क्या रिश्तों को बनाए रखने के लिए बहुत कुछ सहना पड़ता है?
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जीवन अर्थात सामंजस्य। सामंजस्य स्थापित किए बिना हम कभी भी खुशहाल जीवन नहीं जी सकते। हमें पग पग पर अनेक विचारधारा के लोगों से आमना-सामना होता है।
परिवार के सदस्यों के भी अपने निजी विचार होते हैं। सभी के विचारों को मान सम्मान देते हुए तादात्म्य संबंध स्थापित करते हुए हम जीवन के सफर में आगे बढ़ते रहते हैं।
कभी इच्छानुसार कभी अनिच्छा पूर्वक भी हामी भरनी पड़ती है, क्योंकि उससे अपनों की खुशी जुड़ी होती है।
कोई जरूरी नहीं कि हम हर पल सही हो, यह भाव मन में रखते हुए हमें अपने विचारों में बदलाव कर सामंजस्य स्थापित करना पड़ता है।
प्रकृति भी हमें यही शिक्षा देती है --फलों से लदा पेड़ सदा झुका रहता है। लचीली झुकी हुई डाली तेज हवाओं को भी झेल लेती है जबकि अकड़ी हुई डाली हवा के झोंके से टूट जाती है।
ठीक इसी तरह हमें भी अपने व्यवहारों में लचीलापन रखते हुए पारिवारिक जीवन में सामंजस्य स्थापित करना पड़ता है तभी रिश्तों में मिठास चिरस्थाई बना रहता है। रिश्तों को बनाए रखने के लिए कभी-कभी कुछ सहना भी पड़ता है क्योंकि उसमें अपनों की खुशी छुपी होती है।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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