क्या बुद्धिमता का पता मनुष्य के व्यवहार से मालूम होता है?
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जी हां बुद्धिमता का पता मनुष्य के व्यवहार से मालूम होता है। व्यक्ति का दृष्टिकोण या नजरिया उसकी वैचारिक क्षमता व विवेक बुद्धि पर निर्भर करता है। समय के अनुसार किए गए कार्य पर ही सकारात्मक या नकारात्मक छवि बनती है। इसी के आधार पर वो अपने भीतरी क्षमता और दिमागी सक्रियता का इस्तेमाल करता है।
कितनी भी हम डिग्रियां हासिल कर लें पर हमारा व्यवहार सही नहीं है, नैतिक दृष्टि से माननीय नहीं है तो हम बुद्धिमान नहीं कहला सकते। अगर कम पढ़ा लिखा व्यक्ति भी समाज में नैतिकता का परिचय देते हुए सद्व्यवहार करता है तब उसकी बुद्धिमता की तारीफ होती है। पढ़ा-लिखा अहंकारी, नासमझ, दुर्व्यवहार करने वाला व्यक्ति कभी काबिल-ए-तारीफ नहीं होता।
हमारा लोगों के साथ आचार-व्यवहार, कठिन परिस्थितियों में लिया गया निर्णय, विषम घड़ी में सामंजस्य स्थापित करने की चेष्टा आदि ही हमारी बुद्धिमता का परिचायक है। इसलिए कहना असत्य नहीं कि बुद्धिमता का पता मनुष्य के व्यवहार से मालूम होता है।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश
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