आवश्यक वस्तु अधिनियम के अनुसार आवश्यक वस्तुओं में शामिल होने पर विक्रेता अपनी मर्जी के अनुसार दाम नहीं बढ़ा सकता। मनमर्जी दाम बढ़ाने पर सजा का भी प्रावधान है। उस वस्तु के दाम पर सरकार का नियंत्रण होता है।
मेरे विचार से शराब कोई ऐसी अनिवार्य वस्तु नहीं है जिसे आवश्यक वस्तुओं में शामिल किया जाए। शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसका दुष्प्रभाव व्यक्ति के मन मस्तिष्क और हमारे समाज पर पड़ता है। अगर इसका दाम बढ़ भी रहा हो तो अच्छी बात है लोग कम इस्तेमाल करेंगे।
केंद्र सरकार को बिहार और गुजरात राज्य की तरह शराब का पूर्ण निषेध कर देना चाहिए ताकि लोग इसका इस्तेमाल ही न करें। शराब के कारण ही गृह कलह होते हैं। घरेलू हिंसा बढ़ने का मुख्य कारण शराब है। गरीब व्यक्ति शराब का आदी होकर अपने मेहनत का पैसा पानी की तरह बहा देता है। उसका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। शराब पीने के बाद व्यक्ति अपने विवेक बुद्धि से कोई काम नहीं कर पाता। न हीं वह अपने परिवार के हित का ध्यान रखता है न ही अपने समाज का।
इस कारण सरकार अगर शराब को पूर्ण निषेध कर दे तो ज्यादा ही उत्तम होगा।
---------*--------
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
No comments:
Post a Comment