युवा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत हत्या है या आत्महत्या। निष्पक्ष जांच के बिना कुछ भी कहना उचित नहीं होगा।
यह भी हकीकत है कि एक उभरता सितारा अचानक मौत को गले लगा ले तो हर व्यक्ति उसकी आत्महत्या को शक के नजर से ही देखता है। उनके परिजनों के द्वारा भी आशंका जताई जा रही है कि उनकी हत्या हुई है। जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत लटकने से दम घुटने के कारण बताया जा रहा है। फिर भी संदेह के निराकरण हेतु सुशांत का विसरा रासायनिक विश्लेषण के लिए भेजा गया है। फॉरेंसिक साइंस सर्विसेज के निदेशक को जल्द रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
मानसिक यातना के कारण की गई आत्महत्या को भी मानवीय आधार पर हत्या की संज्ञा दी जाती है। इसी के मद्देनजर बिहार के कई नेता और पूर्व राज्यपाल ने भी सीबीआई जांच कराने की मांग की है। फिल्मी हस्तियों के द्वारा भी यह बात सामने आ रही है कि फिल्मी दुनिया के बहुजाल नेपोटिज्म की वजह से कुछ महीनों से वे डिप्रेशन के शिकार थे शायद इस वजह से उन्होंने ऐसा कदम उठाया। फिल्म जगत के गुटबंदी के खिलाफ चहूंओर जनाक्रोश है। पुलिस भी जांच कर रही है कि कहीं सुशांत बॉलीवुड के खेमेबाजी के शिकार तो नहीं बन गए।
सात फिल्में मिली थी जिसमें एन-केन-प्रकारेण उनसे छह छीन ली गई थी। यशराज फिल्मस से सुशांत के साथ हुए कांट्रेक्ट की कॉपी भी मांगी गई है। उन सभी परिस्थितियों की जांच की जा रही है जिनके कारण युवा अभिनेता को आत्महत्या करनी पड़ी।
यदि उपर्युक्त तथ्य सही साबित होते हैं तब नि: संदेह उनकी आत्महत्या हत्या मानी जायेगी।
मानसिक यातना देने वाला भी गुनाहगार होता है और उसे सजा भी मिलनी चाहिए। हम सभी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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