आये दिन जेलों से अपराधियों द्वारा दारू पीकर तमंचे पर डांस और मौज मस्ती करते हुए वीडियो वायरल हो रहे हैं। ये सारे करतूत पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से होते हैं।आखिर उन तक कैसे दारू बोतल, मोबाइल और पिस्टल तक पहुंच जाते हैं। इन खूंखार अपराधियों के डर से या कभी रिश्वत के लालच में पुलिस अधिकारी मदद करते हैं। कभी-कभी राजनीतिक आकाओं के आदेश पर भी पुलिस अधिकारी मजबूरी में मदद करते हैं। यह तो निष्पक्ष जांच के द्वारा ही पता चल सकता है कि आखिर अपराधियों की मदद किसके द्वारा और किस तरह से की जा रही है।
अपराधियों को जेल में सुख-सुविधा देने वाले जेल अधिकारियों को सस्पेंड करने के साथ-साथ जुर्माना भी ठोकना चाहिए। जो अधिकारी रिश्वत लेकर कानूनी नियम को अपना जागीर समझने लगे, अपराधी को पनाह दे, जेलों में सुख सुविधा प्रदान कर उसे प्रोत्साहित करने जैसा घृणित कार्य करें उन्हें भी अपराधी घोषित कर जेल में डाल देनी चाहिए ताकि दूसरे अधिकारी के मन में भय पैदा हो। रिश्वत के लालच में अपराधी का साथ न दें। कर्मचारियों और अधिकारियों का समयानुसार स्थानांतरण भी होते रहना चाहिए। एक जगह ज्यादा दिन टिके रहने पर अपराधियों से सांठगांठ होने की संभावना रहती है। पुलिस अधिकारी मनमानी न करें इसके लिए सरकार को भी सख्त रुख अपनाने की जरूरत है।
-------*----- सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएड (उत्तर प्रदेश)
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