कोरोनावायरस के फैलते प्रकोप और लॉकडाउन की वजह से कई कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी ताकि 'कॉम्यूनिटी ट्रांसमिशन' को रोका जा सके। जहां सुविधाओं से कुछ फायदे होते हैं वहीं कुछ नुकसान भी। जो सहूलियतें ऑफिस में मिलती हैं वह हर व्यक्ति के घर में मौजूद नहीं होतीं। जैसे--समुचित लाइट की व्यवस्था न होना, बैठने का सटीक जगह न होना, बेढंगे तरीके से बैठकर काम करना, 8 घंटे की जगह 10 घंटे काम करना आदि समस्याओं का दुष्प्रभाव नि:संदेह आंखों को प्रभावित कर रहा है।
समयानुसार चीजें काफी बदली हैं। काम को वक्त पर पूरा करने का मानसिक दबाव भी रहता है। घर से काम करने का निश्चित टाइम नहीं होता। कई घंटा एक्स्ट्रा भी काम करना पड़ता है। रात 1या 2 बजे तक ग्रुप डिस्कशन चलता रहता है। लैपटॉप के स्क्रीन पर आंखें जमी रहती है जब तक काम पूर्ण न हो जाए।
युवा हो स्कूली बच्चे ऑनलाइन कार्य करने की वजह से ज्यादातर समय स्क्रीन पर आंखें गड़ाए रहने से आंखों का लाल होना, आंखों में सूजन होना, आंखों में पानी आना जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। वर्क फ्रॉम होम में 8-10 घंटे लैपटॉप पर कार्य करना , घर पर होने के कारण टीवी देखना, मोबाइल पर भी बेब सीरीज देखते रहना किसी ना किसी रूप में स्क्रीन पर आंखें गड़ाए रहना, आंखों के लिए अहितकारी साबित हो रहा है।
आंख हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण एवं बहुमूल्य अंग है। वर्क फ्रॉम होम करने वाले युवाओं को अपनी आंखों को सुरक्षित रखने हेतु चाहिए कि बीच-बीच में बाहर खुली हवा में थोड़ी देर घूमकर पलकों को झपकाएं, ठंडे पानी से आंखों को धोएं, इससे आंखों में जलन होने से बचाया जा सकता है। सोते वक्त आंखों पर गुलाब जल की रूई की पट्टी भिगोकर रखें या खीरा का स्लाइस काट कर रखें। इससे आंखें आपकी स्वस्थ रहेंगीं।
नि:संदेह वर्क फ्रॉम होम में उचित सुविधाएं उपलब्ध ना होने के कारण आंखें प्रभावित हो रही हैं पर सावधानियां बरतते हुए अपनी आंखों को स्वस्थ रख सकते हैं। आंख है तो जहान है। इस बात को हमेशा ध्यान में रखें।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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