चिंता कोई रोग या बीमारी नहीं है। यह एक शारीरिक मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक स्थिति है जिसके परिणाम स्वरूप हम शंकित व्यवहार करते हैं। चिंता विकार के माध्यम से अधिकांश लोग अवसाद में चले जाते हैं। इसके वजह से बेचैनी, नींद में परेशानी, वजन में बढ़ोतरी, भूख में गड़बड़ी आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
चिता तो मुर्दे को जलाती है पर चिंता तो जीवित को ही मार देती है।
चिंता का इलाज प्रार्थना के साथ-साथ उसके निदान का प्रयास करना भी है। बिना प्रयास के किसी समस्या का समाधान संभव नहीं। चिंता विकार का इलाज मनोचिकित्सा या संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (Cognitive behavioral therapy) के साथ किया जा सकता है। चिंता मुक्त होने का सबसे सरल और सही तरीका योग साधना है।
इसके साथ हीं सकारात्मक सोच बनाएं। नकारात्मक सोच से दूर रहें। अकेले में न बैठें, किसी न किसी काम में व्यस्त रहें। धार्मिक और संदेशप्रद पुस्तकें पढ़ें। आत्मविश्वास को बनाए रखें।
इन विधियों को अपनाकर हम चिंता से मुक्त होने में सक्षम हो सकते हैं।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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