क्या हम सब एक मात्र परमात्मा के अंश हैं ?
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जी हां, नि:संदेह हम सब एक मात्र परमात्मा के अंश हैं पर अभिमान और अज्ञानतावश हम खुद को धर्म और जाति में बांटकर अपने अंदर अहम भाव को जन्म देते रहते हैं।
हम ब्रह्मा के मुख से पैदा हुए वह पैर से पैदा हुआ हम उच्च जाति वो निम्न जाति का ---इस तरह की संकीर्ण मानसिकता द्वारा हम मानवता को कलंकित करते हैं।
यह जानते हुए भी कि सभी परमात्मा के अंश हैं हम ऊंच-नीच का भेदभाव करते हुए एक-दूसरे के प्रति मन में हीन भाव रखते हैं जो हमारे अहंकार को प्रदर्शित करता है।
21वीं सदी में भी भले ही हम आधुनिक कहलाने का दावा करते हैं पर आज भी रूढ़िवादी विचारों से ग्रस्त हैं।
यही कारण है कि समय के साथ हमें जितना विकास करते हुए विश्व में अग्रणी स्थान बनाना चाहिए था हम नहीं बना पा रहे हैं क्योंकि जाति के कारण इंसान को हर जगह तरजीह नहीं दिया जा रहा। जब तक शीर्षस्थ पद पर बैठे नेता वोट बैंक की राजनीति जाति के आधार पर करते रहेंगे तब तक दूसरे लोग से उम्मीद करना बेकार है।
जाति के आधार पर किसी को बुद्धिमान मानना और कोई कितना भी पढ़ा लिखा हो बार-बार जाति का जिक्र करके जाति के नाम पर जलील करना--
अशोभनीय और अमानवीय प्रस्तुत होता है।
हम सभी परमात्मा के अंश हैं। हर प्राणी के प्रति हमारे हृदय में इंसानियत का भाव होनी चाहिए। अगर हम प्रभु के सच्चे भक्त हैं तो प्रेम और सद्भावना के साथ हमें सभी का आदर और सम्मान करना चाहिए।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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