रेलवे का निजीकरण
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किसी क्षेत्र या उद्योग के स्वामित्व को जब सरकारी हाथों से लेकर निजी हाथों में सौंपा जाता है तब निजीकरण कहलाता है।
भारतीय रेलवे को केंद्र सरकार सार्वजनिक कल्याण को बढ़ाने के लिए चलाती है ना कि लाभ कमाने के उद्देश्य से।
वर्तमान में इस ट्रेनों का रेगुलेशन और मैनेजमेंट इंडियन रेलवे ही करता है लेकिन अब मैनेजमेंट का काम प्राइवेट प्लेयर्स के हाथ में चला जाएगा। भारत सरकार ने इंडियन रेलवे के निजीकरण की दिशा में कदम उठाते हुए 109 रोड पर 151 यात्री से चलाने के लिए प्राइवेट पार्टी को इनविटेशन दिया है।
इसकी शुरुआत हाल के दिनों में पूर्ण रुप से निजी कंपनी द्वारा चलाई गई तेजस एक्सप्रेस से हुई है जिसमें दिए गए सुख-सुविधाओं में लोगों को प्रभावित किया है।
इस निजीकरण के पीछे भारतीय रेलवे का उद्देश्य रेलवे को लेटलतीफी से छुटकारा दिलाना यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना, यात्रियों को विश्वस्तरीय यात्रा का अनुभव प्रदान कराना और सभी यात्रियों को कंफर्म टिकट उपलब्ध कराना है।
भारत में 33% पैसेंजर गाड़ियां समय पर नहीं चलती हैं। ट्रेनों के सुचारू रूप से परिचालन के कारण समय की काफी बचत होगी। ट्रेन के अंदर बेहतर सुख सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। साफ-सफाई बेहतर होगी। निजीकरण द्वारा इन्हें पूरा करवाना मुख्य उद्देश्य भी है।
परन्तु निजीकरण के नुकसान को अगर महसूस करें तब यह भी कटु सत्य है कि निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य पैसा कमाने का होता है। रेलवे को भी ये उसी नजरिए से देखेंगे और प्रयोग करेंगे।
निजीकरण का सबसे बुरा प्रभाव रेलवे के किरायों में बढ़ोतरी का होगा जिसे गरीब और मध्यम वर्ग बर्दाश्त नहीं कर पाएगा।
दूसरा सबसे बड़ा नुकसान यह होगा कि बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियां खत्म होगी क्योंकि निजी प्लेयर्स कम लोगों से ज्यादा काम करवा कर अधिकतम लाभ कमाना पसंद करेंगे।
निष्कर्षत:कह सकते हैं कि रेलवे का निजीकरण ठीक वैसा ही परिणाम लाएगा जैसा कि सरकारी और निजी स्कूलों के बीच है।सरकारी स्कूल की स्थिति अच्छी नहीं है और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना गरीब जनता के लिए संभव नहीं है।
इन मुख्य बातों को ध्यान दिए बगैर भारत सरकार यदि रेलवे का निजीकरण करती है तो यह गरीब तबके और बेरोजगार युवाओं के लिए सबसे बुरा होगा। अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए सरकार द्वारा उठाया यह कदम है पर देश की अर्थव्यवस्था को इस निजीकरण से फायदा कराने के लिए सरकार को इतनी बड़ी जनसंख्या का नुकसान नहीं करनी चाहिए।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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