Wednesday, 26 August 2020

क्या हम सब समय की कसौटी पर कसे जाते हैं?

   यह सर्वविदित है कि हमारा जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है। हम अपने  रिश्तेदारों या दोस्तों के साथ कई अहम परिस्थितियों या विपत्तियों से होकर गुजरते हैं और जीवन के इस युद्ध क्षेत्र में साहसी योद्धा या कायर की भांति हम सब समय की कसौटी पर कसे जाते हैं।
कसौटी का अर्थ है-- जांचना या परखना ।
रहीम जी ने कहा है- 
      'विपत्ति कसौटी जे कसे तेई सांचे मीत' 
अर्थात विकट घड़ी में हीं इंसान की सही पहचान होती है। सुनहरे समय में हजारों दोस्त रिश्तेदार हमारे हितेषी बनते हैं या बनने को तैयार रहते हैं पर मुसीबत की घड़ी में कौन कितना साथ देता है इसका निर्णय समय की कसौटी ही करता है।
   कृष्ण- सुदामा की सच्ची दोस्ती की परख विपत्ति के समय में सुदामा का कृष्ण के महल में पहुंचने पर प्रेमपूर्वक स्वागत के बाद ही हुआ था।
 हमारा भी फर्ज है कि अपने मार्ग में आने वाले हर बाधा को तोड़ते हुए अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर मेहनत और परिश्रम के साथ आगे बढ़ते रहें  और जीवन की कसौटी पर खरा उतरें।
    जो मुश्किल घड़ी में डटकर संघर्ष कर आगे बढ़ने का प्रयत्न करता है वही व्यक्ति जीवन में सफलता को प्राप्त कर पाता है। हम सब कभी ना कभी किसी ना किसी तरह समय की कसौटी पर कसे जाते हैं और यह सही भी है क्योंकि इसी कारण इंसान की कर्मठता की पहचान होती है।
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                       सुनीता रानी राठौर 
                       ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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