Thursday, 17 September 2020

हिंदी और शिक्षा

             हिंदी और शिक्षा
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गौरव अपने विद्यालय का सबसे होनहार विद्यार्थी था। दसवीं कक्षा तक वह हर बार कक्षा में प्रथम आता रहा। बोर्ड परीक्षा होते हीं उसे प्रतियोगिता परीक्षा की सनक सवार हो गई। मेडिकल की तैयारी के चक्कर में हिन्दी को नजरअंदाज करने लगा।
हमेशा अध्ययनरत रहता पर सिर्फ विज्ञान पर ध्यान देता। ऐसा होनहार विद्यार्थी जो 100 में 98%  अंक प्राप्त करता था वह हिन्दी विषय को बोलचाल की भाषा और आसान समझ कर उस पर मेहनत करना छोड़ दिया। 
 वह यह नहीं समझ पाया कि हिन्दी देखने में जितना आसान है यह विषय उतना ही कठिन है। हिन्दी में मात्रा और अन्य छोटी-छोटी गलतियों के कारण हमारे नंबर बहुत ही कट जाते हैं। हिन्दी के कारण ही हम दूसरे विषय पर भी अपनी अच्छी मजबूत पकड़ बना पाते हैं।
 गौरव की नासमझी का दुष्परिणाम भी यही हुआ।
 11 वीं का परिणाम इतना खराब आया कि वह अपने कक्षा में पांचवें नंबर पर पहुंच गया। उसे बहुत ही ज्यादा दुःख हुआ।
  हिन्दी को बिल्कुल नजरअंदाज करने का वह दुष्परिणाम भुगत रहा था। उसे अपनी हिन्दी अध्यापिका की सलाह बार-बार याद आ रही थी।आज उसे सीना तान कर अपने क्लास में सभी सहपाठियों के बीच में खड़ा होने का मौका नहीं मिला था। उसे बहुत अफसोस था कि मैंने अपनी राष्ट्रभाषा हिन्दी को क्यों नजरअंदाज किया।उसके मम्मी-पापा जो प्रथम आने पर रिजल्ट लेने के लिए गर्व के साथ आते थे हर तरफ उसकी तारीफ होती थी आज वह सुनने को नहीं मिला।
   वह प्रायश्चित के भाव से अपनी हिन्दी अध्यापिका से माफी मांगने पहुंचा। उसे समझ में आ गया था कि हिन्दी ही हमारी आधार है , हमारी शिक्षा के नींव को मजबूत बनाती हैं। हिन्दी के बिना हम कहीं भी सफलता नहीं हासिल कर सकते।  हिन्दी को हल्के में न लें, परिश्रम से अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में भी सफल हो सकते हैं। हिन्दी की अच्छी शिक्षा हमारे लिए आन बान और शान है।
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                 सुनीता रानी राठौर
                  ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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