जितने तीव्र गति से कोरोना संक्रमण हमारे देश में फैल रहा है उसको देखते हुए बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करना उचित नहीं लगता। अभी कुछ दिन हमें और सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। जान है तो जहान है। एक -दो महीना और इसी तरह बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर सकते हैं पर अगर दूसरे नजर से देखें तो जब मंदिर मस्जिद और अन्य चीजों को जब जनता के लिए खोल दिया गया तब विद्यालय क्यों नहीं खुलना चाहिए? क्योंकि उचित शिक्षा का पूर्ण प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है।
आज दूरदराज गांव के गरीब बच्चे ऑनलाइन शिक्षा का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। दूरदराज गांव में इंटरनेट की सुविधा अभी भी नहीं है अगर है भी तो नेटवर्क उपलब्ध नहीं रहता । दूसरी बात गरीब मां बाप अपने बच्चों को स्मार्ट फोन भी नहीं खरीद कर दे सकते। उन बच्चों की पढ़ाई बिल्कुल ठप हो चुकी है। उन बच्चों के भविष्य के बारे में अगर हम ध्यान से सोचे ,उनकी परेशानियों को समझें तब एहतियात बरतते हुए विद्यालय संस्थापकों को विद्यालय 1 सितंबर से खोलने पर विचार करना चाहिए ताकि बच्चे आकर शिक्षा ग्रहण कर सकें। हां, बहुत ही सावधानियां बरतने की भी जरूरत महसूस होगी क्योंकि ज्यादातर छोटे बच्चे नासमझ होते हैैं। प्राइमरी क्लास के बच्चों के लिए ज्यादा रिस्क होगा। पर अब मजबूरी है कि हमें सावधानियां बरतते हुए अपने कार्य को सुचारू करना है।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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