कोरोना काल में आपने क्या सीखा है?
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कोरोना काल में जीवन की क्षणभंगुरता को महसूस कर कम साधन में सादगी पूर्ण जीवन जीना सीखा। हृष्ट पुष्ट स्वस्थ्य संपन्न व्यक्ति खुद को, अपने परिवार के सदस्यों को नहीं बचा पा रहे, मौत का भयावह मंजर देख इंसान के बेबसी को महसूस किया।
स्वास्थ्य कर्मियों के साथ -साथ दाह संस्कार करवाने तक और साथ ही दूसरे धर्म के लोग जिस तरह से (जिनके अपने बच्चे साथ नहीं दिए )उनका साथ निभाते हुए इंसानियत का परिचय दिया उसे देख कर मानवता को निभाना सीखा।
साफ सफाई पर गंभीरता से ध्यान देना सीखा।ऑनलाइन पढ़ाई के साथ-साथ ऑनलाइन कार्यक्रम देना और प्रतियोगिता में प्रतिभागी बनना सीखा।
सालों साल कंपनियां घर से अपना कार्य सुचारु रुप से जारी रख सकती है यह भी देखा और सीखा।
चुनाव प्रचार के लिए वर्चुअल रैली का भी ज्ञान मिला। ऑनलाइन खरीदारी करना सिखा। शादी पर जो फिजूलखर्ची होती थी वह कम खर्चे में सादगी पूर्ण तरीके से किस तरह कराई जा सकती है यह भी सीखने को मिला।
साथ ही सबसे महत्वपूर्ण बात पहली बार घर के सदस्यों को एक साथ रहने का मौका मिला जिससे पुरुष वर्ग के लोग और कामकाजी बेटियों को तरह-तरह के व्यंजन बनाना सिखाया और बच्चों के सहयोग से यूट्यूब के द्वारा हमने भी तरह-तरह के साज सज्जा के साथ नये व्यंजन बनाना भी सीखा और साथ ही तरह -तरह के विषयों से संबंधित ज्ञानार्जन भी की किए।
इस तरह से समय का सदुपयोग करते हुए विविध चीजों का ज्ञान प्राप्त कर हमने अपने जीवन को गुणों से सुसज्जित कर व्यक्तित्व को निखारने का प्रयास किया।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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