Thursday, 17 September 2020

क्या दुश्मन को भी दोस्त बनाना एक कला है?

क्या दुश्मन को भी दोस्त बनाना एक कला है?
------------------------------
दुश्मन को दोस्त बनाना वास्तव में एक बेहतरीन कला है। अपने सद्व्यहारों एवं नैतिक आचरण द्वारा हम दुश्मन का भी दिल जीत सकते हैं, उनका हृदय परिवर्तित कर सकते हैं और अपना खास दोस्त बना सकते हैं। ऐसी दोस्ती अमिट होगी।
   कोई भी इंसान न जन्मजात दोस्त होता है ना ही दुश्मन। हम अपने व्यवहार और कार्य के द्वारा दोस्त बनाते हैं और किसी को दुश्मन।
  अगर हम अपनी गलतियों को महसूस कर स्वीकार करें, उसके लिए क्षमा मांग लें तो सामने वाले विरोधी का भी हृदय द्रवित हो जाता है और वह भी अपने अक्कड़पन को त्याग अपनी खुद की खामियों को महसूस करने लग जाता है और वह दुश्मन भी दोस्त बन जाता है।
   अहं,आन और जिद  इंसान के पथ का रोड़ा है।  इसे त्यागकर विचार-विमर्श कर दुश्मन को दोस्त बना सकते हैं पर यह भी सबके वश की बात नहीं है क्योंकि यह भी एक कला है।
    महात्मा गांधी अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए अपने व्यवहार से विरोधियों के चहेते बन गए और यही कारण है अफ्रीका से लेकर अन्य देशों में भी श्रद्धा पूर्वक उनकी प्रतिमा लगाई जाती है। ऐसे अनेकों उदाहरण हमारे समाज में विद्यमान हैं।
    ----------------*------------- 
             सुनीता रानी राठौर
       ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

No comments:

Post a Comment