Tuesday, 11 August 2020

क्या निंदा की परवाह किए बिना आगे बढ़ते चलना चाहिए?

'निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय'--यह पंक्ति बचपन से ही हृदय से अनुसरण करते हुए जीवन में आगे बढ़ रहे हैं। निंदक भी दो तरह के होते हैं --कुछ निंदक सिर्फ राह में रोड़े डालने वाले, कुछ निंदक हमें सचेत करने वाले।
 हमें अपने विवेकानुसार निंदक के विचारों और सुझावों पर ध्यान देते हुए निरंतर अपनी त्रुटियों को दूर कर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। अगर हम निंदा की परवाह किए बिना हमेशा आगे बढ़ते रहे तो हमारे अंदर अभिमान का भाव भी जागृत हो सकता है। खुद को सर्वश्रेष्ठ मानकर आलोचना को नजरअंदाज करते रहेंगे और इस वजह से हम गलत राह पर भी जा सकते हैं जो धीरे-धीरे पतन का कारण बन सकता है।
 निंदा कभी हमें हतोत्साहित कर आगे बढ़ने से रोकती भी है पर हमें खुद पर पूर्ण विश्वास हो तब निंदा को हम सकारात्मक रूप से ग्रहण कर अपने व्यक्तित्व को निखारते हुए अपने जीवन पथ पर सुदृढ़ता से बढ़ते हुए मंजिल प्राप्त कर सकते हैं।
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             सुनीता रानी राठौर 
           ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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