क्या अंग्रेजी जरूरी आजकल ?
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जिस तरह हमारा देश धर्मनिरपेक्ष देश है। सभी धर्मों को साथ लेकर चलता है ठीक उसी तरह हमारी हिंदी भाषा भी अनेक भाषाओं का सम्मिश्रण है पर वर्तमान में हिन्दी के बाद अंग्रेजी को प्राथमिकता ज्यादा दी जा रही है।
अगर हमें कूपमंडूक बन कर नहीं रहना है तो हमें हिन्दी के साथ-साथ अन्य भाषाओं को अहमियत देना भी चाहिए विशेषकर अंग्रेजी को। अगर हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी का भी ज्ञान हो तब हम अपने देश के सभी प्रांत और साथ ही विदेशों में भी दूसरों से संपर्क स्थापित कर पायेंगे और विविध ज्ञान अर्जित कर पायेंगे।
मैं महात्मा गांधी के इस विचार का पूर्ण समर्थन करती हूं ---अपने घर की खिड़की सदा खुली रखें स्वच्छ हवा आने दें प्रदूषित हवा आए तो बंद कर दें।
तात्पर्य यह कि अगर हमें अच्छे गुण सीखने को मिलते हैं जिससे हमें फायदा हो रहा हो तो हमें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हिन्दी में अंग्रेजी शब्द का प्रयोग करने की जहां तक बात है वह भी समय की मांग है क्योंकि कुछ-कुछ हिंदी शब्द इतने जटिल और दीर्घ होते हैं कि उसका उच्चारण करना आसान नहीं होता उसके जगह अंग्रेजी शब्द छोटा और आसान होता है।
जैसे--रेल का हिंदी शब्द---लौह पथ गामिनी और रेलवे स्टेशन का हिंदी अर्थ-- लौह पथ गामिनी विराम बिंदु आदि।
हमारे हिंदी भाषा में अंग्रेजी, उर्दू ,फारसी, तुर्की इतने अन्य भाषा मिश्रित हैं कि हम कभी-कभी पहचान ही नहीं पाते कि हम हिंदी बोल रहे हैं या उर्दू ।
जिस तरह हमारा देश विविधता में एकता की पहचान है ठीक उसी तरह हमारी हिंदी भाषा भी विविधता में एकता की पहचान है।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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