अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के केस में सीबीआई जांच का मुद्दा जोर पकड़ रहा है क्योंकि बिहार में चुनाव है। बिहार में जेडीयू और बीजेपी की सरकार कोरोना का कहर से निपटने में नाकाम साबित हो रही है। लोग उचित इलाज के बिना मर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री को हटाने की मांग हो रही है। बाढ़ से कई जिला बुरी तरह प्रभावित है। ऐसी स्थिति में वहां की जनता का ध्यान ज्वलंत मुद्दों से हटा कर सीबीआई का मुद्दा उठाकर वहां के लोगों को खुश करने का तरीका और चुनावी प्रपंच है।
हो सकता है सुशांत की हत्या आत्महत्या हो।पर अभी मुंबई पुलिस जांच कर रही है। इतनी जल्दी सीबीआई के लिए राजनेताओं के द्वारा मांग उठाना शक पैदा करता है। वैसे भी भारतीय मीडिया और राजनेता किसी एक व्यक्ति के मौत को सुर्खियां बनाने में माहिर हैं। बीमारी से हो रही हजारों मौतों पर चुप्पी साध लेते हैं। मेरा मानना है हर व्यक्ति का जीवन अनमोल होता है। सब अपने मां-बाप के आंखों के तारे होते हैं।
केंद्र सरकार अभी बिहार में कोरोना के फैलते संक्रमण को रोकने हेतु और अस्पतालों की लचर व्यवस्था को ठीक करवाने में अपना योगदान दी होती तो हम मानते कि राजनेताओं द्वारा इतनी जल्दी सीबीआई द्वारा जांच की मांग उठाना चुनावी प्रोपेगेंडा नहीं है।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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