी राठौर
                           ग्रेटर नोएडा  (उत्तर प्रदेश)

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