क्या विचार और भाव में अंतर हो सकता है?
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विचार और भाव में अन्योन्याश्रित संबंधित है।
हमारे हृदय में जैसे विचार आते हैं उसी के अनुसार भाव उत्पन्न होते हैं। बिना विचार के भाव नहीं उत्पन्न हो सकता। भाव का संपूर्ण क्षेत्र विचार का क्षेत्र है।
विचार एक आंशिक घटना है जो हमारे मस्तिष्क में चलती है। भाव एक सर्वांग घटना है जो पूरे अस्तित्व में गूंजी जाती है।
विचार हमारे समग्र व्यक्तित्व को ओतप्रोत नहीं करता सिर्फ दिमाग में घूमता है, विचार कागज की नाव की तरह मस्तिक सतह पर डोलता रहता है जबकि भाव सर्वांग अवस्था है। जैसे ही प्रभु के संबंध में भाव उत्पन्न होते हैं तब रोम-रोम तन-प्राण सब भाव से भर जाता है।
भाव यानी समग्रता,भाव यानी सर्वांगीणता।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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