लद्दाख के गलवान वैली में जिस तरह चीनी सैनिकों की धूर्तता के कारण मुठभेड़ में हमारे 20 जवान शहीद हो गए वह कोई मामूली झड़प नहीं थी, बल्कि एक हमला था। हमारी सरकार को चाहिए कि कड़ा एक्शन ले और कठोर से कठोर कदम उठाए ताकि छोटा से छोटा नेपाल देश हो या चीन जैसा शक्तिशाली देश अपनी नापाक हरकतों से बाज आए।
भारतीय सैनिक को भी स्वतंत्र प्रभार से कार्य करने की अनुमति मिलनी चाहिए ताकि तुरंत दुश्मन को जवाब दे सकें। जो सैनिक शहीद हुए हैं उनकी शहादत का बदला लिया जाए और दुश्मन देश के मन में यह डर बैठे कि हिंदुस्तान की तरफ आंख उठाकर भी न देख सके।
वर्तमान समय में कोरोना वायरस से दोनों देश त्रस्त हैं। अभी दोनों देशों को अपने नागरिकों के हित का भी ध्यान रखना सर्वोपरि है। ऐसा भी मैसेज न जाए कि दोनों देशों की सरकारें जनता के ध्यान को भटकाने के लिए नए मामले को तूल दे रही है।
अगर बातचीत से समस्या का समाधान न हो तो कड़े कदम उठाने की अति आवश्यकता है। चीन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाकर दबाव डाला जाए कि अपने हरकतों से बाज आए। युद्ध समस्या का निवारण नहीं होता। दोनों देशों की जान माल की हानि होती है। आर्थिक स्थिति भी बदहाल हो जाती है। अभी वर्तमान में यूं ही स्थितियां ठीक नहीं है। कोई नहीं चाहेगा कि युद्ध जैसे हालात से त्राहि-त्राहि मचे। अन्य दूसरे मार्गो को बंद कर,
उनके साथ साझा व्यापार-संबंधों को बंद कर, चीन को पहले से दिए गए ठेका को रद्द कर, उनके सामानों को बायकॉट कर तथा अंतरराष्ट्रीय दबाव डलवाकर हम अपने तरफ से कड़ी चेतावनी दे सकते हैं। अगर अंतत: लातों का भूत बातों से नहीं मानता तब अंतिम फैसला सैनिक कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार को जनता का भी पूर्ण समर्थन मिलेगा।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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