Thursday, 17 September 2020

क्या जीवन का मूल मंत्र सहनशीलता है?

क्या जीवन का मूल मंत्र सहनशीलता है?
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 जीवन के मूल मंत्र में धैर्य, संयम, , सहनशीलता,परोपकार दया भाव, दक्षता आदि मुख्य हैं।
   सहनशीलता मनुष्य का आभूषण है।
सहनशीलता व्यक्तित्व का सबसे उत्कृष्ट गुण है। जिस व्यक्ति में सहनशीलता नहीं वह विपरीत परिस्थितियों में टूट जाता है। अगर व्यक्ति में सहनशीलता का भाव न हो तो उसे कई बार अप्रिय स्थितियों से गुजरना पड़ता है। इसके अभाव में व्यक्ति में क्रोध पैदा होता है। क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
उत्तम चरित्र के निर्माण में सहनशीलता एक आधारस्तंभ है। समाज में हो रही हिंसक घटनाएं सहनशीलता के अभाव में जन्म ले रही है। किशोर युवा सहनशीलता के अभाव में आक्रामक हो खून खराबा कर रहे हैं और गलत मार्ग पर भटक रहे हैं।
   हमें पारिवारिक जीवन में भी यही सिखाया जाता है कि संवेदनशीलता और सहनशीलता सफल जीवन का मूल मंत्र है। यह मन का सबसे बड़ा उपहार है क्योंकि यही हमें पशुओं से अलग करता है और हम एक आदर्श समाज की परिकल्पना करते हुए सामाजिक प्राणी के रूप में सभी से मिलजुल कर रहते हैं।
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                       सुनीता रानी राठौर
                        ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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